विश्व बाघ दिवस-2025: देवभूमि उत्तराखंड के जंगलों में 560 टाइगर
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विश्व बाघ दिवस-2025: देवभूमि उत्तराखंड के जंगलों में 560 टाइगर

उत्तराखंड में बाघों की संख्या 560 तक पहुंची, कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में संरक्षण प्रयासों से हिमालयी क्षेत्र बाघों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन रहा है। जानें बाघों के व्यवहार और संरक्षण की चुनौतियों के बारे में।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो
Jul 29, 2025, 02:19 pm IST
in उत्तराखंड
World Tiger day Uttarakhand

प्रतीकात्मक तस्वीर

देहरादून: आज वर्ल्ड टाइगर डे है और देवभूमि उत्तराखंड सहित देश के अन्य राज्यों  में टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट की चर्चा हो रही है। उत्तराखंड में कॉर्बेट , राजा जी टाइगर रिजर्व के साथ साथ वेस्टर्न सर्कल में बाघों की लगातार बढ़ती संख्या से ये बात साबित हुई है कि हिमालय शिवालिक की तलहटी बाघों के लिए सबसे महफूज जगह है।

राज्य में बाघों की संख्या 560

उत्तराखंड में 2023 की बाघों की गणना में 560 बाघों की तस्वीर जंगल क्षेत्र में लगाए कैमरे में ट्रैप हुई थी। इनमें कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में 260 बाघ, वेस्टर्न सर्कल में 88, लैंसडाउन वन प्रभाग में 29 बाघ होने की बात कही गई है। आगामी टाइगर की गिनती में ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि उत्तराखंड में बाघों की संख्या 600 से अधिक हो जाएगी।

हर जिले में टाइगर की मौजूदगी

उत्तराखंड में बाघों के बारे में एक दिलचस्प बात ये भी सामने आई है कि राज्य के 13 जिलों में बाघ होने के साक्ष्य मिले हैं, उत्तरकाशी,चमोली, पौड़ी पिथौरागढ़ के ऊंचे इलाकों में भी टाइगर दिखाई दिया है। बागेश्वर में भी बाघ दिखाई दिया है।
बाघों के विशेषज्ञ आईएफएस डा पराग मधुकर धकाते बताते है कि बागेश्वर का नाम भी बाघ से जुड़ा हुआ है, इस लिए बाघों के पहाड़ में होने के साक्ष्य कोई नई बात नही है। उनका ये भी कहना है कि उत्तराखंड में स्थानीय लोगो का ये भी मानना है कि जहां देवी दुर्गा में मंदिर या शक्ति स्थल है वहां बाघों की मौजूदगी होती है और लोग इसे शक्ति की सवारी मानते हैं।

बाघों के व्यवहार में आ रहा बदलाव

बाघ विशेषज्ञ नरेंद्र सिंह बताते हैं कि पहाड़ों ने तेंदुए अधिक हैं और वो बूढ़े बच्चों पर हमले करते हैं, किंतु टाइगर हमला तब तक नहीं करता जब तक उसे छेड़ा न जाए। बाघों के विषय में तराई पश्चिम वन प्रभाग के डीएफओ प्रकाश आर्य कहते हैं कि बाघों के व्यवहार में कुछ सालों से बदला हुआ भी दिख रहा है पहले बाघ अपनी टेरेटरी में किसी दूसरे बाघ को घुसने नहीं देता था। पर अभी कैमरा ट्रैप में एक साथ बाघ घूमते हुए शिकार करते हुए और एक साथ पानी पीते हुए मिले हैं।

उत्तराखंड के पीसीसीएफ (हॉफ) डा समीर सिन्हा बताते हैं कि ज्यादा बाघ एक साथ दिखना अध्ययन का विषय है और हम इस और सचेत भी हैं फिलहाल जहां ऐसी तस्वीरें सामने आई है। वहां से बाघों को झुंड से अलग कर उन्हें जंगल के उन दूसरे हिस्सों में भेजा जा रहा है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डा साकेत बडोला कहते हैं कि बाघों के लिए उत्तराखंड का भावर क्षेत्र सबसे उपयुक्त स्थान माना जाता रहा है। हमने बढ़ते बाघों को भावर के जंगलों में विचरते देखा है।

कम बाघ वाले इलाकों में शिफ्ट किए जा रहे 

इसलिए जिन जंगलों में उनकी संख्या नहीं है, वहां उनको शिफ्ट किया जा रहा है ताकि उनका कुनबा बढ़ सके, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से राजा जी पार्क में बाघों को शिफ्ट भी किया गया है जिसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे हम इन बाघों पर जीपीएस तकनीक से नजर रखते हैं। देश में बाघों की संख्या 3682 हो गई है पिछले दस सालों में सरकार की बाघ संरक्षण नीतियों की बदौलत 65 फीसदी का इजाफा हुआ है।

अभी भी ऐसे जंगल हैं जहां बाघ तो हैं पर उनकी सुरक्षा के लिए नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथार्टी ने कोई योजना नहीं बनाई है,उत्तराखंड में बाघों की संख्या वेस्टर्न सर्कल में किसी छोटे टाइगर रिजर्व से कहीं अधिक हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा राम भरोसे है।

नहीं बनी टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स

भारत सरकार द्वारा बनाई गई एनटीसीए के द्वारा उत्तराखंड सरकार को बार बार टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स बनाने के लिए कहा जाता रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस बारे में दो बैठकें भी कर चुके हैं किंतु इस बारे में वन्य जीव प्रतिपालक और अन्य अधिकारी कोई रुचि नहीं लेते। यदि टाइगर फोर्स बन जाती है तो बाघों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर नए मापदंड स्थापित हो सकते है।

सीएम धामी है बाघ प्रेमी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले दिनों बाघों की सुरक्षा में लगे कॉर्बेट पार्क के सुरक्षा कर्मियों के साथ जंगल में पैदल गश्त करके ये संदेश दिया था कि बाघों की सुरक्षा कितनी जरूरी है,उन्होंने कॉर्बेट कर्मियों का हौंसला बढ़ाया था, उल्लेखनीय है कि मानसून के दौरान टाइगर रिजर्व बंद कर दिए जाते है और इस दौरान बाघों के शिकारी भी जंगल में प्रवेश लेते है, “आप्रेशन मानसून” चला कर कॉर्बेट और राजा जी प्रशासन द्वारा  बाघों की सुरक्षा की जाती है। सीएम धामी इस बारे में कहते है टाइगर का हम संरक्षण और सुरक्षा तो करते ही है साथ ही हमारे राज्य में टाइगर टूरिज्म की वजह से लाखो बाघ प्रेमी भी आते हैं, जो कि एक बड़े आर्थिकी चक्र को भी घुमाते है। सीएम कहते है हम अपने बाघों की संरक्षण को पहली प्राथमिकता में रखते हैं इनकी सुरक्षा में कोई चूक को बर्दाश्त भी नहीं करते।

श्री धामी कहते है हमारी धार्मिक मान्यताओं में बाघ को दुर्गा वाहिनी बोला जाता है हमने देखा है देवभूमि में जहां जहां मां के पौराणिक मंदिर है धाम है वहां बाघ की मौजूदगी भी है। इस लिए हम इनका संरक्षण को अपना सौभाग्य समझते हैं।
श्री धामी ने बताया कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पास हमने एक रेस्क्यू सेंटर बनाया है जहां इस वक्त 11 टाइगर्स का इलाज चल रहा है।जोकि किन्हीं कारणों से अस्वस्थ है घायल हैं। जल्द ही उन्हें पुनः जंगल के प्रवास पर भेजा जाएगा।

Topics: Uttarakhand Tiger Conservationकॉर्बेट टाइगर रिजर्वcorbett tiger reserveविश्व बाघ दिवसWorld tiger dayउत्तराखंड बाघ संरक्षण
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