सुप्रीम कोर्ट आज राजनीतिक दलों के नकद चंदे से जुड़े एक मामले पर सुनवाई करने वाला है। यह याचिका आयकर अधिनियम की उस व्यवस्था को चुनौती देती है, जिसके तहत पार्टियां दो हजार रुपये से कम का गुमनाम नकद चंदा ले सकती हैं।
मामला क्या है
खेम सिंह भाटी नाम के व्यक्ति ने यह याचिका दाखिल की है। इसमें आयकर अधिनियम 1961 की धारा 13ए के खंड (डी) को असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है। यह प्रावधान राजनीतिक दलों को दो हजार रुपये से कम के नकद चंदे को स्वीकार करने की छूट देता है। इसमें दान देने वाले की पहचान गुप्त रखी जा सकती है।
याचिका में कहा गया है कि पारदर्शिता की कमी से चुनाव प्रक्रिया की साफ-सफाई प्रभावित होती है। मतदाताओं को यह पता नहीं चल पाता कि पार्टियों को पैसा कहां से आ रहा है और दान देने वालों के क्या मकसद हो सकते हैं। इससे वे पूरी जानकारी के साथ वोट नहीं दे पाते।
कोर्ट में क्या हुआ था पहले
पिछले साल 24 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर नोटिस जारी किया था। केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और कुछ अन्य पक्षों से जवाब मांगा गया था। आज यह मामला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की बेंच के सामने आने वाला है।
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याचिका में और क्या मांगा गया
याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग को निर्देश देने की भी मांग की है। उन्होंने कहा है कि किसी भी राजनीतिक दल के पंजीकरण और चुनाव चिह्न आवंटन के लिए यह शर्त लगाई जाए कि पार्टी नकद में कोई रकम न ले। इसके अलावा उन्होंने मांग की है कि राजनीतिक दल हर दान देने वाले का नाम और पूरी जानकारी बताएं। नकद में कोई भी रकम न ली जाए, ताकि फंडिंग में पारदर्शिता बनी रहे।
याचिका में 2024 के उस फैसले का भी जिक्र है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया था। उस फैसले में भी पारदर्शिता पर जोर दिया गया था।
क्यों उठाया गया सवाल
याचिका में यह भी बताया गया है कि आजकल डिजिटल पेमेंट का चलन बहुत बढ़ गया है। ऐसे में नकद चंदे की यह व्यवस्था अब जरूरी नहीं लगती। इससे गुमनाम फंडिंग का रास्ता खुला रहता है। याचिकाकर्ता चाहते हैं कि चुनाव आयोग राजनीतिक दलों के फॉर्म 24ए योगदान रिपोर्ट्स की जांच करे। जहां दान देने वाले का पता या पैन न दिया गया हो, वहां कार्रवाई हो।यह पूरा मामला राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट आज इस पर सुनवाई करेगा और केंद्र व चुनाव आयोग के जवाब पर गौर करेगा।
















