| दिंनाक: 05 Apr 2008 00:00:00 |
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सूर्योपासना के साथ हुआ नववर्ष का स्वागतश्रीमहाकालेश्वर की नगरी उज्जयिनी न्याय, शौर्य एवं संस्कृति प्रेमी तथा संवत् प्रवर्तक सम्राट विक्रमादित्य की कर्मस्थली रही है। शकारि सम्राट विक्रमादित्य उज्जयिनी के शासकों में सर्वाधिक लोकप्रिय शासक रहे। सम्राट विक्रमादित्य द्वारा ई.पू. 57 में शक आक्रमणकारियों को खदेड़ कर बाहर करने के उपलक्ष्य में जो संवत् प्रवर्तित किया गया, वही आज विक्रमी संवत् कहलाता है। उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री मोहन यादव के प्रयास से उज्जैन विकास प्राधिकरण एवं म.प्र. संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में नव संवत्सर के अवसर पर लगातार चौथे वर्ष गत 2 से 7 अप्रैल तक विक्रमोत्सव, 2065 का भव्य आयोजन किया गया।2 अप्रैल को विक्रमोत्सव का विधिवत् शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं सांसद श्री विक्रम वर्मा। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के वाणिज्यिक कर एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री श्री बाबूलाल गौर ने की। कार्यक्रम में स्वामी श्री मोहनानन्द सरस्वती,3 अप्रैल को महानाट मंचन और 4 अप्रैल को महिलाओं द्वारा कलश यात्रा निकाली गई। 5 अप्रैल को पचांगकर्ता एवं ज्योतिर्विज्ञान सम्मेलन वयोवृद्ध ज्योतिर्विद पं.बाबूलाल जोशी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद श्री कैलाश जोशी मुख्य अतिथि थे।6 अप्रैल को महानाट सम्राट विक्रमादित्य का मंचन पूर्व उपप्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री सुरेश सोनी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि नववर्ष प्रतिपदा को उज्जयिनी में यशस्वी सम्राट विक्रमादित्य का राज्याभिषेक हुआ था, जिनका भारत एवं भारतीय संस्कृति के उत्थान में विशेष योगदान है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने घोषणा की कि कालजयी सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर शोध के उद्देश्य से उज्जैन में विक्रमादित्य शोध पीठ की स्थापना की जाएगी।7 अप्रैल को पं.आनंदशंकर व्यास के संयोजकत्व में शिप्रा नदी के तट पर स्थित रामघाट पर वर्ष प्रतिपदा आरंभ होने के उपलक्ष्य में सूर्य को अघ्र्य देकर सूर्योपासना की गयी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। दीपक नाईक14