देहरादून: उत्तराखंड में धामी सरकार ने उन सभी मदरसों पर ताला डालने के निर्देश जारी कर दिए हैं जो कि उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के अधीन चल रहे थे। अब राज्य में वही मदरसे चलेंगे जो अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण और उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त होंगे। धामी सरकार के ताजा निर्देशों से ढाई सौ से ज्यादा मदरसों पर सीलिंग के ताले लटक जाएंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्पष्ट कर चुके हैं कि देवभूमि में कट्टरवादी काबलियाई शिक्षा नहीं देने दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि रुद्रपुर नगर में जश्न ए मोहम्मदी जुलूस के दौरान त्रिशूल चौक पर मुफ्ती मौलवियों ने धामी सरकार को मदरसे बंद करने पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थी, जिसे वीडियो देश विदेश में वायरल हुए थे। बाद में पुलिस प्रशासन ने मुफ्ती को रामपुर से गिरफ्तार कर लिया था और अगले दिन बिगड़े बोल बोलने वाले मुफ्ती मुजीब के मदरसे पर जिला प्रशासन ने ताला डाल कर सील कर दिया।
बिना मान्यता के चल रहा था मदरसा
जिला प्रशासन ने बताया कि मदरसा बिना अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की मान्यता के चल रहा था और नए नियमों कानूनों का पालन नहीं कर रहा था। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में धामी सरकार ने मदरसा बोर्ड खत्म करके अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बना दिया है और मदरसों को प्राधिकरण और उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेना अनिवार्य है। धामी सरकार की इस सख्ती के खिलाफ मुस्लिम उलेमा मौलाना मुफ्ती लामबंद हो रहे हैं और बयान जारी कर रहे हैं।
अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डॉ पराग मधुकर धकाते ने बताया कि 452 मदरसे पूर्व में उत्तराखंड मदरसा बोर्ड में पंजीकृत थे, जिन्हें अब अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण में मान्यता लेनी है जो मान्यता नहीं लेंगे, वो बंद किए जायेंगे। उन्होंने बताया कि करीब दो सौ मदरसों के ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं। उनका स्पॉट सर्वे कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण के साथ-साथ उन्हें उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से भी अपने आप को संबद्ध करते हुए बच्चों को राष्ट्रीय शिक्षा पाठ्यक्रम पढ़ाना है।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रो. सुरजीत सिंह गांधी ने बताया कि उन्हीं मदरसों को मान्यता मिलेगी जो कि अपने दस्तावेज पूरा करके देंगे। जैसे भवन का स्वरूप क्या है, एक कमरे में कितने बच्चों के बैठने की जगह है, बिजली पानी शौचालय की क्या व्यवस्थाएं हैं, मदरसे के संचालक को अपने बैंक खाते की जानकारी भी साझा करनी पड़ेगी कि उन्हें कौन कौन मदद कर रहा है। श्री गांधी ने कहा धार्मिक शिक्षा कैसी दी जानी है उसका पाठ्यक्रम भी प्राधिकरण तय करेगा। अब प्राधिकरण में केवल इस्लामिक संस्थाएं ही नहीं होंगी बल्कि सिख, बौद्ध, ईसाई संस्थाएं भी शामिल होंगी।
देवभूमि में कबीलाई शिक्षा का कोई स्थान नहीं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी स्पष्ट कह चुके हैं कि देवभूमि में काबिलाई शिक्षा का कोई स्थान नहीं और न ही मुल्लावादी सोच यहां पनपने दी जाएगी। कट्टरपन फैलाने वाले मौलवी साहब को जेल भेज दिया है और कानून अपना काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार जो नियम कानून बनाती है उसका पालन हर हाल में कराया जायेगा।

















