ईरान अमेरिका के साथ युद्ध में उलझा है, लेकिन फिर भी वह इस्लामिक कट्टरता को त्यागने का नाम नहीं ले रहा है। हिजाब के खिलाफ ही वहां प्रदर्शन हुआ था, लेकिन अब एक बार फिर से वहां की मुल्ला सरकार हिजाब की अनिवार्यता को लागू करने का संकेत दे दिया है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिनमें महिलाएं राहगीरों को उनके कपड़ों को लेकर चेतावनी देती दिख रही हैं। अभी यह साफ नहीं है कि यह कोई संगठित तरीके से हिजाब पेट्रोल की वापसी है या नहीं।
बाजार में सामने आया वीडियो
ईरान इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक वीडियो में दो महिलाएं तेहरान के ग्रैंड बाजार में लोगों से हिजाब को लेकर बात करते दिख रही हैं। खबर ऑनलाइन नाम की ईरानी वेबसाइट ने बताया कि यह फुटेज हाल ही का लगता है, हालांकि, सही तारीख की पुष्टि नहीं हुई है। महिलाओं के चेहरे साफ नहीं दिख रहे। एक महिला मास्क लगाए हुए है और दूसरी के पास रेडियो कम्युनिकेशन डिवाइस है, जो आम नागरिकों के पास आमतौर पर नहीं होता। खबर ऑनलाइन के अनुसार उनके कपड़ों में पुलिस यूनिफॉर्म जैसी चीजें भी नजर आ रही हैं, लेकिन पुलिस का बैज साफ नहीं दिखता। ईरानी पुलिस ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
तेहरान सिटी काउंसिल के चेयरमैन मेहदी चमरान ने कहा कि राजधानी में अगर कोई संगठित गतिविधि होती तो सामान्य तौर पर नगर प्रशासन से समन्वय होना चाहिए। उन्होंने बताया कि बाजार वाले इस खास मामले की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
खबर ऑनलाइन ने यह भी बताया कि नॉर्थईस्ट तेहरान के एक इलाके में रात के किसी जमावड़े के किनारे भी हाल के दिनों में हिजाब नियम लागू करने वाली महिलाएं दिखी हैं।
हिजाब को लेकर बढ़ती गतिविधियां
ये खबरें अनिवार्य हिजाब पर नए अभियान के व्यापक संकेतों के बीच आई हैं। हाल के हफ्तों में ईता और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर इस मुद्दे पर ऑनलाइन चर्चा बढ़ी है। क़ोम और माज़ंदरान के मियांकालेह इलाके में भी महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर जमावड़े हुए हैं।
संस्कृति मंत्री अब्बास सालेही की यज़्द यात्रा के दौरान कुछ लोगों ने हिजाब एंड चेस्टिटी लॉ लागू करने के नारे लगाए। तेहरान के ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में स्टूडेंट बसीज ने बिना हिजाब वाली छात्राओं की मौजूदगी का विरोध किया।
2022 के बाद का माहौल
2022 में महिला, जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन के बाद बड़े शहरों में बिना स्कार्फ के महिलाओं का सार्वजनिक जगहों पर दिखना आम हो गया था। अनिवार्य हिजाब कानूनी रूप से अभी भी लागू है, लेकिन अधिकारी 2022 से पहले वाली बड़े पैमाने की सड़क पेट्रोल पूरी तरह बहाल नहीं कर पाए हैं।
हार्डलाइनरों की नाराजगी
इस संयम से इस्लामी गणराज्य के वैचारिक समर्थक नाराज हैं। उनके लिए हिजाब लागू करना सिर्फ सामाजिक नीति नहीं, बल्कि इस्लामी राज्य की एक बुनियादी जिम्मेदारी है। संसद में भी दबाव बढ़ा है। अगस्त में मोहसेन रिजई के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सेक्रेटरी बनने के बाद हार्डलाइन सांसद मोहम्मद-तकी नकद-अली ने पूछा कि क्या काउंसिल हिजाब एंड चेस्टिटी लॉ को लागू होने से रोकना जारी रखेगी। यह सख्त कानून दिसंबर 2024 में लागू होना था, लेकिन अशांति की आशंका से उसे रोक दिया गया था। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने तब कहा था कि यह कानून महिलाओं के शरीर पर राज्य के नियंत्रण को और बढ़ाता है।
अधिकारियों ने व्यवसायों, विश्वविद्यालयों और व्यक्तियों पर दबाव बनाए रखा है, लेकिन पुराने मॉरेलिटी पुलिस मॉडल को देशभर में साफ तौर पर वापस नहीं लाया है। हाल की घटनाएं अभी यह सवाल छोड़ती हैं कि ये बिखरे हुए दबाव हैं या सड़क स्तर पर हिजाब लागू करने की व्यापक वापसी के शुरुआती संकेत।
















