देश में इस्लामी निजाम लाएंगे, शरिया निजाम लागू करना है मकसद', कट्टरपंथी नेता रब्बानी बोला-मूर्तियों को तोड़ देना चाहिए
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देश में इस्लामी निजाम लाएंगे, शरिया निजाम लागू करना है मकसद’, कट्टरपंथी नेता रब्बानी बोला-मूर्तियों को तोड़ देना चाहिए

रब्बानी ने कहा कि अगर हमारे देश के लोग इस्लाम के निजाम पर आ जाएं, देश में हुकूमत ए इस्लाम कायम हो जाए तो देश में इंसाफ कायम हो जाएगा।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Aug 17, 2024, 01:00 pm IST
inविश्व
Bangladesh Sheikh Muhiuddin Rabbani

बांग्लादेश में नई सत्तापलट के बाद वहां पर कट्टरपंथी लगातार ऊट-पटांग करते रहते हैं। इसी क्रम में कट्टरपंथी हिफाजत ए इस्लाम के वाइस प्रेसीडेंट मुहिउद्दीन रब्बानी ने दो टूक कहा है कि देश कानून और संविधान के हिसाब से नहीं, बल्कि इस्लाम के हिसाब से चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि बांग्लादेश इस्लामी निजाम पर कायम रहे।

इसे भी पढ़ें: बांग्लादेश में 22 दिनों के संघर्ष में कम से कम 650 लोग मारे गए: UN

दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में रब्बानी ने कहा कि अगर हमारे देश के लोग इस्लाम के निजाम पर आ जाएं, देश में हुकूमत ए इस्लाम कायम हो जाए तो देश में इंसाफ कायम हो जाएगा। रब्बानी ने ये भी कहा कि हम चाहते हैं कि बांग्लादेश में ‘शरिया निजाम’ लागू हो, लेकिन अभी ऐसा नहीं है। इसीलिए निजाम कायम करने के लिए जबरदस्ती करना हम पसंद नहीं करते हैं।

वहीं रब्बानी ने बांग्लादेश के जसोर, रंगपुर, मेहरपुर, चट्टोग्राम जैसे स्थानों में मंदिरों पर हमले को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि हमारा इस्लाम ऐसा नहीं करता है जब तक हमारे नबीं जिंदा थे, तब तक उन्होंने किसी पर कोई जुल्म नहीं किया। उन्होंने कहा कि हमने हिंसा को रोकने की बहुत कोशिश की थी। इसके लिए हमने नेताओं से कहा कि देश के सारे मंदिरों और चर्च की हिफाजत करने के लिए कहा था।

इसे भी पढ़ें: मोहम्मद यूनुस ने प्रधानमंत्री मोदी को किया फोन , बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा का आश्वासन दिया

जबकि, उन्होंने शेख मुजीबुर रहमान की मूर्ति को तोड़े जाने की घटना को लेकर रब्बानी ने कहा कि पहली बात तो मूर्तियां ही बनानी नहीं चाहिए, लेकिन अगर बना ही ली हैं, तो सरकार को इन्हें सरकार को तोड़ देना चाहिए। उसने ये भी कहा कि अगर हमारे समर्थन वाली सरकार बनेगी, तो हम गुजारिश करेंगे कि पूरे देश में बनी तो सभी मूर्तियों को तोड़ देना चाहिए।

क्या करता है हिफाजत ए इस्लाम

गौरतलब है कि हिफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश इस्लाम, कुरान, हदीस की हिफाजत के लिए काम करता है। इसकी शुरुआत 2010 में हुई थी। ये इस्लामिक संगठन बांग्लादेश में धार्मिक राजनीति का सेंटर पॉइंट बन गया है।

Topics: Bangladeshइस्लामिक कट्टरपंथीबांग्लादेशहिफाजत ए इस्लाममुहिउद्दीन रब्बानीHefazat-e-IslamIslamic fundamentalistMuhiuddin Rabbani
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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