केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित जनसांख्यिकीय बदलावों पर उच्च-स्तरीय समिति ने 14 अक्टूबर 2026 को देश में अवैध प्रवासन और असामान्य जनसंख्या परिवर्तनों पर वैज्ञानिक डेटा तथा जनता की राय जुटाने के लिए एक समर्पित डिजिटल वेब पोर्टल (https://demography.mha.gov.in) का शुरुआत किया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की इस पहल का मुख्य उद्देश्य 2011 के बाद से देश के विभिन्न हिस्सों में हुए अप्राकृतिक जनसांख्यिकीय बदलावों, अवैध प्रवासन और असामान्य बसावटों का रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों का वैज्ञानिक रूप से मूल्यांकन करना है।
जनसांख्यिकी बदलाव का बढ़ता दायरा
भौगोलिक और जनसांख्यिकीय बदलावों का असर अब केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और शहरी केंद्रों को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। बदलाव बॉर्डर वाले जिलों से शुरू होकर अब शहरों, औद्योगिक गलियारों, आदिवासी क्षेत्रों और संवेदनशील इलाकों तक पहुँच गए हैं। इसके कारण सरकारी सेवाओं की उपलब्धता, स्थानीय शासन, संसाधनों के बंटवारे और आपसी सामाजिक भाईचारे पर गहरा नकारात्मक असर पड़ा है।
सुझाव की मांग
केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों, विभिन्न संस्थानों और आम नागरिकों से इस संबंध में आकड़ा और अन्य जानकरियों की मांग साझा करने को कहा है। केंद्र सरकार का लक्ष्य इस बड़े और पुरे देश में हुए बदलावो में आम जनता को भी शामिल किया जाए, जिससे कि इसे ज्यादा पारदर्शिता और लोगों की सहभागिता से किया का सके।
जांच का मुख्य विषय
यह समिति मुख्य रूप से अवैध प्रवास, जन्म दर में असमानता, सीमा पार से होने वाली गतिविधियों, असामान्य बसावट पैटर्न और धार्मिक व सामाजिक समुदायों के बीच जनसंख्या संरचना में हो रहे बदलावों का अध्ययन कर रही है।
राज्यों से मांगी गई विस्तृत जानकारी
गृह मंत्रालय की ओर से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक विस्तृत प्रश्नावली भेजी गई है। इसके तहत सीमावर्ती और जनजातीय क्षेत्रों में पिछले 15 वर्षों में बने धार्मिक व निजी शैक्षणिक संस्थानों, वाणिज्यिक वाहन के लाइसेंस में आई अचानक तेजी और संपत्तियों के अवैध हस्तांतरण और अतिक्रमण जैसे गंभीर विषयों पर प्रशासन से आंकड़ा मांगा गया है।
समिति का अंतिम लक्ष्य
इस पोर्टल के जरिए मिलने वाले फीडबैक और डेटा के आधार पर समिति एक स्थायी नीतिगत ढांचा तैयार करेगी। इसके जरिए सीमा प्रबंधन को मजबूत करने, जनसंख्या स्थिरीकरण और अवैध प्रवासियों की पहचान, हिरासत और कानून सम्मत निर्वासन के लिए एक पारदर्शी व समयबद्ध संस्थागत तंत्र की सिफारिश सरकार से की जाएगी।
जनसांख्यिकी में बड़ा बदलाव में कांग्रेस और सहयागियों की भूमिका
केंद में 2004 से 2014 के बीच 10 सालों तक कांग्रेस पार्टी नीत यूनाइटेड प्रोग्रेसिव गठबंधन सरकार में बड़े पैमाने पर देश में अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को जानबूझकर राजनीतिक लाभ के लिए अलग-अलग हिस्सों में बसाया गया था। इसका लम्बा और बड़ा असर देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा से जुड़ा है। रेलवे लाइनों के बगल में अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को बसाया गया जिससे कि आमजन और प्रशाशन की नज़र उन पर नहीं।
उस समयकाल में असम में कांग्रेस और पश्चिम बंगाल में वाम दलों और ममता बनर्जी की सरकार थी जो अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को बसाने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
भाजपा सरकारों द्वारा कड़ी कार्रवाई
वर्तमान में पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा सहित अन्य सीमावर्ती प्रदेशों में भाजपा और उसके सहयागियों की सरकार बनने के कारण अब इनपर कड़ी कार्रवाई हो रही हैं। बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं वापस लौटने लगे हैं और उन्होंने लौटते समय स्वीकार किया है कि चार बार देश में मतदान भी किया है। हाल के दिनों में जम्मू कश्मीर से भी बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं वापस लौटे हैं। गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तराखंड सहित अन्य प्रदेशों से भी इनके निकाले जाने और वापस बांग्लादेश लौटने की सूचना है।
बांग्लादेश की स्वीकारोक्ति
बांग्लादेश की नेशनल सिटीजन पार्टी के सांसद सचिव अख्तर हुसैन ने ढाका में संसद सत्र के दौरान कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में भाजपा सत्ता में आती है, तो वह घुसपैठ रोकने और नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन्स और नागरिक संशोधन अधिनियम को मजबूती से लागू करेगी, जिससे कि बांग्लादेशी नागरिकों की बड़े पैमाने पर वतन वापसी होगी।

















