"विज्ञान हमें ऊंचाई देता है और अध्यात्म हमें गहराई": विज्ञान भारती अधिवेशन में हुआ डॉ. कृष्ण गोपाल जी का संबोधन
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“विज्ञान हमें ऊंचाई देता है और अध्यात्म हमें गहराई”: विज्ञान भारती अधिवेशन में हुआ डॉ. कृष्ण गोपाल जी का संबोधन

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) में विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन के समापन पर RSS सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय पर विशेष व्याख्यान दिया। जानिए भारतीय वैज्ञानिकों के गौरवशाली इतिहास की पूरी रिपोर्ट।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jun 14, 2026, 04:40 pm IST
in भारत, उत्तर प्रदेश, विज्ञान और तकनीक
Vijnana Bharati National Session BHU Varanasi Dr Krishna Gopal Speech

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) में चल रहे विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे व अंतिम दिन रविवार को वैचारिक मंथन की धारा अविरल बहती रही। द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के माननीय सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल उपस्थित रहे।

उन्होंने सत्र में उपस्थित देश-विदेश के सैकड़ों वैज्ञानिकों और शोधार्थियों के समक्ष ‘भारत की विज्ञान परंपरा: पौराणिक से आधुनिक तक’ विषय पर अपना अत्यंत सारगर्भित और ज्ञानवर्धक पाथेय रखा।

“सांस्कृतिक इतिहास जितना ही प्राचीन है भारत का वैज्ञानिक इतिहास”

डॉ. कृष्ण गोपाल ने भारतीय सभ्यता की प्राचीनता और ज्ञान के अंतर्संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत का वैज्ञानिक इतिहास उतना ही प्राचीन है, जितना कि उसका सांस्कृतिक इतिहास रहा है। हमारी पारंपरिक ज्ञान व्यवस्था में विज्ञान और अध्यात्म को कभी अलग करके नहीं देखा गया, बल्कि ये दोनों हमेशा एक-दूसरे के पूरक रहे हैं।

उन्होंने मोक्ष और ज्ञान की नगरी काशी के महात्म्य पर बोलते हुए कहा कि विश्व की प्राचीनतम जीवित नगरी काशी है, जहां आज भी हजारों वर्षों पुरानी गौरवशाली सांस्कृतिक एवं ज्ञान परंपराएं जीवंत रूप में विद्यमान हैं।

“भारतीय चिंतन और संस्कृति में विज्ञान केवल बंद प्रयोगशालाओं (Labs) तक ही सीमित नहीं रहा है। हमारे यहाँ संगीत, नृत्य, व्याकरण, आयुर्वेद, गणित और दर्शन सहित समस्त ज्ञान-विधाएं विज्ञान के इसी व्यापक और सार्वभौमिक स्वरूप का अभिन्न हिस्सा रही हैं।”

भारतीय विज्ञान परिषद के 150 वर्ष: लोक मंगल और मानवता का कल्याण ही मूल उद्देश्य

सह-सरकार्यवाह जी ने स्पष्ट किया कि भारतीय ज्ञान पूरी तरह से सार्वभौम है और इसका अंतिम उद्देश्य केवल धनोपार्जन (पैसा कमाना) नहीं है। भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल ध्येय हमेशा से लोक मंगल, प्रकृति का संरक्षण और संपूर्ण मानवता का कल्याण रहा है।

उन्होंने इतिहास का स्मरण कराते हुए बताया कि डॉ. महेंद्र लाल सरकार द्वारा वर्ष 1876 में स्थापित ‘भारतीय विज्ञान परिषद’ (IACS) के अब 150 वर्ष पूरे होने वाले हैं। यह राष्ट्र की वैज्ञानिक चेतना की यात्रा का एक नया और भव्य स्वरूप है, जो हमारे धैर्य, निरंतर लगन और कर्मठता का जीवंत विषय है।

सीमित संसाधनों में विश्वस्तरीय कीर्तिमान रचने वाले भारतीय मनीषी

अपने संबोधन के दौरान डॉ. कृष्ण गोपाल ने देश के उन महान और शिखर वैज्ञानिकों के प्रेरक जीवन प्रसंगों का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिन्होंने वैश्विक पटल पर भारत का मस्तक ऊंचा किया। उन्होंने इन महान विभूतियों के नाम साझा किए-

• डॉ. महेंद्रलाल सरकार (वैज्ञानिक चेतना के अग्रदूत)• सतीश धवन (अंतरिक्ष कार्यक्रम के सारथी)
• जगदीश चंद्र बोस (पादप विज्ञान के जनक)• डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (मिसाइल मैन)
• सर सी.वी. रमन (नोबेल पुरस्कार विजेता)• जी.एन. रामचंद्रन (महान क्रिस्टलोग्राफर)
• शांति स्वरूप भटनागर (CSIR के संस्थापक)• अन्ना मणि (प्रख्यात मौसम विज्ञानी)
• विक्रम साराभाई (भारतीय अंतरिक्ष के पितामह)• आत्माराम एवं येल्लाप्रगडा सुब्बाराव

उन्होंने गर्वपूर्वक कहा कि हमारे इन सनातनी और आधुनिक भारतीय वैज्ञानिकों ने बेहद सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में भी देश के लिए विश्वस्तरीय वैज्ञानिक उपलब्धियां प्राप्त कीं। इन मनीषियों का जीवन केवल प्रयोगशालाओं में शोध और नए आविष्कारों तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण, उच्च नैतिकता, अद्भुत टीम भावना (Team Spirit) और निस्वार्थ समाज सेवा के उत्कृष्ट आदर्शों से भी ओत-प्रोत थे।

उन्होंने अंत में आह्वान किया कि यदि हम चाहते हैं कि विज्ञान वास्तव में मानवता के कल्याण का सच्चा साधन बने, तो उसे भारतीय ज्ञान, उच्च नैतिक मूल्यों और लोकहित की पवित्र भावना से जोड़ना ही होगा। विज्ञान जहाँ हमें भौतिक जीवन में अभूतपूर्व ‘ऊंचाई’ देता है, वहीं हमारा अध्यात्म हमें वैचारिक और चारित्रिक ‘गहराई’ प्रदान करता है। इन दोनों का समन्वय ही सुरक्षित और सुखी विश्व का एकमात्र मार्ग है।

Topics: सी वी रमन जगदीश चंद्र बोसPanchjanya newsडॉ कृष्ण गोपालकाशी हिन्दू विश्वविद्यालयRSS SamacharVijnana Bharati National Session BHUVaranasi News Breakingभारतीय विज्ञान परिषद 150 वर्षविज्ञान और अध्यात्म समन्वय
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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