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दुस्साहस के पीछे कौन?

Written byArchiveArchive
Dec 12, 2016, 12:00 am IST
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दिंनाक: 12 Dec 2016 15:53:43

पाठकों के पत्र – 13 नवंबर, 2016  

आवरण कथा 'इस धमक के बाद' से यह बात तो स्पष्ट है कि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज आने वाला नहीं है। वह सीमा पार से घुसपैठ कराकर देश में अशंाति फैलाना चाहता है और उसकी यह मंशा लगभग जग जाहिर हो चुकी है। हालांकि भारतीय सेना आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब भी दे रही है लेकिन इसके बाद भी इनकी समझ में कुछ नहीं आ रहा है। लगता है ये कुछ ज्यादा क्षति चाहते हैं।
—अनूप खत्री, रोहतक (हरियाणा)

ङ्म    भारत द्वारा पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक करना एक अभूतपूर्व घटना थी। लेकिन इसके बाद भी आतंकियों के दिमाग ठिकाने नहीं आए। वह गलतफहमी में हैं कि भारत अब कुछ दिन विश्व दबाव में कुछ नहीं करेगा। लेकिन वह भूल में हैं। भारत आने वाले दिनों में समय देखकर इसका करारा उत्तर देगा। लेकिन इसी बहाने कम से कम पाकिस्तान की कायराना हरकत को पूरा विश्व जो देख रहा है। अब विश्व के अधिकतर देशों का पाकिस्तान के प्रति देखने का नजरिया बदला है।
—श्रीराम कनौजिया, देहरादून (उत्तराखंड)

ङ्म    मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना। इकबाल की ये पक्तियां काफी प्रचलित हैं। समय-समय लोग इसका उदाहरण भी देते नहीं थकते हैं। यह बिल्कुल सत्य है कि बैर की भावना अहंकार का परिणाम है, क्रोध की पराकाष्ठा तथा ईर्ष्या का लक्षण है। इसलिए बैर को सबसे बड़ा दुर्गुण कहा गया है। लेकिन हमारे पड़ोसी देश को यह बात समझ में ही नहीं आती। हर बार मंुह की खाता है लेकिन फिर भी लड़ने के लिए तैयार हो जाता है। असल में वह जानता है कि भारत को इस तरह से उकसाकर विश्व मे कुछ सहानुभूति पा लेगा और अमेरिका जैसे देश उसे भीख में हथियार और पैसा दे देंगे। लेकिन शायद अब यह उसका दिवास्वप्न ही है। विश्व के अधिकतर देश उसकी कारगुजारियों को अच्छी तरह से जान चुके हैं।
            —दिनेश मानसेरा, पौढ़ीगढ़वाल (उत्तराखंड)

ङ्म    कुछ लोग पाकिस्तान की ओर से की जा रही कार्रवाई को तूल देकर केन्द्र सरकार और सेना पर निशाना साधते हैं और इसकी आड़ में अनर्गल प्रलाप करते हैं।  लेकिन वे ऐसा करते समय भूल जाते हैं कि केन्द्र सरकार और सेना के पास एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है जिसका उन्हें पालन करना होता है। उसकी एक चूक से देश को कितनी हानि हो सकती है, इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता। ऐसे लोगों को ये भी पता होना चाहिए कि सेना को उनसे ज्यादा देश और देश के लोगों की चिंता है। और रही दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने की बात तो ये सर्जिकल स्ट्राइक करके हमारी सेना बता चुकी है और हर दिन देश की रक्षा करके अपने कौशल और साहस बताती है। इसलिए ऐसे लोग अर्नगल प्रलाप बंद करके समाज को भड़काना   बंद करें।
—रानू खन्ना, विकासपुरी (नई दिल्ली)

ङ्म    आज विश्व के किसी भी देश को यह बताने की जरूरत नहीं रह गई कि पाकिस्तान आतंकियों की पनाहगाह है। वहां की सरकार और सेना का इन आतंकियों को पूरा संरक्षण है। इनकी हर किस्म की जरूरतों को पूरा किया जाता है और फिर इन्हें भारत के खिलाफ  जिहाद की भट्टी में झोंक दिया जाता है। आखिर कब तक पाक के मुल्ला-मौलवी और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी अपने ही देश के मासूमों का जिहाद के नाम पर गला काटती रहेगी? क्या उसे अपने नागरिकों को अमन के रास्ते पर चलते देख अच्छा नहीं लगता? जिस ईश्वर की आड़ में वे लोगों को बहकाते हैं और खून-खराबे के उकसाते हैं, शायद कोई भी ईश्वर मारकाट को पसंद नहीं करता होगा। अपने लालच और लोभ के लिए जो लोग ऐसा कर रहे हैं, उन्हें ईश्वर जरूर सजा देगा।
—स्नेहा गौतम, सासाराम (बिहार)

ङ्म    एक तरफ सीमा पार से देश में अशांति फैलाने का कुचक्र जारी  है तो दूसरी ओर देश के अंदर बैठे जाकिर नाइक जैसे दुश्मन नित नए हथकंडों से देश को क्षति पहुंचाने की फिराक में ही रहते हैं। मुस्लिम देशों से नाईक कन्वर्जन कराने के लिए करोड़ों रुपये मंगाता था और देश में कन्वर्जन करता था। पहले की सरकारों का नाइक को पूरा समर्थन रहता था और पूरी तरह सरंक्षण भी उपलब्ध कराती थीं। नाइक जैसे लोग समाज के अंदर फैले जहर की तरह हैं। इसलिए राष्ट्र की सुरक्षा के लिए ऐसे लोगों पर नजर रखकर इन पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। आगे ऐसे लोग पनपने पाएं इसलिए समाज को जागरूक करने का काम भी समाज के लोगों को करते रहना चाहिए।
—शुभम वैष्णव, सवाई माधोपुर (राज.)

ज्ञान की बदौलत मिली समृद्धि
आवरण कथा 'ज्ञान और समृद्धि का अनूठा संयोग (30 अक्तूबर-6 नवंबर,2016)' अच्छी लगी। वास्तव में देश में बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने ज्ञान और लक्ष्मी का अनूठा संयोग स्थापित करके कुछ मिथकों को तोड़ा है। ये वे लोग हैं जिन्होंने ज्ञान की मेधा से सब कुछ हासिल किया है। इस विशेषांक में जितने भी व्यक्तियों की चर्चा हैं, उनमें से अधिकतर विशेष ही हैं। कुछ न कुछ उनके चरित्र में विशेषता है। उन्होंने कष्ट सहे पर अपने ध्येय से न डिगे। आज वे अपनी मंजिल को पा चुके हैं। समाज के लिए ऐसे लोग प्रेरित करने वाले होते हैं।
              —अंशुमान ठाकुर, अहमदनगर (महा.)

आखिर समान कानून क्यों नहीं?
'तीन तलाक, नाजायज सोच(23 अक्तूबर, 2016)' रपट एक समुदाय की कलुषित मानसिकता का परिचायक ही तो है। आज मुसलमानों में तीन तलाक की बहुत ही चर्चा है। मुल्ला-मौलवी इसे बने रहने देना चाहते हैं। वे तरह-तरह के झूठे कसीदे पढ़कर इस कलुषित रिवाज को ठीक बताने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। सवाल ये है कि मुसलमानों की बात हो या फिर ईसाइयों की,ये सभी लोग देश में ही रहते हैं और देश में संविधान के अनुसार सबको चलना है तो फिर ये अपने-अपने कानून क्यों चलाते हैं?   समान नागरिक कानून की बात आते ही इनके पेट में मरोड़ क्यों होने लगता है? भारत में सभी लोगों के लिए समान कानून होना चाहिए, यह समय की मांग है। और अगर ये समुदाय इसका विरोध करते हैं तो इनके ऊपर इसे थोपा जाना चाहिए, क्योंकि देश संविधान क अनुसार चलेगा, शरियत के अनुसार नहीं।
—सतीश कुमार मिश्र, शुक्लागंज (उ.प्र.)

 ङ्म तीन तलाक पर देश के प्रतिष्ठित मुल्ला-मौलवियों को आगे आकर इस गलत रिवाज को बंद करने का पूर्ण प्रयास करना चाहिए था। साथ ही जो बहके हुए मौलना है या जो इसका समर्थन करते नहीं थकते उन्हें इसके बारे में समझाना चाहिए था, लेकिन ऐसा अभी तक नहीं दिखा। शायद दबे स्वर इस रिवाज की आड़ में वे इसे सही ठहरा रहे हैं, नहीं तो बाहर आकर इसका विरोध करते और अपने समुदाय की महिलाओं को न्याय दिलाते। सदियों से मुस्लिम समाज में यह अत्याचार होता चला आ रहा है।
                           -कैलाश, सीधी(म.प्र.)

सपा सफाये की ओर

रपट 'यात्रा शुरू पर पहिए थमे(13 नवंबर,2016)' शीर्षक समाजवादी सरकार की साइकिल यात्रा पर बिल्कुल सटीक बैठता है। नोट बंदी के बाद मुलायम कुनबे में जो सामान्य रूप से सिरफुटौबल हो रहा था वह थम गया है। लेकिन अंदर खाने जंग वैसी ही जारी है। सपा प्रदेश में विकास के बुलबुले के दम पर जनता को दिग्भ्रमित करने की कोशिश में है लेकिन प्रदेश की जनता इनकी कारगुजारियों को अच्छी तरह से जान चुकी है और अब कोई मौका इन्हें नहीं देना चाहती।
 -हरिओम जोशी, भिण्ड (म.प्र.)

ङ्म    समाजवादी पार्टी में नोट बंदी के बाद तो एकदम से सन्नाटा छाया हुआ है। ऐसा लगता है कभी कुछ हुआ ही न हो। अब न तो चचा शिवपाल लड़ाई करते दिखाई दे रहे हैं और न अखिलेश। असल में इस सबके पीछे मोदी जी का तेज दिमाग है। उन्होंने अपने तेज दिमाग से परिवार की लड़ाई को हल कर दिया। मुलायम कुनबे को नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद करना चाहिए जो  महीनों से लड़ाई चली आ रही थी, उसे पल भर में शांत कर दिया। चुनाव तक बची लड़ाई को नरेंद्र बिल्कुल हल कर देंगे।              -सुशांत जैन, पटना (बिहार)

बंगलादेश बनता पाकिस्तान
रपट 'हिन्दुओं पर जिहादी हमले (13 नवंबर,2016)' से जाहिर है कि बंगलादेश में अब हिन्दू बिल्कुल सुरक्षित नहीं रह गया है। जिस तरह से आए दिन पाकिस्तान से हिन्दुओं पर अत्याचार की खबरें आती रहती हैं ठीक उसी तरह से बंगलादेश में भी। बंगलादेश की सरकार हिन्दुओं को सुरक्षा देने में पूरी तरह से नाकारा साबित हुई है। क्योंकि अगर उसने उन्मादियों पर कड़ी कार्रवाई की होती तो हिन्दुओं पर न तो हमले होते और न हीं उनकी हत्याएं होती। भारत सरकार को बंगलादेश की सरकार पर दबाव बनाकर हिन्दुओं की सुरक्षा का जिम्मा लेना चाहिए।
-प्रदीप सिंह, कोंडागांव (छत्तीसगढ़)

 पुरस्कृत पत्र
 हिन्दुओं पर बढ़ते हमले
वैर भाव चाहे घर-परिवार, पड़ोस, समाज, मत-पंथ, जाति या फिर राष्ट्र के बीच हो सदैव कष्टकारी ही होता है और नुकसान पहुंचाता है। पर इस सबके बाद भी कुछ लोगों को समझ में नहीं आता है और वे गलत रास्ते पर चलते रहते हैं। इससे वे खुद तो कष्ट पाते ही हैं साथ ही दूसरों को भी कष्ट भोगने पर मजबूर करते हैं। रपट 'हिन्दुओं पर जिहादी हमले (13 नवंबर,2016)' उस वेदना को जाहिर करती है जब दिपावली के दिन पड़ोसी देश बंगलादेश में हिन्दुओं के घरों को जलाया गया, हत्या की गईं, मंदिरों को तोड़ा गया। इतना करने के बाद भी जिहादी खुलेआम घूमते रहे और हसीना सरकार मुंह सिलकर सब तमाशा देखती रही। हाल के दिनों में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर यहां जिस तरह से हमले हुए वह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। इसी वर्ष जून महीने में भी चार हिन्दुओं को बेरहमी से मारा गया था। जिस तरह के वर्तमान में हालात बने हैं वह 1992 के हालात को ताजा कर रहे हैं। आज बंगलादेश में जिहादियों द्वारा षड्यंत्र रचा जा रहा है कि जैसे भी हो, हिन्दुओं को भागने पर मजबूर कर दो या फिर इनकी हत्या करके इनकी संपत्तियों पर राज करो। बस इसी कारण इस प्रकार के हमलों में तेजी आ रही है। सवाल है कि क्या कट्टरपंथी बंगलादेश को एक दूसरा पाकिस्तान बनाने पर तुले हैं? बंगलादेश को चाहिए कि वह अपनी छवि विश्व स्तर पर अच्छी तरह से बने रहना चाहता है तो अल्पसंख्यकों को पूरी सुरक्षा उपलब्ध करानी होगी। जिहादियों और कट्टरपंथियों पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी। नहीं तो पाकिस्तान जिस तरह से आज आतंकवादियों की शरणस्थली बना हुआ है, बंगलादेश भी कुुछ दिन बाद बन जाएगा। प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस आग को शांत करने के लिए ठोस रास्ता निकालना होगा।
                  -पंकज कुमार शुक्ल, खदरा, लखनऊ (उ.प्र.) 

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