आपातकाल : कलंक काल
July 15, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

आपातकाल : कलंक काल

आज राहुल गांधी घूम-घूम कर कह रहे हैं कि केंद्र सरकार संविधान को बदलना चाहती है। लेकिन वे अपनी दादी इंदिरा गांधी की चर्चा कभी नहीं करते, जिन्होंने आपातकाल लागू कर पूरे लोकतंत्र की हत्या की थी

Written byहितेश शंकरहितेश शंकर
Jul 12, 2024, 08:45 pm IST
in भारत, सम्पादकीय
आपातकाल के दौरान आम लोगों पर अत्याचार करती पुलिस

आपातकाल के दौरान आम लोगों पर अत्याचार करती पुलिस

आपातकाल। एक ऐसा दौर, जब शासन का अहंकार जनमानस पर कहर बनकर टूटा। उन यातनाओं के बारे में सोचकर आज भी सिहरन होती है। 21 महीने के उस कालखंड में निरंकुश शासन ने प्रत्यक्ष रूप से जो किया, उसे न तो भूला जा सकता है और न ही भूलना चाहिए। उस दौर का झरोखा खोलने वाले कुछ प्रश्न, कुछ स्मृतियों के सूत्र भी हैं। क्या आप न्यायमूर्ति ए.एन. रे के बारे में जानते हैं? न्यायमूर्ति बेग के बारे में जानते हैं? अडनीर ट्रस्ट मामला क्या था? 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण कैसे किया गया? या देशी राजाओं के प्रिवी पर्स कैसे खत्म किए गए? या यह कि ये सब सूत्र घटनाक्रम के रूप में आपस में कैसे जुड़े थे।

हितेश शंकर

अगर आपको यह नहीं पता, तो आप संभवत: इस बात से भी अनभिज्ञ होंगे कि आपकी स्वतंत्रता कितनी कीमती है। उस पर किन लोगों की निगाह है? किन लोगों ने उस पर कुठाराघात किया और इसे बचाने की लड़ाई किस-किसने लड़ी?

पहले आपातकाल की बात। आपातकाल भले ही 25 जून, 1975 को लगाया गया था, लेकिन इसकी तैयारी पहले से थी। इसके पीछे कारण था पारिवारिक राजनीति, जो दंभ पैदा करती है, क्योंकि इंदिरा गांधी ने अपने पिता जवाहर लाल नेहरू को शासन करते हुए देखा था और उन्हें लगता था कि शासन ऐसे ही किया जाता है। वह दंभ, प्रतिबद्ध तंत्र और तानाशाही की प्रवृत्ति, इन तीनों ने आपातकाल की नींव रखी थी।

 

1971 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी 352 सीटें जीतकर सत्ता में लौटी थीं। लेकिन उनके मन में सर्वोच्च न्यायालय को ‘ठिकाने’ लगाने का प्रबल संकल्प हिलोरें ले रहा था, क्योंकि वह उनकी तानाशाही में लगातार अवरोधक बना हुआ था। 11 जनवरी, 1966 को लालबहादुर शास्त्री के निधन के एक सप्ताह बाद वे प्रधानमंत्री बनीं। 1967 में गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आया, जिसमें कहा गया कि संसद कोई भी मौलिक अधिकार छीन या उसमें कटौती नहीं कर सकती। नीति निर्देशक सिद्धांतों के कार्यान्वयन के लिए मौलिक अधिकारों में संशोधन नहीं किया जा सकता। दरअसल, पंजाब के जालंधर में हेनरी और विलियम गोलकनाथ परिवार के पास 500 एकड़ से अधिक कृषि भूमि थी, जिसे ‘अतिरिक्त’ बताते हुए पंजाब सुरक्षा और भूमि काश्तकारी अधिनियम-1953 के तहत सरकार ने छीन लिया था।

इंदिरा गांधी को सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय खटक रहा था। इसलिए जब दूसरी बार वे सत्ता में आईं, तो उन्होंने 24वां और 25वां संविधान संशोधन कर उस पर प्रतिक्रिया दी। 24वें संविधान संशोधन में उन्होंंने यह व्यवस्था की कि संसद के पास संविधान संशोधन अधिनियमों को लागू कर किसी भी मौलिक अधिकार को कम करने या छीनने की शक्ति है। इसी तरह, 25वें संशोधन में उन्होंने संविधान में एक नया अनुच्छेद 31सी जोड़ा, जिससे लोगों के लिए संपत्ति की खरीद को नियंत्रित करने वाले कानूनों को चुनौती देना असंभव हो गया। साथ ही, ‘मुआवजा’ शब्द की ‘पर्याप्त मुआवजा’ के रूप में न्यायिक व्याख्या को देखते हुए उसे ‘रकम’ कर दिया।

इससे पहले, इंदिरा सरकार ने 19 जुलाई, 1969 को ‘बैंकिंग कंपनीज आर्डिनेंस’ नाम से एक अध्यादेश जारी कर देश के 14 बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया था। इस अध्यादेश का प्रारूप 24 घंटे में तैयार किया गया था। उस समय बैंकिंग डिवीजन का प्रभार डी.एन. घोष के पास था। 17 जुलाई को उनके पास एक फोन आया और उनसे रातोंरात अध्यादेश का प्रारूप तैयार करने को कहा गया। दो दिन बाद यानी 19 जुलाई को रात 8:30 बजे इंदिरा गांधी ने आकाशवाणी पर बैंकों के राष्ट्रीयकरण की घोषणा की थी। बाद में इसी नाम से विधेयक पारित कर कानून बनाया गया।

तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी। अहमद के हस्ताक्षर के बाद ही देश में आपातकाल लागू हुआ था

इसी तरह, 1971 में इंदिरा गांधी ने देशी राजाओं को मिलने वाले भत्ते ‘प्रिवी पर्स’ को खत्म कर दिया था। प्रिवी पर्स भारत की पूर्ववर्ती रियासतों के शासक परिवारों को दिया जाने वाला एक भुगतान था, जो भारत की स्वतंत्रता के बाद 1947 में पहली बार भारत के साथ एकीकृत होने और बाद में 1949 में अपने राज्यों के भारत में विलय के उनके समझौतों के हिस्से के तौर पर दिया जाता था।

ये तीन ऐसे मुद्दे थे, जहां सरकार की राय और सर्वोच्च न्यायालय की राय आपस में नहीं मिलती थी। सर्वोच्च न्यायालय ने उक्त तीनों मामलों में सरकार के कदम को असंवैधानिक बताकर खारिज कर दिया, जिससे इंदिरा गांधी बुरी तरह कुपित थीं। इसलिए बहुमत का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के तीनों फैसलों को पलट दिया और सार्वजनिक तौर पर प्रतिबद्ध न्यायपालिका और नौकरशाही को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता घोषित किया।

इसी तरह, केशवानंद भारती मामले में 68 दिन की बहस के बाद 24 अप्रैल, 1973 को सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय भारत के लोकतंत्र का आधार स्तंभ तो बना ही, इसने इंदिरा गांधी द्वारा न्यायपालिका को डराने, उसे नियंत्रित करने और कब्जाने की मंशा को भी उजागर किया। यह मामला अडनीर न्यास की जमीन के अधिग्रहण से जुड़ा था। बाबा केशवानंद भारती केरल के कासरगोड स्थित अडनीर मठ के प्रमुख थे। केरल सरकार ने मठ की 400 एकड़ में से 300 एकड़ जमीन अधिग्रहित कर पट्टेदारों को खेती के लिए दे दी थी, जिसे केशवानंद ने चुनौती दी थी। इस प्रकार यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में पहुंचा था। इंदिरा गांधी ने पूरा जोर लगाया, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

देश के न्यायिक इतिहास में पहली बार 13 न्यायाधीशों की पीठ ने 7-6 के बहुमत से निर्णय दिया। इसमें संविधान के आधारभूत सिद्धांत को प्रतिपादित किया गया, जो मानता है कि संविधान की कुछ मौलिक विशेषताओं जैसे-लोकतंत्र, पंथनिरपेक्षता, संघवाद और कानून का शासन को संसद द्वारा संशोधित नहीं किया जा सकता है। न्यायालय ने यह भी माना कि न्यायिक समीक्षा की शक्ति संविधान के मूल ढांचे का एक अभिन्न अंग है और इसे संसद द्वारा संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से नहीं छीना जा सकता। इसी के साथ न्यायालय ने संविधान की सर्वोच्चता, कानून का शासन, न्यायालय की अक्षुण्ण स्वतंत्रता, संसदीय व्यवस्था, निष्पक्ष चुनाव, गणतांत्रिक ढांचा, संप्रभुता और आधारभूत ढांचे को परिभाषित किया और इनमें किसी भी प्रकार के संशोधन पर रोक लगा दी।

यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि 13 न्यायाधीशों की पीठ में 7 न्यायाधीश फैसले के पक्ष में थे। इनमें मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.एम. सीकरी, न्यायमूर्ति के.एस. हेगड़े, न्यायमूर्ति ए.के. मुखर्जी, न्यायमूर्ति जे.एम. शेलाट, न्यायमूर्ति एन. ग्रोवर, न्यायमूर्ति पी. जगनमोहन रेड्डी और न्यायमूर्ति एच.आर. खन्ना शामिल थे। वहीं, 6 न्यायाधीश फैसले से सहमत नहीं थे। इनमें थे न्यायमूर्ति ए.एन. रे, न्यायमूर्ति डी.जी. पालेकर, न्यायमूर्ति के.के. मैथ्यू, न्यायमूर्ति एच.एम.बेग, न्यायमूर्ति एस.एन. द्विवेदी और न्यायमूर्ति वाई.के. चंद्रचूड़।

इस फैसले से नाराज इंदिरा सरकार ने क्या किया? अगले ही दिन यानी 25 अप्रैल को प्रधानमंत्री कार्यालय से न्यायमूर्ति एन.एन. रे को फोन किया गया। उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें भारत के नए मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) का पद स्वीकार है? उन्हें सोचने का समय भी नहीं दिया गया। उनसे 2 घंटे में जवाब देने को कहा गया और अगले ही दिन यानी 26 अप्रैल, 1973 को उन्हेंं भारत का मुख्य न्यायाधीश बना दिया गया। सरकार ने तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों न्यायमूर्ति शेलाट, न्यायमूर्ति ग्रोवर और न्यायमूर्ति हेगड़े को दरकिनार कर यह फैसला किया। ये तीनों उन 7 न्यायाधीशों में शामिल थे, जिन्होंने कहा था कि सरकार संविधान से ऊपर नहीं है। मतलब साफ है कि न्यायमूर्ति रे को सरकार के पक्ष में खड़े होने का इनाम मिला। शपथ ग्रहण के दो दिन बाद न्यायमूर्ति रे ने नए सिरे से 13 न्यायाधीशों की पीठ गठित कर ‘मास्टर आफ रोस्टर’ का दुरुपयोग किया।

पाञ्चजन्य (2 जुलाई, 2023) का आवरण पृष्ठ।

जब कोई न्यायपालिका में हस्तक्षेप आदि की बात करता है, तो यह नहीं देखता कि न्यायमूर्ति रे ने भारत के नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालते ही अचानक केशवानंद भारती मामले की समीक्षा के लिए 13 न्यायाधीशों की पीठ कैसे पुनर्गठित कर दी थी। यही नहीं, मामले की समीक्षा भी शुरू हो गई, जबकि किसी ने न तो समीक्षा और न ही पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। एक न्यायाधीश ने जिज्ञासावश पूछा भी कि यह मामला सूचीबद्ध क्यों है? समीक्षा किसने दायर की? तब ननी पालकीवाला, जो उस मामले का नेतृत्व कर रहे थे, ने कहा, ‘मैं याचिकाकर्ता हूं।’ उनका सवाल था कि आप किसके कहने पर इस समीक्षा याचिका पर विचार कर रहे हैं? आपने 13 न्यायाधीशों की पीठ क्यों गठित की है?

बहरहाल, इंदिरा गांधी की मनमानी जारी रही। 1975 में उन्होंने संविधान में 39वां और 41वां संशोधन किया। इसमें यह व्यवस्था की गई कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव को अदालत में किसी भी आधार पर न तो चुनौती दी जा सकती है और न ही कोई मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। केशवानंद मुकदमे के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय ने इन दोनों संशोधनों को खारिज कर दिया था। इसी तरह, 1975 में आपातकाल में मौलिक अधिकारों की बहाली से जुड़ा एडीएम जबलपुर बनाम शिवकांत शुक्ला मामला सर्वोच्च न्याायालय पहुंचा तो पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 4-1 के बहुमत से सरकार के पक्ष में निर्णय दिया। अकेले न्यायमूर्ति एच.आर. खन्ना ने सरकार के खिलाफ निर्णय दिया। इस कारण वे भी इंदिरा गांधी के निशाने पर आ गए। उन्हें इसकी सजा मिली। वे वरिष्ठतम थे, लेकिन सरकार ने उन्हें दरकिनार कर न्यायमूर्ति एम.एच बेग को देश का मुख्य न्यायाधीश बना दिया, क्योेंकि वह केशवानंद मामले में भी सरकार के साथ खड़े थे।

न्यायमूर्ति बेग 1978 तक मुख्य न्यायाधीश रहे। इसके बाद उन्हें अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। वे 1981-88 तक आयोग के अध्यक्ष रहे। कार्यकाल पूरा होने के बाद कांग्रेस ने उन्हें अपने मुखपत्र ‘दैनिक हेराल्ड’ का संचालक नियुक्त कर दिया। बहरूल इस्लाम की कहानी तो सभी जानते होंगे। उन्हें जब चाहा तब सांसद, जब चाहा तब उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बना दिया गया। न्यायमूर्ति जगनमोहन रेड्डी ने अपनी पुस्तक ‘वी हैव रिपब्लिक’ में केशवानंद भारती मामले के बारे में विस्तार से लिखा है। वास्तव में इंदिरा गांधी को संविधान के तिरस्कार की शिक्षा अपने पिता नेहरू से मिली थी, जिन्होंने कहा था, ‘‘यदि संविधान कांग्रेस की नीतियों के विपरीत जाता है, तो उसे बदलकर और अनुकूल बनाया जाना चाहिए।’’ यहां बाबासाहेब आंबेडकर की एक बात याद आती है। संविधान सभा में बहस के दौरान संविधान के प्रारूप पर आलोचनाओं का जवाब देते हुए उन्होंने कहा था, ‘‘मै यह कहूंगा कि यदि नवीन संविधान के अंतर्गत कोई गड़बड़ी पैदा होती है, तो इसका कारण यह नहीं होगा कि हमारा संविधान खराब था, बल्कि यह कहना चाहिए कि सत्तारूढ़ व्यक्ति ही अधम था, नीच था।’’ उनकी आशंका आखिरकार 1975 में सच साबित हुई।

बहरहाल, इंदिरा गांधी को इस बात का भान था कि जिस तरह मोतीलाल नेहरू एवं गांधी जी के सहयोग से उनके पिता जवाहर लाल कांग्रेस और भारतीय जनता पर थोप दिए गए थे और नेहरू के एकाधिकार व उनके प्रति चाटुकारिता की परंपरा के चलते ही इंदिरा भी सरकार पर थोपी गई थीं। इसलिए उन्हें मालूम था कि इस अनैतिक परंपरा के बूते वे खुद भी संविधान पर अपनी मनमर्जी थोप सकती हैं और उन्होंने ऐसा किया भी।

पाञ्चजन्य का यह अंक आपातकाल की उन्हीं आपबीतियों और अनकही कहानियों को आपके साथ साझा करने का एक प्रयास है। हमारा यह प्रयास आपको कैसा लगा, अवश्य बताइए।

@hiteshshankar

आपातकाल का संघर्ष : वंदेमातरम् नहीं रुका

 

Topics: ‘बैंकिंग कंपनीज आर्डिनेंसइंदिरा गांधीसंविधान के आधारभूत सिद्धांतआपातकालBanking Companies OrdinanceIndira GandhiKesavananda BharatiEmergencyBasic Principles of the Constitutionस्वतंत्रताindependenceकेशवानंद भारतीलालबहादुर शास्त्रीLal Bahadur Shastriपाञ्चजन्य विशेष
हितेश शंकर
हितेश शंकर
हितेश शंकर पत्रकारिता का जाना-पहचाना नाम, वर्तमान में पाञ्चजन्य के सम्पादक [Read more]
Share1TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

डॉ. श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती : स्वतंत्र भारत के औद्योगिक पुनर्जागरण के शिल्पी

लोकतंत्र सेनानी कमला शंकर पांडेय

मोदी-योगी को गाली देने वाले संविधान की बात करते हैं, वे इमरजेंसी का समय कैसे भूल सकते हैं

लाठियां लेकर परिक्रमा करते श्रद्धालु

शौर्य की प्रतीक अनूठी विरासत

तुर्किये में डॉक्टरों पर एक्शन

तुर्किये में सिजेरियन डिलीवरी कराने वाले 100 डॉक्टर सस्पेंड? क्यों उठाया ये कदम, कैसे मचा बवाल?

अयोध्या में स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज और श्री कृष्ण मोहन मीडिया को उन वस्तुओं को दिखाते हुए, जिनके बारे में कहा गया कि वे गायब हैं।

असहज अवश्य किन्तु आस्था अडिग

आस्था को लांछित करने का कुचक्र

Load More

ताज़ा समाचार

Uttarakhand Voter List 2026 Draft Publication CEO BVRC Purushottam Election Commission Camp

उत्तराखंड में SIR का प्रथम चरण पूरा: 19 लाख वोटरों के डेटा में मिली गड़बड़ी, जानिए कैसे सुधारें अपना नाम!

Punjab Terror Module ISI Drone Dropped Weapons AK 47 LMG Seized Amritsar Rural Police Delhi Threat

Punjab Terror Module: स्वतंत्रता दिवस से पहले ISI की बड़ी साजिश नाकाम! 2 AK-47, 2 LMG राइफलों और बमों के साथ 3 गिरफ्तार

Punjab Drug Bust Amritsar Counter Intelligence Seizes Heroin DGP Gaurav Yadav Pakistan Border Smuggling

पंजाब में सीमापार तस्करी नेटवर्क ध्वस्त! ₹210 करोड़ की 30 KG हेरोइन के साथ 2 तस्कर गिरफ्तार, विदेशी हैंडलर से जुड़े तार

UP Education Services Selection Commission Prayagraj

यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग ने PGT, TET और अन्य परीक्षाओं को लेकर जारी की चेतावनी

Jagannath Rath Yatra Significance Darubrahma Puri Temple King Indradyumna

पुरी रथयात्रा विशेष: भारत की सनातन आस्था का महामहोत्सव है जगन्नाथ स्वामी का रथयात्रा उत्सव

India on PoJK Pakistan Human Rights Violations External Affairs Ministry New Delhi Global Community

पीओजेके को लेकर भारत सख्त, कहा- ‘PoJK में कुकृत्यों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराए अंतरराष्ट्रीय समुदाय’

International Court Credibility ICJ ICC Bias Debate Global Justice System National Sovereignty Marco Rubio

क्या अंतरराष्ट्रीय न्यायालय भी जवाबदेही से ऊपर हैं? अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर छिड़ी बड़ी बहस!

Afghan Makeup Trend Viral Video Reels Instagram Women Burqa Protest Social Media

क्या है अफ़गान मेकअप ट्रेंड? और क्यों हो रहा है वायरल? बुर्के के पीछे छिपा है ये हैरान करने वाला सच!

CM Pushkar Singh Dhami Swami Ramdev Acharya Balkrishna Harela Parva Malagram Dhanwantari Dham Herbal World

Uttarakhand Harela Parva 2026: मालाग्राम में सीएम पुष्कर सिंह धामी, स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने किया पौधारोपण

Teejan Bai Passes Away Pandavani Singer Lokmanthan Parivar J Nandakumar Tribute Bhopal 2016

लोकसंस्कृति की अमर साधिका तीजन बाई का महाप्रयाण: लोकमंथन परिवार ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies