Archive दरअसल भारत सरकार उभरती अर्थव्यवस्था का जो जुमला गढ़ रही है उसमें गरीब और गरीबी कालीन में पैबन्द की तरह नजर आते हैं, इसलिए संप्रग सरकार अपनी नाक बचाने के लिए आंकड़ों में गरीबी का खात्मा करने पर तुली है।