मैं स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से जुड़ी पांच महत्वपूर्ण बातें साझा करना चाहता हूं। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी केवल सरदार वल्लभभाई पटेल का स्मारक नहीं, बल्कि एकता, जनभागीदारी और विकास का मॉडल है। 2001 के भूकंप के बाद गुजरात के कच्छ पुनर्निर्माण और धोलेरा विकास मॉडल के बाद यह एक नए प्रकार की विकास यात्रा को दर्शाता है। धोलेरा एक बंजर क्षेत्र से विकसित हो रहा औद्योगिक और स्मार्ट सिटी मॉडल है।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक ‘लोहा कैंपेन’ था। इसका उद्देश्य था कि देश के कोने-कोने के किसानों की भागीदारी इस परियोजना में हो। करीब तीन लाख गांवों को आमंत्रित किया गया और लगभग 16,974 गांवों से किसानों के इस्तेमाल किए हुए कृषि उपकरणों का लोहा प्राप्त हुआ। इससे करीब 111 टन लोहा मिला। इसी तरह ‘वॉल ऑफ यूनिटी’ के लिए लगभग 1.17 लाख गांवों से मिट्टी लाई गई। इससे यह स्मारक पूरे देश की भागीदारी और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का प्रतीक बन गया।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों, शिक्षाविदों और पर्यटकों के लिए करीब 32 परियोजनाएं विकसित की गई हैं। इससे आसपास के आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े और लोगों का पलायन कम हुआ। निर्माण में पर्यावरणीय मानकों का भी पालन किया गया। सरदार पटेल का जीवन देशसेवा, संगठन, प्रशासन और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता है। इसलिए स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को केवल स्मारक नहीं, बल्कि भारत की एकता, जनभागीदारी और विकास की जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में देखना चाहिए।

















