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ये गड़े मुर्दे उखाड़ने वाले!

विदेशी आक्रमणकारियों ने जिन देशों को अपना नाम दिया या जिन शहरों पर मुसलमानों ने कब्जा जमाने के बाद उनका नाम बदल दिया था, उनके नाम बदल दिए गए। ये छोटे देश हैं, जो अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजो रहे हैं। एक भारत है, जहां बख्तियार खिलजी को एक समुदाय विशेष अपना नायक मानता है।

Written byमनोज श्रीवास्तवमनोज श्रीवास्तव
Apr 14, 2023, 09:57 am IST
in सोशल मीडिया

भारत से सीखो, कितने प्यार से बख्तियार खिलजी को रखता है। कोई कहेगा कि उसने तीन विश्वविद्यालय और पुस्तकालय जला दिए। इन्होंने कार्नवालिस के मकबरे को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक बना रखा है।

रोडेशिया ने 1980 में अपना नाम जिम्बाब्वे रख कर गड़े मुर्दे उखाड़े। अंग्रेजों ने अच्छा खासा नाम दिया था। इसे जाने कैसे सांस्कृतिक विरासत की रट लग गई? अपने विजेताओं के प्रति अकृतज्ञ सीलोन ने 1972 में श्रीलंका नाम रख लिया। जब 1948 में स्वतंत्र हो गए थे तो 1972 में गड़े मुर्दे क्यों उखाड़े? अंग्रेज अच्छा नाम जंजीबार दे गए थे, पर एहसान फरामोश लोगों ने तंजानिया नाम रख लिया। अब इन पर तंज न कसें तो क्या करें! ऐसे ही आंग्ल प्रतिभा ने बर्मा नाम रखा था, पर इन्होंने लंबा नाम म्यांमार रख लिया। 1948 में स्वतंत्र हुए और 1989 में नाम बदलने की सूझी।

अंग्रेजों ने गोल्ड कोस्ट (स्वर्णतट) जैसा सुंदर पोयटिक नाम रखा था। उसे घाना कर रहे हैं। इन्हें ‘वारियर किंग’ यानी योद्धा राजा अच्छा लगता है, हमारी (अंग्रेजों की) कविता से ज्यादा। क्या हुआ जो इन्हें भूखा-नंगा कर दिया, नाम तो स्वर्णतट रखा। अब ये रोजी-रोटी की चिंता करते नाम बदल कर क्या कर लेंगे? यह अन्याय सभी आक्रमणकारियों के साथ हो रहा है। 1975 में डच गिनी को सूरीनाम कर दिया। फ्रेंच शासकों ने कितना प्यारा नाम दिया था- अपर वोल्टा। आजादी के 24 वर्ष बाद इसने बर्कीना फासो नाम रख लिया। सोचिये कितना गलत काम करते हैं सही नाम रखने का दिखावा करने वाले।

भारत से सीखो, कितने प्यार से बख्तियार खिलजी को रखता है। कोई कहेगा कि उसने तीन विश्वविद्यालय और पुस्तकालय जला दिए। इन्होंने कार्नवालिस के मकबरे को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक बना रखा है। एक नामीबियाई हैं, जो 2013 में कर्ट वॉन फ्रेंकोइस जैसे जर्मन उपनिवेशवादी की मूर्ति राजधानी विंडोक के सार्वजनिक पार्क से हटा दिए! 2020 में मैक्सिको में क्रिस्टोफर कोलंबस, चिली के सेंटियागो में वाल्डीविया, पेरू में फ्रांसिस्को पिजारो, कोलंबिया के बागोटा में गोजांलो जिमेन्ज डे क्यूसाडा और इक्वाडोर के क्वीटो में सेबेस्टियन डी बेलालकाजार की मूर्ति जमींदोज कर दी गई। अनुदार लोग।

2020 में इंग्लैंड के ब्रिस्टल में एडवर्ड कॉल्सटन नामक दास-व्यापारी की मूर्ति तोड़ी गई और वहां की नगर परिषद ने उसके नाम पर बने हॉल का नाम परिवर्तित कर ब्रिस्टल बीकन रख दिया। इसी वर्ष, बेल्जियम के शहर एंटवर्प में लियोपोल्ड द्वितीय सुरंग का नाम बदल कर सिर्फ इसलिए कैनेडी सुरंग रखा गया कि 1963 में कैनेडी ने वहां भाषण दिया था, जबकि कांगो में नरसंहार सहित तमाम राक्षसी अत्याचार और भयावह लूट लियोपोल्ड ने अपने देश बेल्जियम के लिए ही तो की थी।

भारत से सीखो कैसे वारेन हेस्टिंग्स, बेंटिक, विलियम केवेन्डिश बेंटिंक, डलहौजी, मेयो, कर्जन, हार्डिंग, इर्विन, माउंटबेटन की मूर्तियों को संसद से शासकीय महत्व का स्मारक घोषित करवा कर प्रति वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर सुरक्षित रखा हुआ है, जबकि इसके ऐतिहासिक मंदिर धूल फांक रहे हैं। इन मूर्तिपूजकों को हम (अंग्रेज) असभ्य कहते जरूर रहे, लेकिन इन मूर्तियों के प्रति इनकी श्रद्धा देखकर हमारा मन भर आता है।

2020 में इंग्लैंड के ब्रिस्टल में एडवर्ड कॉल्सटन नामक दास-व्यापारी की मूर्ति तोड़ी गई और वहां की नगर परिषद ने उसके नाम पर बने हॉल का नाम परिवर्तित कर ब्रिस्टल बीकन रख दिया। इसी वर्ष, बेल्जियम के शहर एंटवर्प में लियोपोल्ड द्वितीय सुरंग का नाम बदल कर सिर्फ इसलिए कैनेडी सुरंग रखा गया कि 1963 में कैनेडी ने वहां भाषण दिया था, जबकि कांगो में नरसंहार सहित तमाम राक्षसी अत्याचार और भयावह लूट लियोपोल्ड ने अपने देश बेल्जियम के लिए ही तो की थी।

यूरोप में ही लीजिए। मुस्लिम कब्जे के दौरान टोलेडो शहर का नाम तूलेतुलाह किया गया था, उसे फिर से टोलेडो कर दिया गया। कोडुर्बा का नाम मुस्लिम कब्जे के दौरान कुतुर्बाह था, लेकिन ‘क्रूसेड’ में जीत के बाद उसे कोडुर्बा किया गया। सेविली शहर तब इशबिल्लाह था, पर इसे भी मूल नाम मिला। बलानसियह से वेलेन्शिया, घरनटाह से ग्रेनाडा, अल-उश्बुना से लिस्बन, अथीना से एथेंस हो गया।

थेसालोनिकी सेलानिक, कोरिन्थ गोर्थोयन, इस्कोडरा से वर्ना, सिसली का पालेर्मो बलार्म फिर से पालेर्मो, बुल्गारिया के सरेडेत्स ने फिर से अपना मूल नाम सोफिया पाया। उदाहरणों की कमी नहीं है। गड़े मुर्दे उखाड़ने का उद्योग। संकीर्णहृदय लोग। भारत के ‘बुद्धिजीवियों’ से सीखते कि हमलावरों की मधुर याद कैसे सुरक्षित रखी जाती है। बेवकूफ हैं, जो मुर्दा होने की जगह गड़े मुर्दे उखाड़ते हैं। हम भारतीय मुर्दों को डिस्टर्ब नहीं करते! क्या पता ‘द ममी रिटर्न्स’ जैसा हादसा हो जाए। बेहतर है खुद मुर्दा हो जाओ। खुद मुख्तारी की बहुत झंझटें हैं।

Topics: सिसली का पालेर्मो बलार्म फिर से पालेर्मोThessaloniki Selanikविलियम केवेन्डिश बेंटिंकबुल्गारिया के सरेडेत्सCorinth GorthoyanडलहौजीWarren HastingsEscodara to VarnaमेयोBentinckPalermo Balram of Sicily again Palermoकर्जनWilliam Cavendish BentinckSredets of Bulgariaहार्डिंगDalhousieद ममी रिटर्न्सइर्विनMayoमाउंटबेटन की मूर्तियांCurzonसांस्कृतिक विरासतथेसालोनिकी सेलानिकHardingeCultural Heritageकोरिन्थ गोर्थोयनIrwinवारेन हेस्टिंग्सइस्कोडरा से वर्नाMountbatten's sculpturesबेंटिक
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