चमोली: 12 साल के अंतराल के बाद ऐतिहासिक मां नंदा की बड़ी जात यात्रा आज सिद्धपीठ कुरुड़ से कैलाश के लिए रवाना हो गई। 12 साल बाद आयोजित हो रही इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। मां नंदा की डोली के रवाना होते ही पूरा कुरुड़ क्षेत्र जय मां नंदा के जयकारों और ढोल-नगाड़ों से गूंज उठा।
3 दिवसीय पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद मां नंदा की डोली को श्रद्धालुओं ने नम आंखों से कैलाश के लिए विदा किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मां नंदा की बड़ी जात यात्रा करीब 280 किलोमीटर की पैदल यात्रा है। कुरुड़ से रवाना होने के बाद मां नंदा की डोली विभिन्न गांवों और पड़ावों से होकर हिमालय की ओर बढ़ेगी।
यात्रा के दौरान ग्रामीण मां की डोली का पारंपरिक तरीके से स्वागत करेंगे और पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लेंगे। इस बार बड़ी जात यात्रा का विशेष महत्व है, क्योंकि डोली सामान्य लोकजात यात्रा के अंतिम पड़ाव वेदनी बुग्याल से आगे बढ़कर होमकुंड तक पहुंचेगी। कुरुड़ से रवाना हुई यात्रा के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। मां के जयकारों और ढोल-नगाड़ों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है। यात्रा का अंतिम पड़ाव होमकुंड होगा।
यहां मां नंदा की डोली के पहुंचने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे। इसके साथ ही बड़ी जात यात्रा का समापन होगा। 12 वर्ष बाद आयोजित हो रही इस बड़ी जात यात्रा में चमोली के अलावा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से भी श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। मां नंदा को अपने मायके से कैलाश स्थित ससुराल विदा करने की इस धार्मिक यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।











