श्रीलंकाई हिंदू युवक सिवरासा अनोजन को सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में मौत की सजा सुनाए जाने को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध और चिंता जताई गई। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 7 अक्तूबर, 2026 की अपनी रिपोर्ट में इस मामले को उठाते हुए सऊदी अरब सरकार से उनकी सजा रद्द करने और उन्हें तत्काल, बिना शर्त रिहा करने की मांग की थी। हालांकि, 14 अक्तूबर को सामने आई एक खबर के अनुसार, सऊदी अरब की सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मौत की सजा रद्द कर दी है। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सजा रद्द होने का अर्थ उनकी रिहाई नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, 24 वर्षीय अनोजन को 1 जुलाई, 2026 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर फेसबुक पर पैगंबर मोहम्मद के बारे में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप था। बताया गया है कि उन्होंने कुछ ही मिनटों में टिप्पणी हटा दी थी और वीडियो जारी कर माफी भी मांगी थी। इसके बावजूद 27 जुलाई को निचली अदालत ने उन्हें पांच साल की कैद और 30 लाख सऊदी रियाल के जुर्माने की सजा सुनाई। इसके बाद अभियोजन पक्ष की अपील पर 17 सितंबर को अपीलीय अदालत ने सजा को मृत्युदंड में बदल दिया। एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, गिरफ्तारी से लेकर पहली सजा सुनाए जाने तक अनोजन को वकील की सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई थी।
विवाद से शुरू हुआ मामला
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जून 2026 में श्रीलंका में हिंदू तीर्थयात्रियों के साथ चल रहे एक कुत्ते को एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा लात मारने का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था। इसके बाद में सोशल मीडिया में हिंदू और मुसलमानों के बीच बहस शुरू हो गई। बताया जाता है कि भगवान शिव के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणी किए जाने के बाद अनोजन ने पैगंबर मोहम्मद के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उनके परिवार का कहना है कि उन्होंने टिप्पणी शीघ्र हटा दी और माफी भी मांगी। अनोजन रोजगार के लिए सऊदी अरब गए थे। उनकी टिप्पणी का स्क्रीनशॉट उनके नियोक्ता तक पहुंचने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मजहबी भावनाओं के सम्मान, निष्पक्ष सुनवाई और मृत्युदंड के इस्तेमाल से जुड़े गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मजहबी आस्थाओं का सम्मान प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है, लेकिन किसी कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए मृत्युदंड जैसी कठोर सजा की आवश्यकता और औचित्य पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। विवादों का समाधान संवाद, निष्पक्ष जांच और कानूनसम्मत कार्रवाई के माध्यम से किया जाना चाहिए।
मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अनोजन के मामले में कानूनी प्रक्रिया और मृत्युदंड को लेकर चिंता जताई थी। मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा जीवन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मान्यता देती है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति ने भी मृत्युदंड को अत्यंत गंभीर अपराधों तक सीमित रखने की व्याख्या की है, जिसमें जानबूझकर हत्या शामिल है। ऐसे में केवल सोशल मीडिया टिप्पणी के आधार पर मृत्युदंड दिए जाने का औचित्य अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के संदर्भ में गंभीर सवाल पैदा करता है। मौत की सजा वाले मामलों में आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई, वकील की सहायता और अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। विदेश में काम करने वाले किसी व्यक्ति के लिए स्थानीय भाषा, कानून और न्यायिक प्रक्रिया को समझना कठिन हो सकता है। इसलिए कानूनी सहायता और पारदर्शी प्रक्रिया का महत्व और भी बढ़ जाता है।
हिंदू संगठनों ने शुरू किया अभियान
अनोजन के समर्थन में विभिन्न देशों के हिंदू संगठनों ने आवाज उठाई। अमेरिका की हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन और ब्रिटेन के इनसाइट यूके ने भी इस मामले में विरोध जताया है। इन संगठनों की अपील का उद्देश्य सऊदी अधिकारियों का ध्यान अनोजन के जीवन, कानूनी अधिकारों और सुरक्षित रिहाई की आवश्यकता की ओर आकर्षित करना है।
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी अनोजन को न्याय देने की मांग की है। उन्होंने पाकिस्तान, बांग्लादेश और सऊदी अरब सहित विभिन्न देशों में ईशनिंदा कानूनों के कथित असमान इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि मजहबी भावनाओं को आहत करने के मामलों में कानून का प्रयोग निष्पक्ष और समान रूप से होना चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी समुदाय की आस्था का अपमान स्वीकार्य नहीं है, लेकिन ऐसे मामलों में भेदभावपूर्ण कार्रवाई भी न्यायसंगत नहीं हो सकती। बंसल ने सऊदी अरब सरकार और किंग सलमान से अनोजन के मामले पर पुनर्विचार करने तथा निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने वैश्विक मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र से भी आग्रह किया कि मानवाधिकारों और मजहबी स्वतंत्रता के प्रश्न पर सभी समुदायों के लिए समान संवेदनशीलता दिखाई जाए।
भारत और श्रीलंका से भी पहल की मांग
ह्यूमन राइट्स डिफेंस इंटरनेशनल, नई दिल्ली ने भारत में सऊदी अरब के राजदूत को पत्र भेजकर प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के लिए शीघ्र समय मांगा है। संगठन ने आग्रह किया है कि राजदूत संबंधित सऊदी अधिकारियों तक अनोजन के जीवन की रक्षा और उनके मामले में मानवीय हस्तक्षेप की अपील पहुंचाएं। ऐसे मामलों में न्याय, करुणा और मानवाधिकारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। सऊदी अधिकारियों से अपील है कि अनोजन की रिहाई का रास्ता निकालने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। श्रीलंका सरकार से भी अपेक्षा है कि वह अपने नागरिक को कानूनी और राजनयिक सहायता देती रहे, उनके परिवार को नियमित जानकारी उपलब्ध कराए और संपर्क की सुविधा सुनिश्चित करे। भारत तथा अन्य देश भी मानवीय आधार पर सहयोग कर सकते हैं। मीडिया और नागरिक समाज को सही तथ्यों के आधार पर शांतिपूर्ण अपील करनी चाहिए तथा किसी पूरे धार्मिक समुदाय को दोषी ठहराने से बचना चाहिए।

















