13 दिसंबर 2001 में नई दिल्ली स्थित भारतीय संसद पर पाक परस्त इस्लामिक आतंकवादियों ने हमला किया था। इस हमले को आजाद भारत की सबसे बड़ी आतंकी घटना में से एक माना जाता है। तत्कालीन भारत की बाजपेई सरकार ने पाकिस्तान पर हमले और आतंकवादियों के शिविरों को नष्ट करने के सभी विकल्पों पर तैयारियां शुरू कर दी थी। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सहित अन्य दलों ने भारत सरकार का हर फैसले पर खुलकर समर्थन करने का एलान किया था। लेकिन केवल वामदलों ने ही कूटनीतक दबाव के द्वारा इस बड़ी आतंकी घटना के मसले का समाधान करने का मशविरा दिया था।
वामपंथी हिन्दुओं से करते हैं नफरत
वामदलों ने भारत सरकार से सशस्त्र कार्यवाही करने से बचने के लिए कहा था। वामपंथ सदैव से हिंदुत्व को प्रतिगामी मानते आ रहे हैं। दुर्भाग्य यह है राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पर भी कुछ सालों से वैचारिक रूप से वामपंथ का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वामपंथी, भारतीय राजनीति में चुनावों में लगातार नेपथ्य की ओर जा रहे हैं। आज भारत के किसी भी राज्य में वामपंथी सरकार नहीं है, उनकी लोकसभा में भी सख्या घटकर दहाई से नीचे पहुंच गई है। हां यह सच है कि उनके वैचारिक समर्थक अभी भी बड़ी संख्या में अकादमिक जगत, मीडिया आदि में मौजूद है। उनका सशक्त राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय मजबूत नेटवर्क भी है। चूंकि भारतीय चुनावी राजनीति के जरिये उनके सत्ता दूर की कौड़ी है इसलिए सोची समझी रणनीति के तहत वे अपनी विचारधारा को मजबूत और प्रसारित करने के लिए कांग्रेस और राहुल गांधी से निकटता प्राप्त कर ली है।
राहुल गांधी के सलाहकारों में वामपंथियों का है विशेष स्थान
उन्होंने राहुल गांधी के सलाहकारों में भी अपना विशेष स्थान प्राप्त कर लिया। जिसके फलस्वरूप वामपंथी विचार धारा का प्रभाव राहुल गांघी के बयानों में स्पष्ट देखा जा सकता है। आलोचना लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण अंग है लेकिन आलोचना करने में संयम और मर्यादा का भी ध्यान रखना चाहिए। राहुल गांघी ने इस सीमा का न केवल उल्लंघन किया, बल्कि वह अभिव्यक्ति करने में अभद्र भी दिखे। जिस प्रकार वामपंथियों की भाषा और कटुता होती है उसी प्रकार भाषा राहुल गांधी की हो गई है।
वीर सावरकर पर जहर उगलते हैं राहुल गांधी
पदयात्रा के दौरान राहुल गांधी महाराष्ट्र पहुंचते ही अचानक स्वात्त्यंत्र वीर सावरकर के खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाजी करते हैं। उन्हें देशद्रोही तक बताने में गुरेज नहीं करते। हालांकि, उनकी दादी श्रीमती इंदिरा गांधी ने सावरकर की प्रशंसा की थी। इस दौरान राहुल की पदयात्रा का एजेंडा केंद्र सरकार की आलोचना कर आम लोगों को जागरूक करना था। इसकी चिंता किये बिना कि सावरकर को खासकर महाराष्ट्र में एक बहुत बड़ा वर्ग अपना आदर्श मानता है। राहुल अपने बयानों में बार-बार कहते हैं हमारी लड़ाई सत्ता की नहीं विचारधारा की है।
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इसलिये वह बार बार आरएसएस और सरसंघचालक मोहन भागवत पर ही निशाना साधते है। वह मोदी, अमित शाह के साथ मोहन भागवत को भी जरूर निंदित करते। ऐसा ही कभी पहले वामपंथी नेता भी बोलते थे, उसी तरह का आचरण राहुल गांधी भी कर रहे हैं। हाल ही दिल्ली के जंतर मंतर में जेन जी प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने भी अपने सांसदों, नेताओं के साथ संसद का घेराव किया था। उसी प्रदर्शन के दौरान वामपंथी छात्र नेताओं का एक प्रतिनिधि मंडल राहुल गांधी से मिला था। इस मीटिंग के ठीक बाद राहुल गांधी ने बीजेपी पर हमला न बोलकर संघ परिवार पर हमला बोला।
वंदे मातरम से कांग्रेस को नफरत
उन्होंने देश के विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थाओं पर संघ परिवार द्वारा कब्जा करने का आरोप लगाया। संसद द्वारा अध्यादेश पारित करने के बाद पूरे वन्दे मातरम गीत को अनिवार्य गायन किये जाने के मामले में शुरू में कांग्रेस के भीतर असमंजस की स्थिति देखी गई। विवाद के प्रारम्भ में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने मीडिया के सामने समूची कांग्रेस द्वारा पूरे वन्देमातरम को गाने और अपनाने की स्वीकारोक्ति की। परंतु एक दो दिन बाद ही कांग्रेस ने ऐतिहासिक बातों का हवाला देते हुए पूर्ण वन्देमातरम गायन को ख़ारिज कर दिया।
स्मित मच्छार की बहादुरी पर राहुल गांधी का दोहरा रवैया
बीते 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव ले जा रहे विमान के भारतीय पायलट स्मित मच्छार पर ओमानी सह पायलट द्वारा जानलेवा हमला किये जाने के दौरान अपनी जान जोखिम डालकर स्मित ने सभी यात्रियों की जान बचाई। उन्होंने बताया कि वह हमला होने के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे, जिसके कारण उनकी जान बच सकी और उन्होंने यात्रियों की जान बचा पाई। स्मित मच्छार के इस अदम्य साहस की प्रशंसा न केवल प्रधानमंत्री मोदी ने की, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी उनके साहस को खूब सराहा गया। परंतु कांग्रेस के तरफ से केवल अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ही स्मित की सराहना की, वह भी मुखर होकर नहीं, दबे मन से।
कांग्रेस के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी ने इस पर एक शब्द नहीं बोला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनके अन्य बड़े नेता शायद हनुमान चालीसा पढ़ने वाले कैप्टन स्मित की इसलिए प्रशंसा नहीं करना चाह रहे, क्योंकि वह किसी हिंदू उपासक की प्रशंसा नहीं करना चाहते है। इस तरह का रवैया कुछ सालों पहले तक कांग्रेस और राहुल गांधी का नहीं था। वाम विचार के प्रभाव के कारण राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस बीते दो- तीन सालों से ऐसा व्यवहार करने लगी है। कम्युनिस्ट जब कमजोर होते हैं तो अपना लक्ष्य साधने के लिए ऐसी ही पैंतरेबाजी करते हैं।
1930 के दशक में कम्युनिष्टों ने पहले कांग्रेस में घुसकर उसे प्रभावित करने का प्रयास किया था परंतु गांधीवादी कांग्रेस से उनका लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तब उन्होंने कांग्रेस को बुजुर्वा कहकर खूब निंदित किया था। कांग्रेस को चाहिए कि वह अपनी ही विचारधारा पर ही चले वाममार्गी विचारधारा को न अपनाये नहीं तो कांग्रेस का भारतीय मुख्य धारा से विचलन हो सकता है। जो कांग्रेस और देश के लिए भी घातक सिद्ध होगा।
भाजपा, वामपंथी विचार धारा वाले अमेरिकी उद्योगपति जार्ज सोरेस से मिली भगत का आरोप लगाती रही है। उसके इशारे पर भारत में अराजक स्थिति पैदा करने की बात कही जाती है। यह सही है सलिल शेट्टी सोरेस की संस्था ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन्स के वाइस प्रेसिडेंट रहे हैं। 31 अक्टूबर 2022 को वे कर्नाटक में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में उनके साथ चले थे। इसकी तस्वीरें सार्वजनिक हैं और 2023 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी इसी आधार पर राहुल गांधी पर सवाल उठाए थे।

















