सोनभद्र जनपद के चोपन ब्लॉक के पडरक्ष गांव में तालाब सूख चुके थे। गांव का भूजल स्तर काफी नीचे चला गया था। तालाबों के सूख जाने से पशुओं के पीने के पानी की भी समस्या पैदा हो गई थी। गांव की महिलाओं ने सामूहिक रूप से तय किया कि इस स्थिति को सुधारने के लिए पहल करनी होगी। इसी दौरान सिविल सर्विसेज की कोचिंग में छात्रों को पढ़ाने वाले रवि मिश्र से वहां की कुछ महिलाओं की मुलाकात हुई। महिलाओं ने रवि मिश्र को अपने जीवन की कुछ कठिनाइयों से अवगत कराया। इस गांव की महिलाएं तालाब सूख जाने से परेशान थीं क्योंकि पशुओं और मवेशियों को पानी नहीं मिल पा रहा था। इसके साथ ही वहां की महिलाएं पुरुषों के नशा करने और जुआ खेलने से भी त्रस्त थीं।
महिलाओं ने रवि मिश्र से कहा कि अगर इस संबंध में कुछ मदद हो पाए तो जीवन की काफी तकलीफ कम हो जाएगी। रवि मिश्र के नेतृत्व में ग्रीन आर्मी नाम की संस्था का गठन किया गया। मिश्र के कुछ छात्र भी इस संगठन में सह संस्थापक बने। यह संगठन नशे और जुआ के खिलाफ था इसलिए अधिकतर पुरुषों ने इस संगठन से किनारा कर लिया। इसके बाद महिलाओं ने तालाबों को साफ करने का बीड़ा उठाया। सबसे पहले उन्होंने गांव के एक तालाब की सफाई शुरू की। यह तालाब पूरी तरह सूख चुका था और उसमें बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई थीं। करीब 100 महिलाओं ने कड़ी मेहनत करते हुए तालाब की झाड़ियों को साफ किया और तलहटी में जमी सिल्ट को बाहर निकाला।
तालाब में सिल्ट जमा हो जाने के कारण भूजल रिचार्ज नहीं हो पा रहा था। एक तालाब की सफाई के बाद महिलाओं का उत्साह बढ़ा और उन्होंने गांव के कुल चार तालाबों को साफ कर दिया। अब बारिश के मौसम में ये तालाब लबालब भर जाते हैं। गर्मियों में गांव के पशुओं को नहाने और पीने के लिए तालाब का पानी आसानी से उपलब्ध हो रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि करीब दस वर्ष पहले तक गर्मियों में भी तालाब का पानी नहीं सूखता था। लेकिन हाल के वर्षों में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया, जिसके कारण तेज गर्मी पड़ने पर तालाब सूखने लगे थे। अब तालाबों के पुनर्जीवन से आने वाले समय में भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि इन सभी तालाबों को पुनर्जीवित करने में कोई धनराशि खर्च नहीं हुई। गांव की महिलाओं ने श्रमदान के माध्यम से इन तालाबों को साफ और स्वच्छ बनाया। गांव की निवासी रिया देवी बताती हैं, “हम लोगों ने किसी से कोई आर्थिक मदद नहीं ली। अपने परिश्रम से चारों तालाबों को साफ किया। अब हमें ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ से जोड़ा गया है। इस योजना से जुड़ने के बाद हमें अपने श्रम के बदले पारिश्रमिक भी मिल रहा है।” यह भी उल्लेखनीय है कि गांव के कई पुरुष नशे की चपेट में आ चुके थे। महिलाओं ने तालाबों की सफाई के साथ-साथ नशा मुक्ति के लिए भी अभियान चलाया। गांव के आसपास बिकने वाली शराब को बंद कराने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। इसके साथ ही अन्य प्रकार की नशाखोरी पर भी प्रभावी रोक लगाने में सफलता मिली। अब पुरुष भी इस मुहिम से जुड़ रहे हैं। गांव की महिलाओं का यह प्रयास निश्चित रूप से समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।

















