आवरण कथा / उत्तर प्रदेश :100 दिन सरकार के
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आवरण कथा / उत्तर प्रदेश :100 दिन सरकार के

Written byArchiveArchive
Jun 26, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 26 Jun 2017 22:11:56

 

-: सुनील राय :-

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के साथ ही यह वादा किया गया था कि सरकार के सौ दिन पूरे  होने पर रिपोर्ट कार्ड पेश किया जाएगा। और सच में सौ दिन पूरे होने पर सरकार के कामकाज की समीक्षा शुरू हो गई है। 19 मार्च, 2017 को शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लगातार कई विभागों की समीक्षा की है और आमूलचूल परिवर्तन लाने के लिए निर्देश भी दिए। शिक्षा, स्वास्थ्य, औद्योगिक विकास, अर्थव्यवस्था, बिजली, कानून एवं व्यवस्था आदि के क्षेत्र में सरकार के फैसलों से परिवर्तन दिखने लगा है। यह बात जरूर है कि लोगों की उम्मीदें सरकार से बहुत ज्यादा हैं और प्रदेश की समस्याएं भी कम नहीं हैं। लेकिन इन सबके बीच योगी पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिनकी कार्यशैली की गूंज अमेरिका तक पहुंची और वहां से उनके बारे में  अध्ययन करने के लिए तीन अधिकारी लखनऊ पहुंचे हैं।  
 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संकल्प पत्र में किये वादों को निभाते हुए किसानों का कर्ज माफ कर दिया है। प्रदेश में चल रहे अवैध बूचड़खानों को तत्काल बंद कराया गया। बता देंे कि अवैध बूचड़खानों को बंद कराने के लिए पहले से ही निर्देश थे, मगर पूर्ववर्ती सपा सरकार के रहते उस आदेश का पालन नहीं कराया जा रहा था। भाजपा की सरकार बनते ही अवैध बूचड़खानों पर रोक लगा दी गई। सभी सरकारी कार्यालयों में पान और गुटखा खाने और दीवारें गंदी करने पर सख्ती के साथ रोक लगाई गई।  सरकार ने गन्ना किसानों के बकाये का तय समय के भीतर भुगतान कराया।

बिजली
आजादी के बाद अन्य प्रदेशों ने  बिजली के क्षेत्र में तो खूब तरक्की की, मगर उत्तर प्रदेश में बिजली  की कमी हमेशा एक राजनीतिक  मुद्दा ही बना रहा। चौबीस घंटे बिजली की आपूर्ति यहां की जनता के लिए स्वप्न की तरह थी। पिछली सपा सरकार ने कुछ  जगहों पर  चौबीस घंटे विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था तो की थी मगर सिर्फ मुख्यमंत्री के गृह जनपद और उसके आस-पास के जनपदों में ही। प्रदेश के अन्य जनपदों में बिजली की भीषण किल्लत व्याप्त थी।
योगी आदित्यनाथ ने शपथ लेने के कुछ ही दिन बाद यह फैसला लिया कि शहरों में चौबीस घंटे और देहातों में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति की जायेगी। सरकार के इस फैसले के बाद शहर की जनता को चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति कराई जा रही है। चौबीस घंटे बिजली देने के इस फैसले के बाद सरकार की राह में कुछ अड़चनें भी आई हैं। जैसे, प्रदेश में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी की जा रही थी, इसके लिए सरकार ने तुरंत प्रभावी कदम उठाए। जहां कहीं बिजली की चोरी पाई गई, वहां उसे मौके पर ही कनेक्शन देकर मीटर लगा दिया गया। अब तक इतिहास में पहली बार सबसे आसान 'वन टाइम सेटलमेंट' योजना लागू की गई। इस योजना के तहत जिन उपभोक्ताओं का लंबे समय से बिल बकाया है, उन्हें ब्याज में शत-प्रतिशत छूट दी गई।
अगले महीने से बिजली की चोरी रोकने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जाएगा। सभी उपभोक्ताओं के मीटरों को घर के अन्दर से निकाल कर बाहर दरवाजे पर लगाया जाएगा। सरकार आने वाले दिनों में 'प्री पेड मीटर' और 'स्मार्ट मीटर' लगाने पर विचार कर रही है। सभी सरकारी कार्यालयों में 'प्री पेड मीटर' लगाया जाएगा। दरअसल कितने ही सरकारी कार्यालयों और सरकारी आवासों पर बिजली का बिल बकाया है जिसे वसूला जाना अब टेढ़ी खीर बन चुका है। जो अधिकारी उन आवासों में बिजली का इस्तेमाल करके  जा चुके हैं। उनसे बिल वसूला जाना संभव नहीं हो पा रहा था इसलिए सरकार ने यह फैसला लिया कि अब सरकारी कार्यालयों और सरकारी बंगलों पर 'प्री पेड मीटर' लगाये जाएंगे ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की बकायादारी न रहे।
 उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने यह फैसला लिया है कि बिजली की चोरी को संज्ञेय  अपराध  माना जाएगा। यह भी देखने में आया कि पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को बिजली की चोरी की एफआईआर दर्ज कराने  के लिए थाने के कई बार चक्कर काटने पड़ते थे। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए हर जनपद में बिजली थाना खोला जाएगा। एक ही जनपद में कई साल से जमे पावर कॉर्पोरेशन के अभियंताओं की तबादला नीति बना दी गई है। अभी तक ऐसे ही लोगों की निष्क्रियता से बिजली की चोरी हो रही थी।

 स्वास्थ्य
 स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रदेश का हाल बद से बदतर हो चुका था। सरकारी डॉक्टर बेखौफ होकर  निजी क्लिनिक चला रहे थे। स्वास्थ्य  मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के सरकारी अस्पतालों में औचक निरीक्षण करने से डाक्टरों के बीच उक्त चलन में कमी आई है। स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद से सिद्धार्थनाथ सिंह का इस बात पर  लगातार ध्यान है कि सरकारी अस्पतालों में शाम के समय ओपीडी शुरू कराई जाए। बता दें कि सरकारी अस्पतालों में,  दिन में दो बजे के बाद ओपीडी बंद हो जाती है। उसके बाद मरीजों से कहा जाता है कि इमरजेंसी में जाकर दिखाओ। हास्यास्पद बात है कि अस्पतालों में इमरजेंसी में किसी एक डॉक्टर की ड्यूटी रहती है। आये दिन ऐसा होता आया है जब इमरजेंसी में दुर्घटना का कोई मरीज आया और उस दिन वहां हड्डी के डॉक्टर की बजाए आंख का डॉक्टर तैनात हो। इस संबंध में भी सरकार शीघ्र व्यवस्था करने जा रही है। हालांकिफिलहाल सरकारी डॉक्टरों की कमी है इसलिए निजी प्रेक्टिस कर रहे डॉक्टरों से इस सम्बन्ध में बातचीत चल रही है। सरकार चाहती है कि वे शाम के वक्त सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में बैठें। उम्मीद है, जल्दी ही सरकारी अस्पतालों में नजारा बदल जाएगा।
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में भी डॉक्टरों की कोई तबादला नीति नहीं बनाई गई थी। अब भाजपा सरकार आने के बाद सरकारी डॉक्टरों की तबादला नीति को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, खासतौर पर गोरखपुर में इन्सेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए सरकार प्रभावी कदम उठा रही है। इस बीमारी से गोरखपुर और आसपास के जनपदों में अनगिनत लोग मर चुके हैं। सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने  लगभग महामारी का रूप ले चुकी इस बीमारी पर नियंत्रण करने के लिए पर्याप्त कदम उठाये हैं। इसके अलावा इलाहाबाद आदि जनपदों में डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से निबटने के आदेश दिए गए  हैं, साथ में दवाओं का भण्डार भी जांचा गया है ताकि बीमारी का प्रकोप बढ़ने पर मरीजों को समय से दवा दी जा सके।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार ने लगभाग 1 करोड़ राज्य कर्मचारियों, पेंशनभोगियों तथा उनके परिवार के आश्रित सदस्यों को आकस्मिक एवं असाध्य रोगों के 'कैशलेस' इलाज के लिए 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मी कैशलेस चिकित्सा योजना' के अंतर्गत लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा है। इस योजना के संचालन हेतु ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। सरकारी कर्मचारी एवं पेंशनभोगी वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक एसजीपीजीआई, के.जी.एम.यू. एवं अन्य चिकित्सा संस्थानों को इस योजना से अनुबंधित करने की कार्रवाई भी त्वरित गति से की जा रही है।

लोक निर्माण विभाग
     सरकार की तरफ से बयान आया था कि 15 जून तक सभी सड़कों को गड्डा मुक्त कर दिया जाएगा। दरअसल इतने बड़े प्रदेश की सड़कों को गड्डा मुक्त करने के लिए तीन महीने का समय काफी कम था। सरकार के संकल्प के मुताबिक लोक निर्माण विभाग ने काफी तेजी से काम शुरू किया मगर प्रदेश की सभी सड़कों की मरम्मत के काम की टेंडर प्रक्रिया पूर्ण करने और फिर काम शुरू कराने में कुछ ज्यादा समय लग गया। जून के आखिर में मॉनसून आने के चलते यह कार्य और धीमा पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार पूरे प्रदेश  में सड़कों की लम्बाई लगभग 2,25,885 किलोमीटर है, जिनमें 7,147 किलोमीटर  राज्य मार्ग, 7,637 किलोमीटर- प्रमुख जिला मार्ग, 48,006 किलोमीटर अन्य जिला मार्ग तथा लगभग 1,63,035 किलोमीटर ग्रामीण मार्ग  हैं। इन सड़कों पर जहां-जहां भी गड्ढे चिन्हित किये गए थे, उन पर करीब  60 फीसदी कार्य पूरा कर लिया गया है और शेष पर कार्य चल रहा है।
इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने यह भी आदेश दिया है कि राज्य की कुछ सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग बनाये जाने के सम्बन्ध में  केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाए। उत्तर प्रदेश सरकार बुंदेलखंड को दिल्ली से जोड़ने के लिए छह लेन  की सड़क बनाने जा रही है। यही नहीं, सपा सरकार के समय बनाये गये लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे को कन्नौज जनपद के तिर्वा से होते हुए उरई जनपद ले जाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। जल्द ही उस पर निर्णय लिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने इसके अलावा इलाहाबाद से झांसी के बीच की सड़क का भी प्रस्ताव तैयार कराकर केंद्र सरकार को भेजने का आदेश दिया है।
2019 में लगने वाले अर्धकुम्भ को देखते हुए इलाहाबाद के बाहर एक रिंग रोड के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। 76 किलोमीटर लंबे इस आंतरिक रिंग रोड के निर्माण का कार्य 6 महीने के अन्दर शुरू कर दिया जाएगा। अर्ध कुम्भ को देखते हुए  गंगा पर छह लेन का पुल बनाने का फैसला लिया गया है। नए पुल पर काम जल्द शुरू होने की संभावना है। इस पुल के बन जाने से शहर के लोगों को एक बड़ी समस्या से निजात  मिलेगी। इस पुल के बारे में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री के बीच हुई बैठक में प्रस्ताव रखा गया था। जानकारी के अनुसार लोक निर्माण विभाग की ओर से प्रस्तावित इस पुल की लंबाई लगभग नौ किलोमीटर रखी गयी है, मगर नितिन गडकरी ने इसकी लंबाई को कुछ कम करने की सलाह दी है।
परिवहन
प्रदेश के परिवहन विभाग के मंत्री स्वतंत्र देव ने अभी तक इटावा, इलाहाबाद, बाराबंकी, लखनऊ समेत कई बस अड्डों का औचक  निरीक्षण किया है। उन्होंने वोल्वो आदि बसों में अन्दर जाकर यात्रियों से हाल-चाल पूछा। वोल्वो में दी जाने वाली पानी की बोतल की गुणवत्ता  जांची और गड़बड़ी पाए जाने पर दोषियों को फटकार भी लगाई। इस सरकार में सबसे ज्यादा औचक निरीक्षण स्वतंत्र देव ने ही किए हैं।
 परिवहन मंत्री का कहना है कि पहली बार परिवहन विभाग लाभ की स्थिति में पहुंच पाया है। पिछली सरकार में जहां परिवहन विभाग  करीब 9 करोड़ रु. प्रतिमाह के घाटे में था,  वहीं योगी सरकार में हर महीने 14 से 15 करोड़ रु. का लाभ हो रहा है। मथुरा डिपो, जो तीन करोड़ रु. के घाटे में चल रहा था, उसने अपना घाटा पूरा कर लिया है और अब लाभ की स्थिति में है। बुंदेलखंड, जो प्रदेश का बहुत ही पिछड़ा क्षेत्र है, वहां से एसी बसें सस्ते किराये पर चलाई गई हैं। इन बसों को जनरथ नाम दिया गया है। कर्वी और महोबा से लखनऊ के लिए, उरई से दिल्ली के लिए, बांदा से दिल्ली, हरिद्वार और वाराणसी के लिए अलग-अलग कम किराए वाली एसी जनरथ बसंे चलाई गई हैं। उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान के मध्य बस सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए  अंतरराज्यीय परिवहन समझौता किया गया है। इस समझौते के तहत 56,000 किलोमीटर तय करतीं 199 सड़कों को जोड़ा जाएगा। इस समझौते के बाद दिल्ली, जयपुर, अजमेर, हरिद्वार, मेरठ, बीकानेर, श्रीगंगानगर, जोधपुर, उदयपुर, संभल, सवाई माधोपुर आदि शहरों को आपस में जोड़ा जाएगा। अलवर के लिए सीधी बस सेवा शुरू की जाएगी। परिवहन मंत्री ने आदेश दिया है कि निरीक्षण में अयोग्य पाई गईं 700 बसों को हटाया जाएगा। बस चलाते समय अगर कोई चालक मोबाइल पर बात करते हुए पकड़ा जाएगा तो उस पर 5,000 रु. का जुर्माना लगाया जाएगा।

शिक्षा
योगी सरकार बनने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन लाने के प्रयास किये जा रहे हैं। माध्यमिक शिक्षा परिषद् के स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए स्कूल गणवेश और किताबें मुफ्त में मुहैया कराई जा रही हैं। बच्चों का पढ़ाई में मन लगा रहे और उनका सर्वांगीण विकास हो, इसके लिए शनिवार को 'नो बैग डे' घोषित किया गया है। इस दिन बच्चे बिना बस्ते के स्कूल आएंगे और खेल-कूद एवं अन्य गतिविधियों में भाग लेंगे। कुछ दिनों में ऐसे बच्चों के लिए सरकार अभियान चलाने वाली है जो स्कूल जाने के बजाय अन्य किसी काम में लगे हुए हैं। सरकार ने यह भी फैसला किया है कि अगले सत्र से माध्यमिक शिक्षा परिषद् के स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों को पाठ्यक्रम में शामिल कर दिया जाएगा।  
योगी सरकार की अभी तक की महज सौ दिन की अवधि में अनुसचित जाति के छात्रों को छात्रवृत्ति वितरण में 51 फीसदी का इजाफा हुआ है। इन छात्रों की संख्या 10,95,000 है। छात्रवृत्ति की धनराशि बढ़कर 1,555.65 करोड़ रुपए हो गई है, जो पिछले वर्ष से 235.71 करोड़ रुपए अधिक है। उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने घोषणा की है कि उत्तर प्रदेश के  कानपुर, मेरठ, फैजाबाद, बांदा एवं इलाहाबाद में कृषि विश्वविद्यालयों की स्थापना होगी। इन विश्वविद्यालयों के माध्यम से कृषि संबंधी विश्व स्तरीय अनुसंधान किए जायेंगे।
माध्यमिक शिक्षा परिषद् में माध्यमिक विद्यालयों की मान्यता में भ्रष्टाचार होने की शिकायतें सुनने को मिलती रही हैं, सो अब सरकार ने  माध्यमिक विद्यालयों की मान्यता को ऑनलाइन कर दिया है। परिषदीय और अनुदानित स्कूलों में पढ़ने वाले हर बच्चे के लिए आधार कार्ड आवश्यक कर दिया गया है। आधार कार्ड नहीं होने पर गणवेश, स्कूल बैग एवं मिडडे मील जैसी सुविधाओं से वंचित होना पड़ सकता है। कई वर्षों से मिडडे मील की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इससे निबटने के लिए प्रदेश सरकार ने नया तरीका निकाला है। स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की माताओं से संपर्क किया जा रहा है। 6 माताओं की टीम बनाई जायेगी। इनमें से हर मां एक दिन स्कूल के मिडडे मील को जांचेगी। सर्वोदय विद्यालयों की स्थापना की जाएगी, जहां बच्चों की शारीरिक शिक्षा पर विशेष बल दिया जाएगा। अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत कार्मिकों के पेंशन प्रावधानों में संशोधन का आदेश जारी कर दिया गया है। वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों के लिए नियमावली बनाई जा  रही है। तीन साल से अधिक वक्त से एक ही स्थान पर नौकरी कर रहे कर्मचारियों के भी तबादले पर विचार किया जा रहा है। प्राथमिक स्कूलों के बच्चे स्कूल परिधान में सुन्दर दिखें, इसके लिए स्कूल परिधानों में परिवर्तन किया गया है।

औद्योगिक विकास
उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीति का मसौदा तैयार कर लिया गया है और इसे जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की नई औद्योगिक नीति के मसौदे को कुछ संशोधनों के साथ अपनी सहमति दे दी है। मुख्यमंत्री के सुझावों को शामिल करने के बाद इस नीति  को अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने आईटी, और आईटी स्टार्ट-अप उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी,  नई और नवीकरणीय ऊर्जा, हथकरघा, वस्त्र एवं रेशम उद्योग, पर्यटन और फिल्म संबंधी उद्योगों के लिए विभागीय नीतियां जल्द ही तैयार करने के आदेश दिए हैं।
 नीति के मसौदे पर वेबसाइट पर ही संबंधित लोगों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी जाएंगी। इसके बाद ही नीति को अन्तिम रूप दिया जाएगा। फिर उसे मंजूरी के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि औद्योगिक नीति का उद्देश्य होगा प्रदेश में अधिक से अधिक उद्योगों की स्थापना, पूंजी निवेश,  रोजगार सृजन और संतुलित आर्थिक विकास को बढ़ावा। योगी आदित्यनाथ का प्रयास है कि प्रदेश में औद्योगिक विकास तेजी से बढे़ इसके लिए यहां पर बुनियादी  सुविधाएं उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है। प्रदेश में किसी तरह का उद्योग या कारखाना लगाने के लिए प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के दो क्षेत्र, पूर्वांचल और  बुंदेलखंड विकास की दृष्टि से काफी पिछड़े हुए हैं। इन क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहन दिया जाएगा। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं में आत्मनिर्भरता तथा उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल  दिया जाएगा।

कानून एवं व्यवस्था
प्रदेश में कानून एवं व्यवस्था को और अधिक चुस्त बनाये जाने की जरूरत है। प्रदेश में अभी भी जिलों में  तैनात अफसर मंत्रियों को आंकड़ों की बाजीगरी में उलझा रहे हैं। बुलंदशहर राजमार्ग पर लूट की घटना, सीतापुर जनपद में व्यापारी की हत्या आदि घटनाओं को लेकर अभी भी आक्रोश व्याप्त है। इलाहाबाद के थाना नवाबगंज क्षेत्र में एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या हुई। कानपुर जनपद में कुछ उपद्रवी लोगों ने दारोगा को सड़क पर दौड़ा कर पीटा। गौरतलब है कि इन सभी घटनाओं पर मुख्यमंत्री स्वयं रिपोर्ट तलब कर चुके हैं। इलाहाबाद की घटना पर मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बयान भी दिया कि जल्द ही इसका खुलासा किया जाएगा।
योगी सरकार ने फैसला लिया है कि अब  प्रदेश में जोन स्तर पर अपर पुलिस महानिदेशक  स्तर के अधिकारी तैनात किये जाएंगे। अधिकतर जगहों पर ऐसा हो भी गया है। पिछली सरकार के कार्यकाल में ही बंद खनन पर भाजपा सरकार बनने के बाद भी काफी समय लग गया। करीब 8 महीने से प्रदेश में वैध तरीके से बालू की निकासी बंद है। अब कुछ जनपदों में एकाध जगह पर बालू के पट्टे की अनुमति मिली है। डेढ़ से दो हजार में बिकने वाली बालू 7,000 में बिक रही है। निर्माण कार्य ठप होने से भट्ठे पर निकली हुई ईंटों का दाम 7 रुपए प्रति ईंट हो गया था, इस समय गिरकर 5 रुपए हो गया है।  बिजली विभाग के एक अभियंता ने बताया कि बालू ना मिल पाने से नए ट्रांसफार्मर के नीचे का आधार तैयार करने में दिक्कत आ रही है।
खनन नीति बन जाने के बाद पट्टा देने के काम में तेजी आनी चाहिए थी मगर अफसरों की मनमानी के चलते कहीं-कहीं पट्टे का काम  एकदम ठप पड़ा हुआ है। हमीरपुर जनपद में अभी तक बालू खनन बंद है। जानकारी के अनुसार, जिला प्रशासन अक्तूबर माह तक बालू का पट्टा नवीकृत नहीं करना चाहता। बरसात में वैसे भी बालू की निकासी रुक जाती है। ऐसे खनन वाले हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट, महोबा जैसे जिलों के जिलाधिकारियों ने खनन का  कार्य कुछ समय में नहीं शुरू कराया तो बरसात में बालू नहीं निकलेगी जिसकी वजह से विकास कार्य रुका रहेगा।
प्रदेश के प्रशासन की चूलें पहले से काफी कस चुकी हैं, लेकिन अभी भी चाल पूरी तरह पटरी पर आ गई है, ऐसा नहीं कहा जा सकता है। आज भी अधिकतर सरकारी महकमों के यूजर नंबर सुनने में कोताही के समाचार मिल रहे हैं। किसी अफसर का कोई कारिंदा फोन उठा भी लेता है तो यह कहकर फोन पटक देता है कि साहब व्यस्त हैं।
योगी सरकार ने सत्ता में आते ही जिस तेजी से काम शुरू किया था, उससे निस्संदेह जनता में एक भरोसा पैदा हुआ है। मुख्यमंत्री योगी को यह सुनिश्चित करना होगा कि काम की गति में कोई ढिलाई न आए और प्रदेश के लोगों को बुनियादी जरूरतों के साथ ही कानून-व्यवस्था का सख्ती से अनुपालन होता दिखे, भ्रष्टाचारियों, कालाबाजारियों पर लगाम कसे, सरकारी दफ्तरों में समय से और ईमानदारी से काम हो।
किसी सरकार के कामों का आकलन करने के लिहाज से 100 दिन कोई ज्यादा वक्त नहीं होता लेकिन यह अवधि एक झलक तो दे ही जाती है। उस लिहाज से योगी ने जनता का भरोसा जीता है लेकिन समय और वर्षों से भाई-भतीजावाद, तुष्टीकरण, जातिवाद के जंजालों से त्रस्त प्रदेश की मांग है कि योगी के नेतृत्व में भाजपा सरकार वातावरण में एक सतत सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में बढ़ती जाए। 

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