राज्यों से
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शशि सिंह
उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) व उसकी मुख्यमंत्री सुश्री मायावती तथा विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के लिए राजनीति में शुचिता व नैतिकता का कभी कोवर्् महत्व नहीं रहा। सत्ता और सुविधा ही व्नका सब कुछ रहा है और है। व्न दोनों दलों और व्नके बड़े नेताओं के व्स शह और मात के खेल में अपराधियों की मौज है। अगले साल (सन् 2012) के अप्रैल माह में राज्य में विधानसभा चुनाव संभावित हैं। व्सलिए सत्ता और राजनीति को अपने, अपने परिवार और संबंधियों की तरक्की के लिए व्स्तेमाल करने वाले व्न नेताओं की राजनीतिक तिकड़मबाजी शुरू हो गवर्् है। व्स कारण अब तक करीब एक दर्जन विधायक पाला बदल चुके हैं। शुरुआत करते हैं विधायक गुड्डू पंडित से। भगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित सन् 2007 के विधानसभा चुनाव में बुलंदशहर की डिबावर्् सीट से बसपा के टिकट पर चुनकर आये। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह को हराया था। बसपा और मुख्यमंत्री मायावती के ये ऐसे खास थे कि आधा दर्जन आपराधिक मुकदमों के बावजूद उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा दी गवर्् है, जो सामान्यतया पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी जाती है। व्न पर सरकार की ऐसी कृपा बरसी कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में व्नका सिक्का चल निकला। खूब पैसा कमाया, साथ ही सत्ता के बल पर विरोधियों को जमीन दिखा दी। शिकायतें आवर््ं, पर अनसुनी कर दी गवर््ं। बताते हैं तब पूरा इहिसाब-किताब ऊपर तकइ पहुंचता था। लेकिन समीकरण गड़बड़ाए तो वही गुड्डू पंडित बसपा के लिए खलनायक बन गए। कुछ समय पहले ब्लाक प्रमुख के चुनाव में दबंगवर्् की, अपने पक्ष के एक प्रखण्ड विकास समिति के सदस्य (बीडीसी) को चुनाव जितवाने के लिए एक दर्जन सदस्यों का अपहरण करवा लिया तो बात मीडिया में भी आ गवर््। कल तक उनकी तीमारदारी में लगे प्रशासन ने इऊपरइ के व्शारे पर न केवल गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया वरन इगैंगेस्टरइ एकट भी लगा दिया। यहां तक कि उच्च न्यायालय में भी उनकी जमानत याचिका का विरोध किया, पर जमानत हो गवर्् तो उसके विरोध में सरकार उच्चतम न्यायालय में चली गवर्् और तर्क दिया कि गुड्डू पंडित बड़ा अपराधी है, छूट जाएगा तो सबूतों से छेड़छाड़ करेगा।
अब सपा की करनी देखिए। सपा ने उस समय गुड्डू को बड़ा अपराधी कहा था। यह भी कहा था कि पार्टी के सत्ता में आते ही गुड्डू की जगह जेल में होगी। हालात बदले, गुड्डू पंडित ने दल-बदल कर सपा का दामन थाम लिया है। अब यह सपा की नजर में इसत्ता से सताए हुएइ हैं और उन पर दर्ज मुकदमे झूठे हैं। सपा ने उन्हें डिबावर्् से विधानसभा का प्रत्याशी भी घोषित कर दिया है।
दूसरा मामला व्ससे भी अधिक संगीन है। फैजाबाद की मिल्कीपुर विधानसभा से चुने गए बसपा के बाहुबली विधायक आनंदसेन जेल में थे तभी उन्हें राज्य मंत्रिमण्डल में लेने की घोषणा कर दी गवर्् थी। वह शपथ ग्रहण में भी नहीं आ सके। जेल से छूटने के बाद उन्हें मंत्रिपद की शपथ दिलावर्् गवर््। आनंदसेन कवर्् बार सांसद रहे सपा के बाहुबली नेता मित्रसेन यादव के पुत्र हैं। अवध विश्वविद्यालय (फैजाबाद) की विधि संकाय की छात्रा शशि से प्रेम प्रसंगों में आनंद विवाद में आए, बाद में उसकी हत्या कर लाश गायब कर दी गवर््। बसपा ने चुप्पी साध ली, जबकि शशि के पिता बसपा के पुराने कार्यकर्ता थे। मीडिया में बात आवर्् और जब सिर के ऊपर से पानी जाने लगा तो पुलिस ने कार्रवावर्् शुरू की। आनंद का मंत्रिपद गया लेकिन पार्टी में बने रहे। अब भी जेल में हैं। चुनाव नजदीक आया तो मित्रसेन ने पाला बदल लिया और अब फिर सपा में आ गए हैं। सपा ने उनका ऐसा स्वागत किया जिसकी उनको भी उम्मीद न थी। उन्हें विधानसभा का टिकट भी दे दिया गया है, जबकि सच यह है कि शशि कांड में सपा ही मित्रसेन और आनंदसेन के खिलाफ मैदान में उतरी थी, व्यापक आंदोलन चलाया था। अब सपा ने सब कुछ भुला दिया। शशि हत्या मामले में आनंदसेन को अदालत से उƒाकैद की सजा हुवर्् तो उस पर प्रतिक्रिया देने से भी सपा बचती रही।
तीसरा मामला भी कम संगीन नहीं है। अशोक चंदेल की पहचान राज्य में सामूहिक हत्याकांड के लिए होती है। कुछ साल पहले हमीरपुर में एक शुक्ला परिवार के सात सदस्यों की सामूहिक हत्या कर दी गवर्् थी। मामला न्यायालय में लंबित है। तब से वे कवर्् बार विधायक और सांसद बन चुके हैं। कभी सपा से तो कभी बसपा से। पिछले लोकसभा चुनाव में सपा ने हमीरपुर से उन्हें टिकट दे दिया। तब बसपा ने नारा दिया था- चढ़ गुंडन की छाती पर, मुहर लगेगी हाथी पर। बहरहाल समीकरण ऐसे बने कि चंदेल चुनाव हार गए। अब वह सपा का दामन छोड़कर बसपा में आ गए हैं। अब वही चंदेल पार्टी के चहेते हो गए हैं। बसपा अपना पुराना नारा भूल गयी। साफ है कि दागियों के मामले में सपा-बसपा की यही नीति है कि बागी हुए तो दागी, साथी हुए तो माफी।











