उत्तराखंड : क्या हिन्दू तीर्थ हरिद्वार को मुस्लिम आबादी ने घेर लिया है ?
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उत्तराखंड : क्या हिन्दू तीर्थ हरिद्वार को मुस्लिम आबादी ने घेर लिया है ?

हरिद्वार जिले में आठ लाख से ज्यादा हो गयी मुस्लिम आबादी, राजनीतिक सामाजिक क्षेत्र हुए प्रभावित।

Written byदिनेश मानसेरादिनेश मानसेरा
Mar 31, 2023, 03:13 pm IST
inभारत, उत्तराखंड

हरिद्वार ,हिंदुओं की धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है, गंगा किनारे ऋषि देव सन्यासियो मठो की इस पावन भूमि अब मुस्लिम आबादी ने घेर लिया है ऐसा माना जा रहा है कि गजवा ए हिंद के षड्यंत्र के तहत मुस्लिम आबादी गंगा किनारे अपनी अवैध बसावट कर रही है। मिली जानकारी के अनुसार सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हरिद्वार की मुस्लिम आबादी हर दस साल में 40 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है। ये आंकड़े चौकाने वाले है और पूरे जिले की डेमोग्राफी का स्वरूप बदल गया है।

हरिद्वार हिन्दू सनातन धर्म का सबसे बड़े धार्मिक केंद्र के रूप में जाना जाता है।हिंदू धर्म के सभी मठ,सभी अखाड़े, आध्यात्मिक केंद्र हरिद्वार में है जहां से सनातन धार्मिक गतिविधियों का संचालन होता आया है।पितृ अस्थियों के विसर्जन से लेकर जनेऊ संस्कार पावन गंगा नदी के किनारे होते है।कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धर्म मेला यही होता है और हर साल तीन करोड़ से ज्यादा  कांवड़ श्रद्धालु यहां से गंगा जल लेने आते है, हिन्दू धर्म की आस्था और विश्वास की इस नगरी के आसपास  मुस्लिम आबादी तेज़ी से बढ़ रही है।एक तरह से कहे कि पूरे हरिद्वार शहर को मुस्लिम आबादी ने घेर लिया है और अब अवैध रूप से गंगा किनारे वन विभाग और कैनाल की जमीन पर इनकी बसावट हो रही है।

क्या वजहें है कि हरिद्वार जिले में  2011 की जनसँख्या के मुताबिक मुस्लिम आबादी 2001 में 478000 (अनुमानित) से बढ़ कर  648119 हो गयी थी यानी जिले की आबादी पर 34.2 फीसदी का हिस्सा मुस्लिम आबादी का था। प्रदेश में मुस्लिम आबादी 11.19 प्रतिशत से बढ़ कर 13.9प्रतिशत हो गयी थी। 2020 के अनुमान के अनुसार हरिद्वार की मुस्लिम आबादी 39 प्रतिशत के आसपास हो गयी है। हरिद्वार की आबादी इस साल के अंत तक 22 लाख के करीब हो जाएगी जिसमें मुस्लिम आबादी आठ लाख से ज्यादा होने की बात कही जारही है जिसकी वजह से सामाजिक राजनीतिक परिवर्तन होने शुरू हो गए है।

आखिर क्यों और कैसे बढ़ रही आबादी ?

हरिद्वार जिले के साथ यूपी के बिजनोर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर जिला लगते है इन जिलों में मुस्लिम आबादी  बड़ी संख्या में है, उत्तराखंड बनते ही हरिद्वार जिले में उद्योगों का जाल बिछा जिसमे लेबर सप्लाई करने वाले ठेकेदारों ने काम की तलाश में आये यूपी के जिलो के मुस्लिमो की भर्ती बड़े पैमाने में कर दी।  तत्कालीन नारायण दत्त तिवारी सरकार ने यहां के उद्योगों में सत्तर फीसदी रोजगार स्थानीय लोगो को दिए जाने का फैसला कैबिनेट और विधान सभा में लिया था, उद्योगों के लेबर ठेकेदारों ने जोकि ज्यादातर मुस्लिम थे उन्होंने योजना बद्ध तरीके से अपनी मुस्लिम लेबर को स्थानीय निवासी बना दिया और सरकारी आदेशों की खाना पूर्ति कर दी।

इसके अलावा गंगा और उसकी सहायक नदियों में खनन के काम में पश्चिम यूपी ,बिहार, असम से आये  मुस्लिम मजदूर यहां आकर नदी किनारे अवैध रूप बसते चले गए जोकि अब यहां की वोटर लिस्ट में दर्ज हो गए, स्थानीय कांग्रेसी नेताओ विधायको ने इस काम को बखूबी अंजाम दिया ।

हरिद्वार में हरसाल करोड़ो लोग  कांवड़ लेने आते है कांवड़ की सामानों का उत्पादन में पहले पड़ोसी राज्य यूपी के जिलो का दबदबा था अब इन्हें बनाने वाले यहां शिफ्ट होंगये। हरिद्वार से लेकर देहरादून ऋषिकेश में पिछले बीस सालों में आबादी का विस्तार हुआ इमारते बनाने वाले मजदूर बढ़ई फिटर का धंधा करने वाले कुम्भ क्षेत्र के बाहर आकर बसने लगे।

हरिद्वार के ज्वालापुर क्षेत्र के बीजेपी विधायक रहे सुरेश राठौर ने अकटुबर 2019 में सार्वजनिक रूप से ये बयान दिया था कि हरिद्वार  गंगा किनारे 67 किमी तक मुस्लिम आबादी  बढ़ती जारही है जिसकी पड़ताल होनी चाहिए कि कौन लोग यहां आकर बस गए। वो बात अलग है कि शासन प्रशासन ने उनके बयान को कितनी गंभीरता से लिया?

पिछले  साल विश्व हिंदू परिषद ने भी उत्तराखंड सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया था, विहिप कहती है कि हरिद्वार को एक साजिश के तहत घेरा जारहा है,अवैध बस्तियों को क्यों पनपने दिया जारहा है?

बीजेपी को विधानसभा सीटों में मिली हार

पिछले साल विधान सभा चुनाव में बीजेपी के कट्टर हिंदू प्रत्याशी स्वामी यतिश्वेरा नंद जी चुनाव हार कैसे गए? हरिद्वार जिले में बीजेपी के प्रत्याशी सुरेश राठौर ज्वालापुर से, संजय गुप्ता लक्सर से कांग्रेस प्रत्याशियों से हार गए जबकि खानपुर में भी बीजेपी हार गई और यहां निर्दलीय उमेश कुमार चुनाव जीते और विश्लेषक यहीं मानते है कि बीजेपी यहां अंदरूनी कलह से नही बल्कि बढ़ती मुस्लिम वोटर संख्या से हारी। रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा अपना 2018 चुनाव बारह हजार से ज्यादा वोट से जीते थे जबकि 2023 में वो 2200 से ही जीते, ऐसे ही अन्य विधान सभा क्षेत्रों में बीजेपी लगातार पिछड़ रही है और इसकी वजह यही है कि यहां मुस्लिम आबादी उनके वोट निर्णायक हो गए है।

हरिद्वार में  मुस्लिम आबादी ज्यादातर शहर के बाहर गंगा किनारे, रेलवे की जमीन पर अवैध कब्ज़ों में बसी हुई है। कांग्रेस के शासन काल में इसमें भारी वृद्वि होती रही लेकिन बीजेपी की सरकार आने पर इसमें कोई कमी नही आई बल्कि इनके आने और बसने का सिलसिला जारी रहा,यहां तक कहा गया कि इनमें रुहेलाओं ने भी कब्ज़े जमाये हुए है।

कांग्रेस से जुड़े नेता इनका संरक्षण करते आये है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत हरिद्वार से सांसद का चुनाव लड़ते रहे है उनके दौर में अवैध बस्तियों को नियमित करने का खेल भी चला। कांग्रेस ने पंजाब और हरियाणा में अपने शासन में ऐसे जिले बनाये जो आज मुस्लिम बाहुल्य हो चुके है। वैसे ही हालात कुछ सालों बाद हिन्दू तीर्थ नगरी हरिद्वार जिले के भी हो जाएंगे और ये हालात चिंताजनक ही कहे जा सकते है।

हरिद्वार शहर के बाहर मस्जिद और मीनारें

हरिद्वार के कुंभ क्षेत्र से बाहर आते ही राष्ट्रीय राजमार्ग से दोनो तरफ  मस्जिदें ऊंची मीनारें दिखाई देने लगी है जबकि कुछ साल पहले ऐसा नहीं था, कुंभ क्षेत्र में बाजार हाट लगानेवाले मुस्लिम समुदाय के लोग कई बार खुले में नमाज पढ़ते दिखाए दिए जिनपर प्रशासन को कारवाई करनी पड़ी है। इन दिनों रमजान चल रहे है हरिद्वार प्रशासन ने मस्जिदों से लाउड स्पीकर उतरवाए और उनके प्रबंधकों को कोर्ट के आदेश याद करवाए कि लाउडस्पीकर प्रतिबंधित है।

Topics: हरिद्वार में मुस्लिम आबादीmuslim population in haridwarUttarakhand Newsउत्तराखंड समाचारहरिद्वार समाचारHaridwar Newsउत्तराखंड में मुस्लिम आबादीMuslim population in Uttarakhand
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