नई दिल्ली: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में बाहरी अंतरिक्ष पर अपना पक्ष रखा है। भारत का स्पष्ट कहना है कि बाहरी अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ रोकी जाए। संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली समिति में बाहरी अंतरिक्ष पर भारत का पक्ष रखते हुए सांसद सुधा मूर्ति ने कहा कि भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक प्रमुख देश है। हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम के विकास और सुरक्षा, दोनों पहलू हैं। भारत का मानना है कि बाहरी अंतरिक्ष हम सभी का है। हम एक पृथ्वी, एक परिवार हैं और हमारा भविष्य भी एक है। हमारा मानना है कि बाहरी अंतरिक्ष को टकराव के बजाय सहयोग का क्षेत्र बने रहना चाहिए।
अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौता होना चाहिए
उन्होंने कहा कि दोहरे उपयोग वाली अंतरिक्ष तकनीकें और संपत्तियां अब एक वास्तविकता बन गई हैं। बाहरी अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ को रोकने के तरीकों को लेकर अभी भी अलग-अलग राय है। इस बात पर भी मतभेद है कि किस तरीके को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ को रोकने के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता करने की मांग की है। यह समझौता ऐसा होना चाहिए जिसे सभी स्वीकार करें, जिसकी पुष्टि की जा सके, और जिस पर ‘कॉन्फ्रेंस ऑन डिसआर्मामेंट’ (निरस्त्रीकरण सम्मेलन) में कई देशों के बीच बातचीत हुई हो।
भारत का एक राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन बनाने का इरादा
सांसद सुधा मूर्ति ने कहा कि भारत ऐसे नियमों का भी स्वागत करता है जो सभी के लिए समान हों, भेदभाव रहित हों और बाध्यकारी न हों। एक विकासशील देश होने के नाते, भारत का मानना है कि इस पूरी प्रक्रिया का नतीजा ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे शांतिपूर्ण और वैध उद्देश्यों के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी शोध के आदान-प्रदान में रुकावट आए। उन्होंने भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों और भविष्य के लक्ष्यों का भी जिक्र किया और कहा कि 2023 में भारत ने चंद्रमा पर अपना अंतरिक्ष यान उतारा था। देश अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, ‘गगनयान’ की तैयारी कर रहा है। भारत का एक राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन, ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ बनाने का भी इरादा है।

















