नई दिल्ली। ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में योगदान देने वाले वुम्मिडी एथिराज का बुधवार को चेन्नई में निधन हो गया है। 99 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका जन्म 25 नवंबर 1926 को हुआ था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि एथिराज को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भेंट किए गए ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में उनके योगदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक संदेश में कहा कि तमिलनाडु के प्रतिष्ठित परिवार से आने वाले एथिराज का जीवन और शिल्पकला भारत की गौरवशाली परंपराओं तथा देश की यात्रा के बीच एक उल्लेखनीय संबंध को दर्शाते हैं। उन्होंने एथिराज के परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
मोदी ने कहा कि वर्ष 2023 में नई संसद भवन में सेंगोल को प्रमुख स्थान देने के दौरान उन्हें एथिराज से मिलने और देश तथा संस्कृति के लिए उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर मिला था। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि एथिराज के निधन से उन्हें गहरा दुख हुआ है।
समृद्ध शिल्प परंपरा से जुड़े थे वुम्मिदी एथिराज
तमिलनाडु की समृद्ध शिल्प परंपरा से जुड़े वुम्मिदी एथिराज चेन्नई के प्रतिष्ठित वुम्मिदी बंगारू चेट्टी परिवार के सदस्य थे। इसी परिवार के शिल्पकारों ने ऐतिहासिक सेंगोल का निर्माण किया था। चांदी से निर्मित इस सेंगोल पर सोने की परत चढ़ाई गई है, जबकि इसके शीर्ष पर नंदी की आकृति सुशोभित है। भारतीय परंपरा में सेंगोल को राजसत्ता, न्याय और उत्तरदायित्व का प्रतीक माना जाता है।
















