विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत का रुख अब सिर्फ बातचीत और कूटनीति की वकालत करने तक सीमित नहीं रह गया है। उन्होंने साफ संकेत दिया कि भारत अब इस संघर्ष में सक्रिय रूप से मदद करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
जयशंकर का बयान
म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में बोलते हुए जयशंकर ने बताया, “हम इस संघर्ष का अंत देखना चाहते हैं। इसके लिए बातचीत और कूटनीति जरूरी है। हम कई सालों से इसकी वकालत करते आ रहे हैं। हाल के महीनों में हम वकालत से थोड़ा आगे बढ़कर और ज्यादा शामिल हो गए हैं। इस बारे में हम रूस और यूक्रेन दोनों से बातचीत कर रहे हैं। हम मददगार बनने की कोशिश कर रहे हैं। शुरुआत ब्लैक सी में शिपिंग की सुरक्षा के मुद्दे से कर रहे हैं।”
उन्होंने बताया कि भारत कुछ तुरंत चिंताओं को सुलझाने पर ध्यान दे रहा है। इनमें अनाज निर्यात, ऊर्जा निर्यात और एक-दूसरे पर हमला न करने की संभावनाएं शामिल हैं।
पहले क्या था रुख
अब तक भारत ने चीन जैसी कुछ देशों की तरह खुद कोई खास प्रस्ताव नहीं रखा था। वह सिर्फ सभी वैश्विक शांति पहलों का समर्थन करता रहा और दोनों पक्षों के बीच बातचीत की जरूरत पर जोर देता रहा। यह रुख भारत की इस सोच पर आधारित था कि देशों के बीच विवाद द्विपक्षीय स्तर पर सुलझने चाहिए।
दोनों देशों ने क्या कहा
पिछले कुछ दिनों में मॉस्को और कीव दोनों ने कहा है कि भारत ने युद्ध खत्म करने के लिए कुछ विचार और प्रस्ताव दिए हैं।
शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास शांति के बहुत अच्छे विचार हैं।
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने कहा कि भारत ने उन्हें मिले चार प्रस्तावों में सबसे व्यापक प्रस्ताव दिया है। इनमें अमेरिका का प्रस्ताव भी शामिल है।
पिछले महीने जयशंकर यूक्रेन गए थे। उससे पहले पीएम मोदी ने पुतिन को संदेश दिया था कि यह अंतहीन युद्ध बंद होना चाहिए। उस यात्रा के दौरान भी भारत ने युद्धविराम के लिए विचार विकसित करने पर चर्चा की थी।
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इस बदलाव के पीछे क्या है
यह बदलाव घरेलू असर की वजह से भी दिख रहा है। ब्लैक सी में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बाधित होने और रूस से कच्चा तेल खरीदने पर अमेरिका की तरफ से दबाव पड़ने जैसे मुद्दे भारत को प्रभावित कर रहे हैं।
रूस से रिश्ते पर जयशंकर का जिक्र
जयशंकर ने फिर दोहराया कि जब भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता खतरे में थी, तब रूस भारत के साथ खड़ा रहा। उस समय दुनिया का बड़ा हिस्सा हमारे पड़ोस में सैन्य शासन का समर्थन कर रहा था, लेकिन रूस के साथ हमारे रिश्ते बहुत अच्छे थे। आज भी भारत का रूस के प्रति रुख उसी विरासत से प्रभावित है।
अमेरिका और चीन पर टिप्पणी
जयशंकर ने कहा कि आज दुनिया में अमेरिका का रुख तेजी से बदल रहा है। अमेरिका जानबूझकर अकेला पड़ने वाली ताकत बन रहा है। साथ ही चीन का उदय हो रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था काफी हद तक अमेरिका के सहारे चल रही थी, लेकिन अब वह सहारा कमजोर पड़ रहा है और खामियां निकल रही हैं। अमेरिका और चीन के बीच तेज मुकाबला सिर्फ इन दोनों तक सीमित नहीं है। इससे हर देश अपनी ताकत का इस्तेमाल हथियार की तरह करने लगा है। यह मुकाबला एक-दूसरे पर निर्भरता के साथ भी चल रहा है।
















