नई दिल्ली: चुनाव आयोग के भीतर मतभेद और SIR को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आयोग का कहना है कि किसी भी संस्था में अलग-अलग विचार और टिप्पणियां आना विचार-विमर्श की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। अंतिम फैसला लिए जाने से पहले ये सभी टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया में शामिल रहती हैं। सिर्फ तीनों चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग के अधिकारी भी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव दे सकते हैं।
आयोग का कहना है कि निर्वाचन आयुक्तों की ओर से दिए गए सुझावों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को और बेहतर बनाना था। इसलिए किसी आंतरिक टिप्पणी या सुझाव को सीधे संस्थागत मतभेद के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। चुनाव आयोग ने ये बातें प्रेस नोट के जरिए कही हैं। आयोग का कहना है कि वह संविधान तहत काम करता है। उसके भीतर लिखित टिप्पणियां, सुझाव, तकनीकी राय और आंतरिक जांच-पड़ताल सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उसकी सभी कार्रवाइयां कानून और आयोग के निर्देशों के मुताबिक की गई हैं।
Official Press Note https://t.co/xIQvXHqMSt
— Election Commission of India (@ECISVEEP) September 23, 2026
आयोग ने कहा कि उसकी कार्यप्रणाली मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से संबंधित 2023 के कानून के तहत तय होती है। किसी फैसले को अंतिम रूप देने से पहले सदस्यों के बीच चर्चा होती है और इस दौरान अलग-अलग राय, सुझाव या प्रशासनिक सवाल उठना सामान्य प्रक्रिया है। इनका उद्देश्य चुनावी व्यवस्था को मजबूत करना और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है।
पिछले 10 महीनों के दौरान सामने आए कुछ चुनिंदा आंतरिक नोट्स या टिप्पणियों को ही उजागर करने से तस्वीर का केवल एक हिस्सा सामने आता है। इसी अवधि में बड़ी संख्या में मंजूरियां, फैसले, निर्देश और नई पहल भी की गईं। हाल के महीनों में करीब 40 नई पहल शुरू की गई हैं। कई चुनावी सुधार किए गए हैं। आयोग ने कहा कि पिछले एक साल में लिए गए सभी फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।चुनाव आयोग ने कहा कि वह संविधान के तहत मिली जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। मतभेदों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आयोग का कहना है कि आंतरिक सुझाव और टिप्पणियां उसकी कामकाजी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इन्हें अंतिम फैसलों से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। बता दें कि एक रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर एसआईआर को लेकर मतभेद को लेकर बातें कही गई थी। जिसके बाद चुनाव आयोग ने इसे लेकर सफाई दी है।
















