केरल की स्वास्थ्य व्यवस्था खासकर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तिरुवनंतपुरम स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से लापरवाही की हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। अस्पताल के वार्ड में भर्ती एक मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया है कि सर्जरी के बाद मरीज के घाव में कीड़े (मग्गेट्स) रेंगते हुए पाए गए।
इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
अस्पताल की इस लापरवाही का शिकार परिपल्ली के रहने वाले राजेंद्र प्रसाद हुए हैं। राजेंद्र प्रसाद को कुछ दिनों पहले एक रोड एक्सीडेंट के बाद तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था। इस हादसे में उनके पैरों में गंभीर चोटें आई थीं और कई जगह से हड्डियां टूट गई थीं।
अस्पताल के ऑर्थोपेडिक (हड्डी रोग) विभाग के डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को देखते हुए एक बड़ी सर्जरी की थी। इस ऑपरेशन के दौरान उनकी टूटी हुई हड्डी को जोड़ने के लिए पैर के भीतर एक मेटल रॉड (धातु की छड़ी) डाली गई थी। पैर को पूरी तरह से स्थिर रखने और घाव को ठीक करने के लिए बाहर से एक ‘एक्सटर्नल फिक्सेटर’ भी लगाया गया था। सर्जरी के बाद मरीज को पूरी तरह डॉक्टरों की निगरानी में रखने के लिए ICU में शिफ्ट कर दिया गया था।
परिवार ने लगाया लापरवाही का आरोप
पीड़ित परिवार की शिकायत के अनुसार, ऑपरेशन के बाद का शुरुआती समय आईसीयू में बिताने के बाद जब राजेंद्रप्रसाद की हालत में थोड़ा सुधार हुआ,तो डॉक्टरों ने उन्हें सामान्य वार्ड में भेज दिया। वार्ड में आने के कुछ ही समय बाद जब परिवार के सदस्यों ने मरीज के पैर की पट्टी और घाव को देखा, तो वे दंग रह गए। मरीज के गंभीर रूप से घायल पैर और सर्जिकल घाव के भीतर जिंदा कीड़े (मग्गेट्स) कुलबुला रहे थे।
परिवार का आरोप है कि उन्होंने तुरंत इस बेहद डरावनी स्थिति के बारे में वार्ड में तैनात नर्सिंग स्टाफ और ड्यूटी डॉक्टरों को सूचित किया। लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों ने उनकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और मरीज को समय पर अटेंड नहीं किया। जब परिजनों ने इस लापरवाही का कड़ा विरोध किया तो अस्पताल के कर्मचारियों ने कथित तौर पर उनके साथ दुर्व्यवहार और बदतमीजी भी की। विवाद बढ़ने और मामला मीडिया में आने के बाद आनन-फानन में मरीज को दोबारा वार्ड से निकालकर आईसीयू में भर्ती कराया गया।
अस्पताल वालों ने दिए अजीब तर्क
इस पूरे मामले में मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक सी. जी. जयचंद्रन ने बताया कि उन्हें इस संबंध में एक आधिकारिक रिपोर्ट मिली है और उन्होंने ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रमुख को तुरंत इसकी आंतरिक जांच करने को कहा है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने आईसीयू जैसे अत्यधिक सुरक्षित और रोगाणुमुक्त स्थान पर कीड़े मिलने के पीछे के कारणों पर एक अजीब तर्क दिया।
उन्होंने कहा, ‘भले ही आईसीयू एक पूरी तरह से स्टेरिल और सुरक्षित जगह होती है, लेकिन वहां लगातार लोगों (डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों) का आना-जाना लगा रहता है। इस दौरान कई बार मरीजों के लिए भोजन अंदर ले जाया जाता है। इसके अलावा, आईसीयू में कई ऐसे गंभीर मरीज भी भर्ती होते हैं जिन्हें नियमित रूप से डायपर बदलने की आवश्यकता होती है। ऐसी परिस्थितियों में कई बार मक्खियों के अंदर घुसने की गुंजाइश बन जाती है।’
स्वास्थ्य मंत्री ने दिए जांच के आदेश
केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों के स्वास्थ्य और सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने मामले की जांच के लिए तुरंत एक चार सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया। इस समिति में मेडिकल कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल, अस्पताल अधीक्षक, ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रमुख और जनरल सर्जरी विभाग के प्रमुख को शामिल किया गया है।
मंत्री ने इस समिति को निर्देश दिया है कि वे घटना के हर पहलू की बारीकी से जांच करें और जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपें। इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्री ने उन अस्पताल कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही है जिन्होंने पीड़ित परिवार के साथ दुर्व्यवहार किया था। उन्होंने कहा कि ऐसे असंवेदनशील कर्मचारियों को चिन्हित करके अनिवार्य रूप से काउंसलिंग के लिए भेजा जाएगा ताकि भविष्य में मरीजों के तीमारदारों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित किया जा सके।
















