पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने के साथ ही आंतरिक और बहरी सुरक्षा मानकों पर कई बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सीमा सुरक्षा बल को लगभग 1,024 एकड़ जमीन सौंपी है। इससे सीमा सुरक्षा बल को अपने काम को अंजाम देने में काफी आसानी हो रही है। ममता बनर्जी की सरकार जानबूझकर सीमा सुरक्षा बल को जमीन नहीं दे रही थी। दूसरे शब्दों में ऐसा भी कहा जा सकता है कि ममता बनर्जी परोक्ष रूप से घुसपैठ को बढ़ावा दे रही थी। इससे पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के काम में तेजी आ रही है और घुसपैठ तथा तस्करी जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिल रही है।
पश्चिम बंगाल में जीरो-लाइन गांव को अन्यत्र बसाने की योजना
पश्चिम बंगाल में लगभग 360 जीरो-लाइन गांव हैं, जिनकी कुल आबादी करीब 70,000 है। ये अधिकांशतः मालदा, मुर्शिदाबाद और कूचबिहार जिलों में हैं। इन इलाकों में गश्ती करना बहुत ही दुष्कर होता है। इन इलाकों के चलते सीमा सुरक्षा बल को घुसपैठ रोकने में कठिनाई होती है इसलिए इन्हें दूसरी जगह बसाने (पुनर्वास) या उचित नीति बनाने पर विचार किया जा रहा है। जीरो-लाइन गांव अंतरराष्ट्रीय सीमा (शून्य बिंदु) के बिल्कुल करीब बसे होते हैं।
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इनमें से कई बस्तियां बाड़ के उस पार है या उनकी मौजूदगी के कारण सुरक्षा बाड़ लगाना मुश्किल हो जाता है। मालदा, मुर्शिदाबाद और कूच बिहार में जनसांख्यिकी परिवर्तन भी जनता का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट कर रहा है। कूचबिहार जिले में एकाएक जनसांख्यिकी परिवर्तन और एक ख़ास समुदाय के लोगों की संख्या में वृद्धि एक विचारणीय और अहम सवाल बन गया है।













