नई दिल्ली: पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू कश्मीर (POJK) के पुंछ डिवीजन में फिर से बड़े आंदोलन की तैयारी है। जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC ने 24 अक्टूबर से यहां आंदोलन की तैयारी की है। पाक अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट पाबंदियों, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर तनाव बना हुआ है। इस बार कोटली को आंदोलन का मुख्य केंद्र बनाया गया है। यहां विशाल जनसभा बुलाई गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुजफ्फराबाद और मीरपुर में चक्का जाम की तैयारी है।
पुंछ और कोटली के कुछ हिस्सों में मोबाइल-इंटरनेट पर प्रतिबंध अब भी जारी है। इससे छात्रों, कारोबारियों और आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। आंदोलनकारियों ने नागरिक सुविधाओं की बहाली और सुरक्षा प्रतिबंध हटाने की मांग दोहराई है। हालांकि मुजफ्फराबाद में करीब 136 दिन बाद इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई।
आटे की किल्लत से उभरा आंदोलन राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग तक पहुंचा
बता दें कि पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू कश्मीर (POJK) में जेएएसी का आंदोलन महंगे बिजली बिल, आटा महंगा होने और आर्थिक राहत की मांगों से उभरा था। बाद में राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग भी बड़ा मुद्दा बना। पाकिस्तान में रहने वाले कश्मीरी शरणार्थियों के लिए विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करने की मांग विवाद के प्रमुख बिंदुओं में शामिल है। जेएएसी का कहना है कि इन सीटों की मौजूदा व्यवस्था क्षेत्र के स्थानीय मतदाताओं के प्रतिनिधित्व को प्रभावित करती है।
पाक सेना पर 150 आंदोलनकारियों की हत्या का आरोप
पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू कश्मीर (POJK) में जुलाई से लेकर सितंबर तक चले आंदोलन के दौरान पाक सेना की बर्बरता सामने आई थी। इस दौरान पाक सेना पर 150 आंदोलनकारियों की हत्या करने का आरोप लगा था। पाक सेना की बर्बरता की हद यही नहीं रुकी। पीओजेके में पाक सेना पर 200 महिलाओं के अपहरण का भी आरोप लगा था। इन महिलाओं का अभी तक पता नहीं चला है। पाक सेना ने आंदोलनकारियों पर बर्बर कार्रवाई की थी और इस आंदोलन को कुचलने का प्रयास किया था। पाक सेना ने इस आंदोलन को कुचलने के लिए रेंजर को मैदान में उतार दिया था और कई आंदोलनकारियों पर गोलीबारी भी की थी।
सड़कों पर लगे थे भारत के साथ विलय के पोस्टर
पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर की जनता पाक शासन से बेहद परेशान है। यहां महंगाई और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर पहले हुए प्रदर्शनों में सड़कों पर उतरे आंदोलनकारियों ने आजादी के नारे लगाए थे। इस दौरान ऐसे पोस्टर भी देखे गए थे जिनमें पाक अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर के भारत के साथ विलय की मांग की गई थी। मुजफ्फराबाद और रावलकोट में व्यापक विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के कारण कारोबार ठप हो गया था और जनजीवन प्रभावित हुआ था। यहां आंदोलन की शुरुआत 10 मई से हुई थी। जब जेएएसी ने यातायात ठप और बाजार बंद का आवाह्न किया था। इलाके के व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस समूह ने बढ़ती महंगाई के विरोध में और मंगला बांध से मिलने वाली बिजली को टैक्स-मुक्त करने की मांग को लेकर यह हड़ताल बुलाई थी। इसके अलावा वे गेहूं के आटे पर सब्सिडी देने और कुलीन वर्ग को मिल रही विशेष सुविधाओं को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। पाक सेना ने इस आंदोलन को कुचलने के लिए रेंजर्स को उतारा था।

















