पितृपक्ष का समय हिंदू धर्म में पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए खास माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। साथ ही अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-पुण्य भी किया जाता है। इस साल 27 सितंबर 2026, रविवार से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है। इस दिन आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रहेगी, इसलिए प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध किया जाएगा।
मान्यता के अनुसार, जिन पितरों की मृत्यु किसी भी महीने के किसी भी पक्ष में प्रतिपदा तिथि को हुई हो, उनका श्राद्ध पितृपक्ष की प्रतिपदा तिथि पर किया जाता है। ऐसे में 27 सितंबर का दिन उन परिवारों के लिए विशेष है, जो इस तिथि पर अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं। आइए जानते हैं इस दिन का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
27 सितंबर का पंचांग
27 सितंबर को आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रात 8:59 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि शुरू होगी। इस दिन उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र सुबह 11:08 बजे तक रहेगा।
27 सितंबर के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:53 से 5:40 बजे तक
प्रातः संध्या: सुबह 5:17 से 6:28 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:30 से 6:54 बजे तक
कुतुप मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक
पितृकर्म के लिए कुतुप मुहूर्त को खास माना जाता है। इस दौरान श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जा सकता है।
जानें शहरों में राहुकाल का समय
27 सितंबर को दिल्ली में राहुकाल शाम 4:42 से 6:12 बजे तक रहेगा। मुंबई में 5:00 से 6:31 बजे, जबकि लखनऊ में 4:27 से 5:57 बजे तक राहुकाल रहेगा। चंडीगढ़ में यह समय 4:43 से 6:13 बजे तक रहेगा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
27 सितंबर को सूर्योदय सुबह 6:11 बजे और सूर्यास्त शाम 6:12 बजे होगा।
प्रतिपदा पर किसका श्राद्ध?
प्रतिपदा तिथि पर उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु प्रतिपदा तिथि को हुई हो। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए तर्पण, पिंडदान और दान से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यदि नाना-नानी का कोई पुत्र न हो और उनका निधन हो चुका हो, तो नाती द्वारा भी उनका श्राद्ध करने की परंपरा बताई गई है।











