सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इनमें एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी की याचिका भी शामिल थी। याचिकाकर्ताओं ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च को टालने की मांग की थी। उनका आरोप था कि यह मार्च 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन से पहले अशांति पैदा करने के मकसद से रखा गया है, ताकि विदेशी नेताओं की भागीदारी प्रभावित हो सके।
याचिका में क्या कहा गया
याचिका में बताया गया कि सीजेपी इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालने की योजना बना रही है। याचिकाकर्ताओं का सवाल था कि बिना अनुमति के ऐसा मार्च कैसे हो सकता है। एक याचिकाकर्ता की तरफ से वकील सैयद रिज़वान अहमद ने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन को देखते हुए अभी तक अनुमति के लिए कोई आवेदन नहीं दिया गया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण दिया जहां कई प्रदर्शनों के लिए अनुमति नहीं मिली थी और आयोजकों को हाईकोर्ट जाना पड़ा। उन्होंने पूछा कि सीजेपी, जो एक अपंजीकृत संस्था है, वही प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाती। उनका डर था कि कोई अनहोनी हुई तो अंतरराष्ट्रीय मीडिया इसे कवर करेगा और विदेशी नेता ब्रिक्स में आने से हिचक सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सीजेपी का कोई रजिस्टर्ड ऑफिस नहीं है, इसलिए नोटिस कैसे दिए जा सकते हैं।
कोर्ट की टिप्पणी
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया। बेंच ने कहा कि दो मुद्दे हैं—एक कानून-व्यवस्था का और दूसरा प्रदर्शन की अनुमति से जुड़ा नीतिगत मामला। कोर्ट ने कहा कि संबंधित पक्ष एक-दूसरे से बात करें। फिलहाल यह मानने का कोई ठोस कारण नहीं है कि कोई गलत काम होगा। सब जिम्मेदारी से और शांतिपूर्ण तरीके से काम करेंगे, ऐसी उम्मीद है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस और प्रशासन का काम है। बेंच ने साफ कहा कि अगर कोई अप्रिय घटना होती है तो याचिकाकर्ता फिर से आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते मामला अदालत के दायरे में आए।
जब वकील ने पूछा कि क्या सीजेपी कानून से ऊपर है, तो बेंच ने जवाब दिया कि ये बातें कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों के जिम्मे हैं। प्रदर्शनकारी और प्रशासन दोनों से कानून का सम्मान करने की उम्मीद की जाती है।
केंद्र को भेजा नोटिस
कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। याचिकाओं की कॉपी सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई-पावर्ड कमेटी और सॉलिसिटर जनरल के कार्यालय को भी भेजने को कहा गया। इन याचिकाओं की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। उसी दिन 20 जुलाई के संसद मार्च वाले मामलों की भी सुनवाई होगी, जिनमें हिंसा, घायल होने और संपत्ति के नुकसान के आरोप लगे थे।
याचिकाकर्ता ने 3 सितंबर को सुनवाई की मांग की थी, लेकिन बेंच ने कहा कि अनुमति न मिलने के मुद्दे पर केंद्र और दिल्ली पुलिस से संपर्क करें। कोर्ट के सामने कोई संगठित समूह मौजूद नहीं है जिससे बात की जा सके।














