खाड़ी युद्ध के बीच होर्मुज को ईरान ने बंद कर रखा है। इसी क्रम में अब ईरानी सेना ने भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो जहाजों को अपने कब्जे में ले लिया है। ये कार्रवाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ये कार्रवाई की। दोनों जहाजों पर आरोप लगा कि वे गुप्त तरीके से स्ट्रेट से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे।
क्या है पूरा मामला
मामला कुछ यूं है कि ईरानी नौसेना ने MSC Francesca (पनामा झंडे वाला) और Epaminondas (लाइबेरिया फ्लैग वाला, ग्रीस संचालित) नाम के दो कार्गो जहाजों को रोका और उन्हें किनारे की तरफ ले गई। एक ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा संगठन ने बताया कि उस दिन स्ट्रेट में तीन जहाजों पर हमले हुए। एक घटना में ईरानी गनबोट ने एक जहाज के पास आकर गोलीबारी की और उसके ब्रिज को काफी नुकसान पहुंचाया। ईरान ने कहा कि ये जहाज नियम तोड़ रहे थे।
ये घटना 22 अप्रैल 2026 को हुई, जो 28 फरवरी 2026 से चल रहे युद्ध के दौरान पहला मौका है जब ईरान ने जहाजों को जब्त किया। इससे पहले अमेरिका ने भी एक ईरानी कार्गो जहाज और एक ऑयल टैंकर को जब्त किया था।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट
गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल और तरल गैस का करीब 20% हिस्सा ले जाने वाला बहुत महत्वपूर्ण जलमार्ग है। युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने इसे बंद कर दिया और अमेरिका ने अपनी नौसेना से ब्लॉकेड लगा दिया। दोनों तरफ से ये ब्लॉकेड चल रहे हैं। इससे पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतें बढ़ गईं, एशिया में ईंधन, खाद और कच्चे माल की कमी हो गई। यूरोप में भी असर पड़ा। जर्मनी ने अपना 2026 का विकास अनुमान घटाकर सिर्फ 0.5% कर दिया। ग्रीस ने परिवारों और किसानों के लिए 500 मिलियन यूरो की अतिरिक्त मदद घोषित की।
पाकिस्तान को ढोंग काम नहीं कर रहा
उधर पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में शांति बातचीत की तैयारी चल रही थी, लेकिन अब ये मुश्किल लग रही है। ईरान को अमेरिका से नए प्रस्ताव मिले थे, लेकिन दोनों तरफ अभी भी बड़ा फर्क है। ईरान ने इस वार्ता में शामिल होने से इंकार कर दिया है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी ने मदद की अपील की है क्योंकि गल्फ में करीब 20,000 नाविक और 2,000 जहाज फंस गए हैं।

















