मुंबई के ताज होटल में पाञ्चजन्य की ओर से आयोजित ‘सुशासन संवाद- मुंबई संकल्प’ का आयोजन किया गया है। श्री नितेश राणे जी कैबिनेट मंत्री, महाराष्ट्र सरकार ने पाञ्चजन्य की कंसल्टिंग एडिटर तृप्ति श्रीवास्तव जी से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने मुंबई की तटीय सुरक्षा, ड्रोन निगरानी और कोस्टल सिक्योरिटी से लेकर मदरसों के ऑडिट, धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों पर सरकार की भूमिका पर विस्तार से अपनी बात रखी। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि मंत्री और विधायक जैसे पदों से अलग उनकी व्यक्तिगत और सांस्कृतिक पहचान उनके लिए क्या मायने रखती है। पेश है इस विशेष बातचीत के प्रमुख अंश-
प्रश्न. मुंबई ने 2008 के आतंकी हमले का दर्द झेला है। कोस्टल सिक्योरिटी के लिहाज से आज मुंबई कितनी सुरक्षित है?
उत्तर: हमारी सरकार की प्राथमिकता सुरक्षा है। जब मैंने मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली, तभी मैंने स्पष्ट किया था कि महाराष्ट्र की पूरी तटीय पट्टी की सुरक्षा को मजबूत करना मेरी प्राथमिकताओं में रहेगा। आपने 2008 का उदाहरण दिया। उस घटना ने हमें यह सिखाया कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। गेटवे ऑफ इंडिया के सामने जिस क्षेत्र में छोटी नावें चलती हैं, वहां लाइसेंस और नाव संचालन से जुड़ी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। किस व्यक्ति के नाम पर लाइसेंस है, कौन नाव चला रहा है और उसकी पृष्ठभूमि क्या है- इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जहां लाइसेंस का गलत इस्तेमाल पाया गया, वहां कार्रवाई भी की गई है। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तटीय क्षेत्र में केवल अधिकृत और सत्यापित लोग ही नावों का संचालन करें। इसके अलावा पूरे कोस्टल क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से निगरानी शुरू की गई है। लगभग 11 ड्रोन अलग-अलग क्षेत्रों में निगरानी कर रहे हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी हमारे कंट्रोल सेंटर तक पहुंचती है। हमारे पास कोस्टल सिक्योरिटी बोट्स भी हैं। 24 घंटे तटीय क्षेत्र की निगरानी की जा रही है। हमारा प्रयास है कि समुद्री रास्ते से कोई भी अवैध गतिविधि या घुसपैठ न हो।
प्रश्न. सुरक्षा केवल बाहरी खतरे तक सीमित नहीं है। हाल के कुछ मामलों में महिलाओं के उत्पीड़न और कथित जबरन धर्मांतरण जैसे आरोप भी सामने आए हैं। ऐसी मानसिकता से निपटने के लिए आपकी सरकार की क्या रणनीति है?
उत्तर: हमारी सरकार की भूमिका स्पष्ट है कि किसी भी प्रकार की जबरदस्ती, उत्पीड़न या गैरकानूनी गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जाएगा। टीसीएस से जुड़े मामले में भी हमने संबंधित मुद्दों को गंभीरता से उठाया था और कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए पॉश एक्ट को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कंपनियों की भी जिम्मेदारी है कि वे कर्मचारियों की नियुक्ति और कार्यस्थल की सुरक्षा को लेकर निर्धारित कानूनों और प्रक्रियाओं का पालन करें। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई उसकी पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि उसके आचरण और कानून के उल्लंघन के आधार पर होनी चाहिए। हमारी सरकार की प्राथमिकता कानून का पालन और नागरिकों की सुरक्षा है।
प्रश्न. आपने महाराष्ट्र में मदरसों के ऑडिट की बात कही है। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: मेरा मानना है कि हर बच्चे को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जो उसे आधुनिक भारत की मुख्यधारा से जोड़े। हमारा संविधान सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और अवसर सुनिश्चित करता है। मदरसों में शिक्षा की गुणवत्ता, पाठ्यक्रम, पंजीकरण और वहां उपलब्ध सुविधाओं की पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए। यदि किसी संस्था का उपयोग शिक्षा के बजाय किसी गैरकानूनी गतिविधि के लिए हो रहा है, तो उसकी जांच और उस पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। असम में मदरसों को लेकर जो कदम उठाए गए हैं, उनका उद्देश्य उन्हें आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ना बताया गया है। महाराष्ट्र में भी हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि बच्चों को ऐसी शिक्षा मिले, जिससे वे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य क्षेत्रों में अपना भविष्य बना सकें। सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने वाले प्रत्येक नागरिक की तरह सभी संस्थाओं को भी कानून और निर्धारित नियमों का पालन करना चाहिए।
प्रश्न. त्योहारों और गरबा पंडालों में पहचान की जांच को लेकर आपने बयान दिया था। इस मांग के पीछे आपकी चिंता क्या है?
उत्तर: मेरी चिंता मुख्य रूप से सुरक्षा को लेकर है। किसी भी बड़े धार्मिक आयोजन में आयोजकों और प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान रखना चाहिए। यदि किसी आयोजन में प्रवेश के लिए पहचान सत्यापन की व्यवस्था की जाती है, तो उसका उद्देश्य सुरक्षा होना चाहिए। यह नियम सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होना चाहिए और किसी समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं होना चाहिए। नवरात्रि और गरबा हिंदू धार्मिक परंपरा से जुड़े आयोजन हैं। इसी तरह अन्य समुदायों के धार्मिक आयोजनों का भी सम्मान होना चाहिए। हमारा उद्देश्य यह होना चाहिए कि सभी लोग अपने-अपने धार्मिक त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से मना सकें।
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प्रश्न. मुंबई को लेकर अक्सर कहा जाता है कि यहां अलग-अलग समुदाय और संस्कृतियां साथ रहती हैं। ऐसे में धार्मिक विवादों से बचने के लिए क्या किया जाना चाहिए?
उत्तर: मुंबई की पहचान विविधता से जुड़ी है। हर समुदाय को अपने धर्म और परंपराओं के अनुसार त्योहार मनाने का अधिकार है, लेकिन साथ ही सभी को कानून और दूसरे समुदायों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। किसी भी धार्मिक जुलूस या आयोजन में हिंसा, पथराव या दूसरे समुदाय को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियां स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति या समूह किसी दूसरे समुदाय के धार्मिक आयोजन में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। यही बात हर समुदाय पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। हमारा उद्देश्य होना चाहिए कि मुंबई में सभी त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से मनाए जाएं और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
प्रश्न. आप एक मंत्री भी हैं और एक युवा नेता के रूप में सामाजिक एवं वैचारिक मुद्दों पर मुखर भी रहते हैं। इन दोनों भूमिकाओं में संतुलन कैसे बनाते हैं? असली नीतेश राणे कौन हैं मंत्री या नेता?
उत्तर: मंत्री, विधायक जैसे पद अस्थायी हैं। मैं मंत्री हूं, यह मेरी वर्तमान जिम्मेदारी है। जब तक मेरी पार्टी और मेरे वरिष्ठों को लगेगा कि मुझे मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभानी है, मैं निभाऊंगा। जब तक मेरे क्षेत्र की जनता मुझे चुनेगी, मैं विधायक रहूंगा। लेकिन मेरी पहचान इससे बड़ी है। मैं जन्म से हिंदू हूं और मेरे लिए यह मेरी स्थायी पहचान है। मेरे जन्म प्रमाणपत्र पर मंत्री नहीं, बल्कि मेरी पहचान दर्ज होगी। इसलिए मेरा मानना है कि कोई व्यक्ति किसी भी पद पर हो, उसे अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान नहीं भूलनी चाहिए। पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन अपनी मूल पहचान और जिम्मेदारियों के प्रति प्रतिबद्धता बनी रहनी चाहिए। मेरे लिए मंत्री या विधायक होना एक जिम्मेदारी है, जबकि मेरी सांस्कृतिक पहचान मेरे जीवन का स्थायी हिस्सा है।














