अनुसंधान: देश में सस्ती स्वदेशी एलाइजा किट से होगी  जेई वायरस की जांच, आईवीआरआई ने कराया पेटेंट
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अनुसंधान: देश में सस्ती स्वदेशी एलाइजा किट से होगी  जेई वायरस की जांच, आईवीआरआई ने कराया पेटेंट

चाइनीज किट के मुकाबले एक तिहाई से कम भी होंगे इंडियन किट के रेट, बरेली के वैज्ञानिकों की मेहनत रंग लाई 

Written byअनुरोध भारद्वाजअनुरोध भारद्वाज
Jul 7, 2023, 08:49 pm IST
inभारत, उत्तराखंड
आईवीआरआई बरेली ने हजारों जमीनी परीक्षण के बाद जापानी इंसेफेलाइटिस ( जेई) वायरस की जांच के लिए बेहद सस्ती स्वदेशी किट बनाने में कामयाबी हासिल की है, जल्द ही किट बाजार में मिलना शुरू हो जाएगी।

आईवीआरआई बरेली ने हजारों जमीनी परीक्षण के बाद जापानी इंसेफेलाइटिस ( जेई) वायरस की जांच के लिए बेहद सस्ती स्वदेशी किट बनाने में कामयाबी हासिल की है, जल्द ही किट बाजार में मिलना शुरू हो जाएगी।

बरेली। जापानी इंसेफेलाइटिस ( जेई) वायरस की जांच के लिए भारत को अब दूसरे देशों से महंगी एलाइजा किट मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली (आईवीआरआई) ने स्वदेशी एलाइजा किट बनाने में कामयाबी हासिल कर ली है। खास बात ये है कि स्वदेशी किट चाइनीज टेस्टिंग किट के मुकाबले एक तिहाई से भी कम रेट में उपलब्ध होने जा रही है। पुणे की कंपनी जल्द ही इस किट को बाजार में उतारने वाली है।

आईवीआरआई बरेली की वैज्ञानिक डॉ. हिमानी धांजे के मुताबिक, फ्लेवी वायरस की जांच के लिए दो तरह की किट बनाई हैं। एक किट से पुराने संक्रमण का भी पता किया जा सकता है, जबकि दूसरी हाल में हुए संक्रमण की जांच में सक्षम है।
आईवीआरआई बरेली की वैज्ञानिक डॉ. हिमानी धांजे के मुताबिक, फ्लेवी वायरस की जांच के लिए दो तरह की किट बनाई हैं। एक किट से पुराने संक्रमण का भी पता किया जा सकता है, जबकि दूसरी हाल में हुए संक्रमण की जांच में सक्षम है।

जापानी इंसेफेलाइटिस बेहद खतरनाक संक्रामक रोग है जो सूकर में होने वाले फ्लेवी वायरस के की वजह से प्रसार लेता है। जेई वायरस की जांच के लिए देश में चीन से एलाइजा किट आयात की जाती थीं, जो बहुत महंगी साबित होती थीं। चाइनीज किट की कीमत 50 हजार रुपये तक। भारत में यूपी, बिहार, पूर्वोत्तर असम जेई की चपेट में ज्यादा रहे हैं और काफी मौतें भी देखने को मिली हैं। दरअसल, जेई  वायरल संक्रमण के कारण होता है जो सीधे मस्तिष्क को प्रभावित करता है और कोमा के बाद मौत की वजह तक बन जाता है।

भारत में यूपी, बिहार, पूर्वोत्तर असम जेई की चपेट में ज्यादा रहे हैं और काफी मौतें भी देखने को मिली हैं, यूपी में गोरखपुर, महाराजगंज, संत कबीरनगर, बस्ती, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, मऊ जिले ज्यादा जेई प्रभावित माने जाते हैं।
भारत में यूपी, बिहार, पूर्वोत्तर असम जेई की चपेट में ज्यादा रहे हैं और काफी मौतें भी देखने को मिली हैं, यूपी में गोरखपुर, महाराजगंज, संत कबीरनगर, बस्ती, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, मऊ जिले ज्यादा जेई प्रभावित माने जाते हैं।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, महाराजगंज, संत कबीरनगर, बस्ती, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, मऊ में जेई प्रभावित रहे हैं। जेईवी आम तौर पर मच्छरों द्वारा फैलता है और विशेष रूप से क्यूलेक्स जीनस के मच्छरों द्वारा इसका प्रसार होता है। सूकर व जंगली पक्षी जेईवी का वाहक बनते हैं। 2017 के बाद से देश में सरकार जेई की रोकथाम को तेजी से टीकाकरण अभियान चला रही है। आईवीआरआई बरेली ने अब जेईवी जांच किट बनाने में सफलता हासिल कर इसके इलाज और रोकथाम के प्रयासों को मजबूती देने का काम किया है।

देश में जेई का प्रकोप बढ़ता देख आईसीएआर दिल्ली ने आईवीआरआई बरेली को स्वदेशी किट बनाने का प्रोजेक्ट सौंपा था, वैज्ञानिकों ने सात बरस की मेहनत के बाद सस्ती स्वदेशी किट बनाने में कामयाबी हासिल की है, पुणे की कंपनी जल्दी ही किट को बाजार में उतारने जा रही है।
देश में जेई का प्रकोप बढ़ता देख आईसीएआर दिल्ली ने आईवीआरआई बरेली को स्वदेशी किट बनाने का प्रोजेक्ट सौंपा था, वैज्ञानिकों ने सात बरस की मेहनत के बाद सस्ती स्वदेशी किट बनाने में कामयाबी हासिल की है, पुणे की कंपनी जल्दी ही किट को बाजार में उतारने जा रही है।

देश में जब इस वायरस से संक्रमण के मामले बढ़ने लगे थे तो आईसीएआर दिल्ली ने आईवीआरआई बरेली को स्वदेशी किट बनाने का प्रोजेक्ट सौंपा था। पशुधन स्वास्थ्य विभाग की वैज्ञानिक डॉ. हिमानी धांजे ने विभागाध्यक्ष डॉ. केएन भिलगांवकर के निर्देशन में इस प्रोजेक्ट को हाथ में लेकर अनुसंधान की दिशा में कदम आगे बढ़ाए। डॉ. हिमानी ने मीडिया को बताया कि 2016 से 2019 के बीच कई परीक्षण किए गए गए। प्रयोग सफल रहा और आईवीआरआई बरेली में आईजीएम एलाइजा किट बनाने में कामयाबी हासिल हुई। इसके बाद चार साल विभिन्न राज्यों के अलग-अलग इलाकों से हजारों सैंपल जुटाकर आईजीएम एलाइजा किट का जमीनी परीक्षण किया गया। हर तरह से खरी उतरने के बाद आईजीएम एलाइजा किट का पेटेंट कराया गया है।

वैज्ञानिक डॉ. हिमानी धांजे के मुताबिक, फ्लेवी वायरस की जांच के लिए आईवीआरआई ने दो तरह की किट बनाई हैं। इनमें पहली का नामकरण जापानी इंसेफेलाइटिस आईजीजी एलाइजा किट के रूप में किया गया है। इस किट से जांचने पर वायरस से संक्रमित पुराने केस का भी पता चल सकता है। वहीं, दूसरी किट जापानी इंसेफेलाइटिस आईजीएम एलाइजा किट है, जो जल्दी में हुए संक्रमण की जांच करने में कारगर है। जमीनी परीक्षण में दोनों ही किट से 15000 सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं। पुणे की कंपनी जेईवी जांच किट को बाजार में लाने को है। सस्ती किट उपलब्ध होने से जेई का प्रकोप त्वरित रूप से रोकना संभव होगा।

Topics: स्वदेशी किटडॉ. केएन भिलगांवकरआईवीआरआई बरेलीपरीक्षणचाइनीज किट महंगीभारतीय वैज्ञानिकों को कामयाबीजेई वायरसआईसीएआर दिल्लीआयातबाजार में किटपुणे की कंपनीजापानी इंसेफेलाइटिसडॉ. हिमानी धांजे
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