गत 1 मई को दीनदयाल शोध संस्थान, चित्रकूट में प्रबुद्ध जन गोष्ठी आयोजित हुई। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य श्री भैयाजी जोशी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष की यात्रा और मूल उद्देश्यों और कार्यपद्धति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ का मूल ध्येय समाज में नैतिक मूल्यों का संवर्धन, राष्ट्रीय एकता का सुदृढ़ीकरण तथा आत्मनिर्भर और सशक्त भारत का निर्माण करना है।
उन्होंने भारत की वैश्विक भूमिका पर महर्षि अरविंद घोष, स्वामी विवेकानंद एवं वीर सावरकर के दृष्टिकोण का उल्लेख किया। उनके अनुसार इन महान विचारकों ने भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक समृद्धि और मानवता के कल्याण के सिद्धांत को विश्व के लिए मार्गदर्शक माना है।
उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के भाव में निहित है, जो विश्व को शांति, सह-अस्तित्व और समरसता का संदेश देता है। यदि भारतीय समाज अपने मूल्यों, परंपराओं और कर्तव्यबोध को आत्मसात कर ले, तो भारत पुनः विश्व मंच पर नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकता है।
श्री जोशी ने कहा कि हिंदू समाज की एकता, सजगता और सक्रियता ही राष्ट्र निर्माण का आधार है। विभिन्न सेवा, शिक्षा और सामाजिक समरसता के कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ये प्रयास समाज को संगठित और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
संगोष्ठी में उपस्थित प्रबुद्धजन ने भी अपने विचार साझा किए और भारत की सांस्कृतिक विरासत, योग, आयुर्वेद, आध्यात्मिक ज्ञान एवं पारिवारिक मूल्यों को विश्व के लिए उपयोगी बताते हुए भारत की विशिष्ट पहचान के रूप में प्रस्तुत किया। गोष्ठी का आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मझगवां खंड, सतना द्वारा किया गया था।
















