अटल जी मधुमय राजनीति के शिखर थे। सबके प्रिय थे। संत कवि तुलसीदास ने श्रीराम के वर्णन में कहा है-‘बैरियु राम बड़ाई करहीं’। वह अटल जी के संदर्भ में सटीक प्रतीत होती है क्योंकि उनकी प्रशंसा विरोधी भी करते थे। व्यक्तित्व में गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम, सार्वजनिक जीवन के तीर्थराज और आधुनिक राजनैतिक कैलेंडर के ऋ तुराज और जनसंवाद के जादूगर थे। इसकी ही झलक उन पर आधारित वृत्तचित्र-‘अमिट अटल-द अन्फाॅर्गेटेबल अटल’ में भी दिखी।
इस वृत्तचित्र का निर्देशन मीडियाकर्मी अनुराग पुनेठा ने किया है। इसमें अभिनेता मनोज जोशी सूत्रधार के रूप में हैं। वहीं प्रसिद्ध उद्घोषक हरीश भीमाणी ने अपनी प्रभावकारी आवाज में संवादों को पिरोया है। अटल बिहारी वाजपेयी जी के स्वर में कविताएं गुंजायमान हैं। शीर्षक गीत ‘आवाज नहीं एक दौर थे’ बहुत ही सुरीला और कर्णप्रिय है। इस वृत्तचित्र में विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों के वक्तव्य शामिल किए गए हैं। ‘पाञ्चजन्य’ के संपादक और इस फिल्म के लेखक हितेश शंकर ने कहा कि आद्य संपादक और संस्थापक संपादक की बात आती है, तो अटल जी ने किन परिस्थितियों में काम किया?
अटल जी का नाम अमिट क्यों है, उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता कैसी है? वह विदेश नीति के जटिल मुद्दों को कैसे सुलझाते थे? इन विषयों को फिल्म में दर्शाने का प्रयास है। संघ के शताब्दी वर्ष में अपने पितृस्वरूप, शिखर पुरुष, उनके कृतित्व, उनके व्यक्तित्व, उनकी छाप को सामने रखने का एक छोटा-सा हमारा प्रयास है। संघ के विचार स्वरूप का साकार रूप वृत्तचित्र ‘अमिट अटल’ का निर्मिति है। यह फिल्म 52 मिनट की है। इस लोकार्पण समारोह में देश भर से आए विद्वतजन, शिक्षाविद अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

















