देहरादून: SIR को लेकर अब रोज नए नए मुद्दे सामने आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, हजारों वोटर्स के नाम ऐसे हैं जो UP की वोटर लिस्ट में भी रजिस्टर्ड हैं और उत्तराखंड की वोटर लिस्ट में भी आ गए हैं। अब इस बात की चर्चा ये भी सामने आई है कि क्या ऐसे मतदाता यूपी उत्तराखंड में दोनों जगह वोट डालते रहे?
वोटर लिस्ट पर सियासी घमासान
जानकारी के मुताबिक यूपी से लगी बहुत से विधानसभाएं ऐसी जहां की वोटरलिस्ट में दर्ज नामो को लेकर राजनीतिक दलों में रस्साकशी सी चल रही है,कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी या अन्य कोई सिंडिकेट योजनाबद्ध तरीके से SIR के जरिए फॉर्म 7 के जरिए आपत्तियां दर्ज करवा रहा है। ताकि उनके समर्थकों के नाम हटाए जा सकें। कांग्रेस नेता तिलक राज बेहड़, अनुपमा रावत और हाजी मोहम्मद काजी ने सवाल उठाए हैं कि एक खास वर्ग के वोट काटे जा रहे हैं। हालांकि बीजेपी ने इसके जवाब में कहा है कि उनके द्वारा उन मतदाताओं पर आपत्तियां लगाई है जोकि मौके पर मौजूद नहीं है। बाकि विषयों से उसका कोई लेना देना नहीं है। BJP के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस तुष्टीकरण की राजनीति के ज़रिए घुसपैठियों के वोटों की रक्षा कर रही है। चुनाव आयोग एक साफ़ और पारदर्शी वोटर लिस्ट बनाने के लिए ज़िम्मेदार है, और हमारे BLA इसमें मदद कर रहे हैं।
भट्ट का साफ कहना है कि वोटर लिस्ट से गैर-जरूरी नाम हटाए जाने पर ही चुनाव में वोटिंग परसेंटेज बढ़ेगा। अब एक खास वर्ग विशेष की वोटो की चिंता कांग्रेस करती है जबकि मतदाता सूची में बहुत से नामों पर निर्वाचन आयोग को संदेह है तो उसपर उन्हें जांच पड़ताल करने का हक है। जानकारी के मुताबिक, सॉफ्टवेयर से उधम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल जिलों की वोटर लिस्ट में ऐसे नाम पता चले हैं, जो UP की वोटर लिस्ट में भी हैं। गौरतलब है कि UP, बिहार और बंगाल से कई ऐसे लोग हैं जो 2003 के बाद नौकरी की तलाश में उत्तराखंड आए थे और अब उनके नाम यहां की वोटर लिस्ट में दर्ज हैं और उनके नाम उनके राज्य की वोटर लिस्ट में भी हैं।
डुप्लीकेट वोटरों पर चुनाव आयोग का शिकंजा
यह भी पता चला है कि बिहार और बंगाल के पिछले विधानसभा चुनावों में हिस्सा लेने के बाद और जब उनके राज्यों में SIR प्रोसेस शुरू हुआ, तो उन्होंने अपने राज्यों की वोटर लिस्ट में अपना नाम रजिस्टर करवा लिया। ऐसे ही यूपी में SIR समाप्त हो चुका है और वहां नाम , ऐसे मतदाताओं ने बरकरार रखे है जोकि उत्तराखंड में भी दर्ज थे। इसलिए, चुनाव आयोग ने उन सभी वोटरों को नोटिस जारी किया है, जिन पर आरोप है कि वे दोनों राज्यों में वोट देते रहे। हालांकि, चुनाव आयोग ने अब उत्तराखंड में एक साफ़ वोटर लिस्ट बनाने की दिशा में आगे बढ़ना शुरू कर दिया है और डुप्लीकेट नाम भी हटाने शुरू कर दिए हैं।

















