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पानी के उपयोग से जुड़े नियामक बनाने होंगे

हमारी जल निर्भरता में जल निकाय जैसे तालाब, बावड़ियों, जोहड़ों, पोखर, छोटे नाले और झीलों की अहम भूमिका रही है

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jun 6, 2022, 08:30 pm IST
in भारत, साक्षात्कार
डॉ. हरवीन कौरवहनीयता एवं पर्यावरण प्रबंधन विशेषज्ञ

डॉ. हरवीन कौरवहनीयता एवं पर्यावरण प्रबंधन विशेषज्ञ

वहनीयता और पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. हरबीन कौर से बातचीत के प्रमुख अंश-

अमृत सरोवर योजना जल संकट के समाधान में कितनी कारगर होगी?

हमारी जल निर्भरता में जल निकाय जैसे तालाब, बावड़ियों, जोहड़ों, पोखर, छोटे नाले और झीलों की अहम भूमिका रही है। इनसे मिलकर एक पूरा वेटलैड्स (आद्रभूमि) बनता है। बरसात का पानी भरने के कारण यह धरती की आर्दता और जल संधारण क्षमता को बढ़ाते थे। इससे स्थानीय लोगों की पानी की जरूरत पूरी होती थी। लेकिन औद्योगिक विकास और फिर हरित क्रांति से कृषि क्षेत्र में आए बदलावों का सबसे अधिक नुकसान जल संस्कृति को पहुंचा। कुछ सालों पहले तक देश में कितने जल निकाय हैं, उनकी क्या स्थिति है, इससे जुड़ी कोई रिपोर्ट और अध्ययन तक सक्षम एजेंसियों के पास नहीं था। यह खुद संसदीय समिति का कहना है। तालाबों के संरक्षण का काम काफी समय पहले होना चाहिए था। अमृत सरोवर योजना की सबसे खास बात जनभागीदारी और इससे जुड़े आजीविका के स्रोत हैं। इससे पानी का पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग बढ़ेगा। हां, बेहतर होगा कि अमृत सरोवर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाए जाएं।

 जल के असीमित दोहन पर कैसे रोक लगाई जा सकती है?

हमें इस मानसिकता को बदलना होगा कि पानी हमें प्रकृति से मिला नि:शुल्क उपहार है। हमारे यहां ज्यादातर भू-जल का उपयोग कृषि कार्यों में होता है। इसी तरह कपड़ा उद्योग जल के दोहन के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। देश के तीन सौ जिलों में भू-जल स्तर 4 मीटर से नीचे जा चुका है। पानी के सीमित उपयोग के लिए कड़े नियामक (रेगुलेशन) का अभाव समस्या को बढ़ा रहा है। यदि हम आज कड़े निर्णय नहीं लेंगे तो संकट और गहरा होगा। पानी की पैमाइश करने के लिए खेतों से लेकर आवासीय और व्यावसायिक भवनों में मीटर लगाए जाएं। जल दक्षता के लिए सिंचाई के तरीके में बदलाव के साथ मोटे अनाज की ओर लौटना होगा।

 जल संरक्षण से जुड़े कौन से नवाचार अपनाए जा सकते हैं?

स्थानीय लोगों को जल प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाए। इस्राएल जैसे देश में 80 प्रतिशत घरेलू सीवेज जल का ट्रीटमेंट किया जाता है। इससे जल का पुन: कृषि और औद्योगिक गतिविधियों में उपयोग किया जा सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कौशल विकास और विषय के व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है। जल संरक्षण की नवीनतम तकनीक को पाठ्यक्रम के व्यावहारिक प्रशिक्षण में शामिल करने से इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाया जा सकेगा। वाटर फुटप्रिंट का निर्धारण अब समय की मांग है।

Topics: जल संरक्षणपानी के उपयोग
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