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तृणमूल : तिनका भर आस

पश्चिम बंगाल के हिंदू सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की गुंडागर्दी से बेहद आहत हैं। ऐसे में उनका स्वाभाविक झुकाव भाजपा की ओर हो रहा है

Written byडॉ. अम्बा शंकर बाजपेयीडॉ. अम्बा शंकर बाजपेयी
Apr 21, 2024, 07:31 am IST
in भारत, मत अभिमत, पश्चिम बंगाल
संदेशखाली के आरोपियों के विरुद्ध प्रदर्शन करतीं महिलाएं। इन महिलाओं के गुस्से का सामना ममता बनर्जी नहीं कर पा रही हैं (फाइल चित्र)

संदेशखाली के आरोपियों के विरुद्ध प्रदर्शन करतीं महिलाएं। इन महिलाओं के गुस्से का सामना ममता बनर्जी नहीं कर पा रही हैं (फाइल चित्र)

इस बार लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ दल कहीं सबसे ज्यादा डरा हुआ है, तो वह है पश्चिम बंगाल। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेता इस तरह भयभीत हैं कि वे चुनाव प्रचार के दौरान आपा खो रहे हैं। भय के अनेक कारण हैं। जैसे संदेशखाली की घटनाएं, ऊपर से राज्य में भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता। अब पूरी दुनिया को पता चल गया है कि संदेशखाली में शाहजहां शेख और उसके गुर्गों ने हिंदू महिलाओं के साथ जो कुछ किया, उसकी पूरी जानकारी ममता बनर्जी को थी। यही कारण है कि शाहजहां को बचाने के लिए ममता ने सारी हदें पार कर दीं। इसके बावजूद शाहजहां बचा नहीं और अभी वह जेल में है।

पश्चिम बंगाल के लोगों का मानना है कि शाहजहां पकड़ में इसलिए आया, क्योंकि भाजपा ने इस मुद्दे को जोर-दार ढंग से उठाया। भले ही तृणमूल के नेता कह रहे हों कि संदेशखाली में ऐसा कुछ नहीं हुआ है, जिस पर हायतौबा करने की जरूरत हो। लेकिन पश्चिम बंगाल का आम हिंदू संदेशखाली की घटनाओं से बेहद आहत है। उसे लगने लगा है कि तृणमूल कांग्रेस हिंदुओं के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। हिंदू समाज की यह सोच ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी मुसीबत है।

पश्चिम बंगाल में लोकसभा की कुल 42 सीटें हैं। प्रशासनिक दृष्टि से पश्चिम बंगाल को दो भागों में विभाजित किया गया है- उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल। 2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर बंगाल की 8 लोकसभा सीटों में से 7 पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। उत्तर मालदा, बालूरघाट, रायगंज, कूचबिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग में भाजपा सफल रही थी। उत्तर बंगाल में भाजपा की स्थिति बहुत ही मजबूत है। इस बार भी कूचबिहार से केंद्रीय गृह राज्यमंत्री निशिथ प्रमाणिक भाजपा के उमीदवार हैं, वहीं बालूरघाट से प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. सुकांत मजुमदार चुनाव लड़ रहे हैं।

दक्षिण बंगाल में लोकसभा की 34 सीटें हैं। यह क्षेत्र प्रदेश में सबसे ज्यादा घनी आबादी वाला है और यहां मुसलमानों की आबादी सबसे अधिक है। 1947 के विभाजन के बाद पूर्वी पाकिस्तान से आए ज्यादातर हिंदू शरणार्थी भी इसी क्षेत्र में रहते हैं। सबसे अधिक बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठिए भी इसी क्षेत्र में हैं। मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर 24 परगना, 24 दक्षिण परगना, कोलकाता आदि जिले इसी क्षेत्र में हैं। मुर्शिदाबाद जिले में 78 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है।

इस क्षेत्र की बेहरामपुर सीट से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी चुनाव लड़ रहे हैं। नदिया जिले में 2 लोकसभा क्षेत्र हैं-कृष्णानगर व रानाघाट। कृष्णानगर से तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा उम्मीदवार हैं। भाजपा ने यहां से राजा कृष्णचंद्र रॉय (उनके नाम पर ही कृष्णानगर रखा गया है) की वंशज अमृता रॉय को उम्मीदवार बनाया है। अमृता रॉय यहां पर राजमाता के रूप में जानी जाती हैं। 24 उत्तर परगना में 5 लोकसभा सीटें हैं-बैरकपुर, बारासात, दमदम, बोंनगांव और बशीरहाट। बैरकपुर से भाजपा ने उन्हीं अर्जुन सिंह को टिकट दिया है, जो 2019 में भाजपा के टिकट पर ही जीते थे, लेकिन बाद में तृणमूल में शामिल हो गए थे।

तृणमूल ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वे फिर से भाजपा में आ गए। बोंनगांव से केंद्रीय राज्यमंत्री शांतनु ठाकुर पुन: भाजपा से उम्मीदवार हैं। भाजपा ने बशीरहाट में रेखा पात्रा को उतारा है। ये वही रेखा हैं, जिनका शोषण शाहजहां शेख और उसके गुर्गों ने संदेशखाली में किया था। यहां की वर्तमान सांसद तृणमूल नेता और अभिनेत्री नुसरत जहां हैं। इस बार पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया है। 24 दक्षिण परगना जिले में 4 लोकसभा सीटें हैं। यह जिला भी मुस्लिम बहुल है। डायमंड हार्बर, मथुरापुर व जयनगर में मुस्लिम मतदाता ही हार-जीत तय करते हैं।

डायमंड हार्बर से ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार यहां से फुरफुराशरीफ के मौलाना अब्बास सिद्धिकी की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट भी चुनाव मैदान में है। इस कारण अभिषेक की राह आसान नहीं लग रही है। जादवपुर सीट से भाजपा के उम्मीदवार हैं डॉ. अनिर्बान गांगुली। मुख्य मुकाबला तृणमूल और भाजपा के बीच है। दक्षिण कोलकाता व उत्तर कोलकाता में भी तृणमूल और भाजपा के बीच ही मुकाबला है। हुगली जिले में तीन लोकसभा सीटें हैं- हुगली, श्रीरामपुर व आरामबाग। हुगली में एक बार फिर से भाजपा की लॉकेट चटर्जी चुनाव लड़ÞÞ रही हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने रचना बनर्जी को उतारा है।

हावड़ा जिले में दो लोकसभा सीटें हैं- हावड़ा सदर व उलूबेरिया। पूर्व मेदनीपुर जिले में तामलुक व कांथी और पश्चिम मेदनीपुर में घाटाल व मेदनीपुर के नाम से लोकसभा क्षेत्र हैं। इन चारों पर भाजपा नेता शुवेंदु अधिकारी का विशेष प्रभाव रहता है। सबसे दिलचस्प मुकाबला तामलुक में है, जहां से भाजपा ने पूर्व न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय को उतारा है। वहीं मेदनीपुर से भाजपा के अग्निमित्र पॉल उम्मीदवार हैं। यहां से पहले दिलीप घोष सांसद थे। इस बार वे बर्धमान-दुर्गापुर से चुनाव लड़ रहे हैं। आसनसोल में तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी हैं अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा। बांकुड़ा से केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सुभाष सरकार पुन: भाजपा से उम्मीदवार हैं।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का राजनीतिक ‘आतंकवाद’ चरम पर है। तृणमूल के गुंडे भाजपा के कार्यकर्ताओं की हत्या तक कर रहे हैं। मुस्लिम तुष्टीकरण की तो कोई सीमा ही नहीं है। इस स्थिति में आम हिंदू भाजपा से ही आस लगाए बैठा है।

Topics: Increasing popularity of BJPstep-motherly treatment of Hindusincidents of Sandeshkhali.हिंदू समाजआतंकवादterrorismhindu societyपाञ्चजन्य विशेषभाजपा की बढ़ती लोकप्रियताहिंदुओं के साथ सौतेला व्यवहारसंदेशखाली की घटनाएं
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