अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मनमानियों का खामियाजा अमेरिका भुगत रहा है। ऐसा इसलिए कि कनाडा आज (मंगलवार) से सुबह से अमेरिका से आने वाले अरबों डॉलर के सामान पर जवाबी टैरिफ लगा रहा है। यह कदम दोनों देशों के बीच चल रहे व्यापार विवाद को और बढ़ा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच तनाव पिछले कुछ हफ्तों में काफी बढ़ गया है।
टैरिफ हुआ प्रभावी
ये जवाबी टैरिफ मंगलवार सुबह 12:01 बजे से लागू हो गए हैं। इनकी दर 15 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक है। ये उन अमेरिकी उत्पादों पर लगेंगे जिनकी कीमत करीब 27.6 अरब कनाडाई डॉलर है। प्रभावित सेक्टर में स्टील, डेयरी उत्पाद, घरेलू उपकरण, कृषि मशीनरी, लुगदी और कागज, और इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं। ये वही क्षेत्र हैं जो अमेरिकी टैरिफ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे।
कनाडा सरकार का कहना है कि ये कदम इसलिए उठाए गए हैं क्योंकि अमेरिका ने 22 अगस्त से कनाडा के 27.6 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था। जो अमेरिकी सामान टैरिफ लागू होने के दिन रास्ते में होंगे, उन पर ये जवाबी शुल्क नहीं लगेगा।
तनाव कैसे बढ़ा
पिछले कुछ हफ्तों में कनाडा और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पिछले हफ्ते ट्रंप प्रशासन से कहा कि वे अब गंभीरता से बात करें। ट्रंप और उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने कनाडा और उसकी अगुवाई की कई बार आलोचना की है। ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके ओंटारियो झील का नाम बदलकर “लेक अमेरिका” रखने की कोशिश की, जिसे कनाडाई लोगों ने खारिज कर दिया।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कार्नी का मजाक उड़ाया। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि कनाडाई प्रधानमंत्री सीना तानकर आते हैं और कहते हैं कि वे डोनाल्ड ट्रंप से भी ज्यादा सख्त साबित होंगे।
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ट्रंप का आरोप और कार्नी का रुख
पिछले महीने ट्रंप ने कनाडा से आने वाली कारों और कच्चे माल पर नया 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा सालों से अमेरिका को लूट रहा है। ट्रंप ने कहा, “हमें कनाडा की जरूरत नहीं, उन्हें हमारी जरूरत है।”
कार्नी ने दो टूक कहा है कि कनाडा ऐसा कोई व्यापार समझौता नहीं मानेगा जो फ्रेंच भाषा की सुरक्षा को कमजोर करे। उन्होंने बताया कि अमेरिकी वार्ताकार इसे एक “परेशानी” मानते हैं, जबकि क्यूबेक में ये अधिकार हैं। क्यूबेक लंबे समय से फ्रेंच भाषा और अपनी सांस्कृतिक पहचान बचाने के कानून रखता आया है। ये नियम दोनों देशों की व्यापार वार्ता में एक बड़ा मुद्दा बन गए हैं। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ये नियम अमेरिकी कंपनियों के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।













