प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में पूर्वोत्तर भारत की विकास गाथा में एक नया अध्याय गढ़ रहा है। पीएम गति शक्ति और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री की विकास पहल जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं ने इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास को अभूतपूर्व गति प्रदान की है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में 2014 में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई सिर्फ 10905 किमी थी जो अब बढ़कर 16207 किमी से भी ज्यादा हो गई है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में 12 साल के मोदी सरकार के कार्यकाल में कुल 48 प्रतिशत राष्ट्रीय राजमार्गों की लम्बाई बढ़ाई गई हैं।
भारत के गौरव की साक्षी-सेला सुरंग
अरुणाचल प्रदेश की सामरिक और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण सेला सुरंग 13,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित दुनिया की सबसे लंबी दो लेन वाली सड़क सुरंग है। इसे सीमा सड़क संगठन द्वारा बनाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 मार्च, 2024 को इसका उद्घाटन किया था। ऐतिहासिक सेला सुरंग सभी मौसम में आवागमन का साधन प्रदान कर रही है। मिजोरम की राजधानी आइजोल अब भारतीय रेल नेटवर्क से जुड़ गई गया है। सितंबर 2025 में 51.38 किलोमीटर लंबी बैराबी-सैरांग रेल लाइन का उद्घाटन किया गया जो इंजीनियरिंग का एक चमत्कार है। इसमें 45 सुरंगे और कई ऊंचे पुल जिसमें एक पुल 104 मीटर ऊंचा पुल भी शामिल है। पहली बार पूर्वोत्तर राज्यों की राजधानियों को सीधे राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है।
विकास की गति सिर्फ सड़कों के माध्यम से नहीं बल्कि आसमान में भी उतनी ही दिखाई दे रही है। क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना उड़ान ने पूर्वोत्तर में पर्यटन और व्यापार को पूरी तस्वीर ही बदल दिया है। 2014 तक पूर्वोत्तर में केवल नौ कार्यशील हवाई अड्डे थे। आज इनकी संख्या बढ़कर लगभग दोगुनी 17 हो गई है। सिक्किम का पाक्योंग हवाई अड्डा और अरुणाचल प्रदेश का होलोंगी स्थित ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा जिसका आधिकारिक नाम डोनी पोलो एयरपोर्ट है, इस बदलाव के खास उदाहरण हैं। देश भर में 90 से ज़्यादा हवाई रूट अब दूर-दराज के इलाकों को सीधे बड़े शहरों से जोड़ रहे हैं। आधारभूत संरचना विस्तार के साथ-साथ, पूर्वोत्तर भारत भी देश का ग्रीन हब बन रहा है।
ऑर्गेनिक खेती की तरफ बढ़ रहे पूर्वोत्तर के राज्य
सिक्किम के 100% ऑर्गेनिक राज्य बनने में कामयाबी के बाद असम, नागालैंड और मणिपुर भी पूर्वोत्तर इलाके के लिए मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट के तहत बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं। पूर्वोत्तर इलाके के अदरक, हल्दी और कीवी जैसे रसायन मुक्त उत्पाद की अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में मांग बढ़ रही है। इससे स्थानीय किसानों की आय कई गुनी तक बढ़ रही है। पूर्वोत्तर में सिर्फ इतना ही बदलाव या विकास नहीं देखा जा रहा रहा है, बल्कि डिजिटल जुड़ाव के जरिए हज़ारों ग्राम पंचायतें अब हाई स्पीड इंटरनेट से जुड़ गई हैं।
पूर्वोत्तर में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश
पूर्वोत्तर में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश भी हो रहा है जो कांग्रेस सरकार के समय एक स्वप्न से ज्यादा कुछ भी नहीं था। असम में जागी रोड इलाके में 27,000 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा टाटा इलेक्ट्रॉनिक सेमीकंडक्टर प्लांट इस बात का सबूत है कि पूर्वोत्तर अब उन्नत विनिर्माण का भी एक बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।
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हिंसा में अभूतपूर्व कमी
पिछले 12 सालों में पूर्वोत्तर में हिंसा में काफी कमी आई है। 2014 से 2024 के बीच हिंसा की घटनाएं घटकर 3,428 हो गई हैं जो पहले की अपेक्षा लगभग 70% कम हैं। आम लोगों की मौत में 89% की कमी दर्ज़ की गई है। जबकि सुरक्षाकर्मियों के बलिदान में 70% की कमी आई है। मोदी सरकार के 2014 से 2026 तक के 12 सालों के कार्यकाल में पूर्वोत्तर में कई महत्वपूर्ण शांति समझौते किये और करवाए गए हैं। इन शांति समझौतों के तहत 10,500 से ज़्यादा उग्रवादी हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल हुए हैं। दशकों से पूर्वोत्तर उग्रवाद और अंदरूनी झगड़ों से पीड़ित रहा है।
2014 से सरकार की शुरू की गई शांति पहलों ने हालात में काफी बदलाव किया है। इसके कारण कई इलाकों से सशस्त्र बल विशेष शक्ति अधिनियम (आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पास एक्ट) वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार और पूर्वोत्तर की राज्य सरकारों ने कई उग्रवादी समूहों के साथ ऐतिहासिक शांति समझौते किए हैं। उग्रवादी संगठनों के साथ कुल 12 शांति समझौते किये गए हैं, जिससे कि 10,000 से ज़्यादा उग्रवादियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा का रास्ता अख्यितार किया है। बोडो कार्बी आंग्लोंग और ब्रूयांग समझौता इस कामयाबी की बड़ी मिसाल हैं।
पूर्वोत्तर का बदलता चेहरा यह साबित करता है कि सही नीति और पक्के इरादे से भौगोलिक चुनौतियों को भी विकास के नए स्वरूप में बदला जा सकता है। अष्ट लक्ष्मी का यह बदलाव नए भारत की काबिलियत और संभावना को दिखाता है। यह बदलती तस्वीर भारत के उस पूर्वोत्तर हिस्से की है जिसे कभी मुख्य भूमि से बहुत दूर माना जाता था।











