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देहरादून FRI रेंजर्स कॉलोनी की भूमि बना दी मजार, वक्फ में भी दर्ज किया पर दस्तावेज नहीं दिखा सके

देहरादून में फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट कॉलोनी की मजार सरकारी वन भूमि पर अवैध कब्जे की गई है। वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज लेकिन दस्तावेज नहीं मिल रहे। जिला प्रशासन ने नोटिस जारी करने की तैयारी कर ली है। उत्तराखंड सरकार अवैध मजारें हटाने की कार्रवाई तेज कर रही है।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by कुलदीप सिंह
Jun 4, 2026, 11:24 am IST
inउत्तराखंड

देहरादून: भारत सरकार द्वारा वक्फ संपत्तियों को दस्तावेज प्रमाण के साथ उम्मीद पोर्टल पर दर्ज करने की समय सीमा बढ़ाने के बावजूद सैकड़ों संपत्तियां ऐसी सामने आई है जो कि पोर्टल पर दर्ज नहीं की जा सकी है।

ऐसा इसलिए हुआ है कि इन संपत्तियों के जरूरी दस्तावेज नहीं मिल रहे। ये भी जानकारी मिली है जिन संपत्तियों को पूर्व में वक्फ में दर्ज कर दिया गया था, वो सरकारी भूमि पर अवैध रूप से कब्जे करके बनाई गई थीं। उल्लेखनीय है कि वक्फ संपत्ति वो ही कहलाई जाती है जो कि किसी व्यक्ति द्वारा दान में दी गई होती है और उसकी आय से गरीबों का भला किया जाता हो। देहरादून की फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट कॉलोनी कॉन्वेंट रोड की मजार भी ऐसी संपत्ति के रूप में सामने आई है जो कि वक्फ में यूके डीडी 0334 चढ़ा दी गई। जबकि वो वन विभाग की सरकारी भूमि पर है।

मजार प्रबंधक नहीं दिखा पा रहे दस्तावेज

अब जब भारत सरकार के उम्मीद पोर्टल पर दर्ज करने का विषय आया तो मजार प्रबंधकों के पास उसके कोई दस्तावेज नहीं मिल रहे, मिलेंगे भी तो कैसे? वो दान संपत्ति तो है नहीं और सैय्यद जमाल शाह जिनके नाम की ये मजार है वो इस जमीन के न तो कभी वारिस थे न ही उनके कोई परिजन इसके स्वामी थे। बताया जाता है कि सैय्यद जमाल शाह के नाम से अन्य स्थानों पर भी फ्रेंचाइजी मजारें बनी हुई है यानि ये स्पष्ट नहीं है कि उनकी असली मजार कौन सी है जहां उन्हें दफनाया गया हो।

पहले भी सवालों में रही है यह मजार

फॉरेस्ट रेंजर्स कॉलोनी की इस मजार को लेकर तमाम सवाल भी उठते रहे हैं कि यहां आने जाने के लिए फॉरेस्ट अनुसंधान केंद्र की कॉलोनी वालो ने ही कई चोर रास्ते खोल रखे हैं क्योंकि यहां गुरुवार को भीड़ आती है। बाहर कॉन्वेंट रोड पर चादर, गोली प्रसाद, अगरबत्ती का धंधा यहां के खादिम परिवार के लोग चलाते हैं। खादिम यहां ताबीज बनाने, झाड़ फूंक करने के बदले मोटी रकम वसूल कर अपना धंधा पानी चला रहे हैं।

खास बात ये भी है इस अंधविश्वास के शिकार हिंदू लोग ज्यादा है क्योंकि मुस्लिम किसी भी मजार पर सजदा करने नहीं जाते वो खुदा  के अलावा किसी के आगे नहीं सर नहीं झुकाते। बहरहाल ये मजार सरकारी भूमि पर है और इसके खादिमों के पास इसके भूमि संबंधी दस्तावेज नहीं हैं। जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन अब इस पर नोटिस देने की कारवाई करने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पुष्कर सिंह धामी सरकार ने सरकारी भूमि पर बनी अवैध मजारों को हटाने का काम तेज किया हुआ है अभी तक करीब 6 सौ अवैध मजारों को हटाया जा चुका है।

Topics: अवैध मजार देहरादूनदेहरादून मजारFRI कॉलोनी मजारफॉरेस्ट लैंड पर मजार
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