कांग्रेस के नेता राहुल गांधी अक्सर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ अनर्गल बयान देते हैं। वह भाजपा से लड़ नहीं पाते, हर चुनाव में हारते हैं। मुस्लिम तुष्टिकरण की नींव पर खड़ी कांग्रेस मुस्लिम बहुल सीट पर भी बुरी तरह हार रही है। भाजपा से हार से बौखलाकर वह संघ को बीच में ले आते हैं। देशभक्त और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर भी निशाना लगाने लगे हैं।
शनिवार को राहुल गांधी ने भाजपा के साथ राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ पर फिर से हमला किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बड़ा पोस्ट लिखा। इसमें वह राष्ट्रनिष्ठ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए कायर शब्द का इस्तेमाल करते हैं। उनकी इस पोस्ट पर Friends of RSS ने उन्हें कुछ अध्याय याद दिलाए हैं।
राहुल गांधी ने क्या कहा
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘मैं नरेंद्र मोदी, RSS और इनसे जुड़े लोगों के ख़िलाफ़ एक दशक से भी ज़्यादा समय से लड़ रहा हूँ। मैं अपने विरोधियों को उतनी अच्छी तरह समझता हूँ, जितना कोई भी अपने प्रतिद्वंद्वी को समझता है। मैं इन्हें अंदर तक जानता हूँ, इनकी हर चाल से वाक़िफ़ हूँ। इन लोगों की सबसे बड़ी पहचान है – कायरता। नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत, ज्ञानेश कुमार, अजीत डोभाल – इस कहानी के खलनायक – अब धीरे-धीरे घिरते जा रहे हैं। इनके चारों तरफ़ से दायरा सिमट रहा है। जो करना है, कर लीजिए। जितनी पुलिस बुलानी है, बुला लीजिए – 10 हज़ार, 20 हज़ार, 50 हज़ार, जितनी चाहें बुला लीजिए। सारे नेताओं को गिरफ़्तार कर लीजिए। सारे युवाओं को गिरफ़्तार कर लीजिए। हम सबको गिरफ़्तार कर लीजिए। घबराइये मत – हम आपको चारों तरफ़ से घेर रहे हैं, और हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। मेरी बात याद रखिए – हमें जो जानकारी चाहिए, वह हमारे पास पहले से है। हम अपने संविधान की रक्षा करेंगे। हम हिंदुस्तान की जनता की आवाज़ की हिफ़ाज़त करेंगे। और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि पिछले 10-15 सालों में हिंदुस्तान के साथ जो हुआ है, वह दोबारा कभी, किसी भी सूरत में न हो। हिंदुस्तान के युवाओं, मुझे आप पर गर्व है। अपना विरोध जारी रखिए। हम आपके साथ खड़े हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस सरकार और हमारे संविधान पर हमला करने वालों को शिकस्त मिले।
राहुल गांधी की ओर से एक और झूठी कहानी
राहुल गांधी की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई। संघ शताब्दी वर्ष में और अन्य अवसरों पर संघ की तरफ से यह स्पष्ट किया जा चुका है कि संघ राष्ट्र की उन्नति और समाज को एकजुट रखने के लिए व्यक्ति और व्यक्तित्व का निर्माण करता है। यह राजनीतिक संगठन नहीं है। इसके बावजूद संघ पर राजनीतिक बयानबाजी होती रहती है। केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि एक और दिन, और भारत के सबसे बड़े झूठ बोलने वाले राहुल गांधी की ओर से एक और झूठी कहानी। आपके पिता, दादी और परदादा ने दशकों तक सत्ता का आनंद लिया। आपके परिवार की विरासत गंभीर भ्रष्टाचार से जुड़ी रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने ही जनता के भारी जनादेश और विकास के स्पष्ट एजेंडे के साथ आपके परिवार की सत्ता पर एकाधिकार को तोड़ा। अपनी राजनीतिक नौटंकी में दूसरे सम्मानित राष्ट्रीय नेताओं का नाम लेना केवल आपकी हताशा को उजागर करता है। आपकी कोई विश्वसनीयता नहीं बची है। दिखावटी धरने और बनावटी सोशल मीडिया लाइक्स, जनता के भरोसे या असली नेतृत्व की जगह नहीं ले सकते।
Friends of RSS का जवाब
सोशल मीडिया पर Friends of RSS की ओर से राहुल गांधी को जवाब दिया गया है। इसकी तरफ से लिखा गया, ‘प्रिय राहुल गांधी, आप कहते हैं कि आप एक दशक से भी ज़्यादा समय से RSS को “पूरी तरह” समझते हैं। फिर भी, ऐसा लगता है कि इसके इतिहास को समझने में आपसे कुछ अध्याय छूट गए हैं। आपके परदादा की सरकार ने 1948 में RSS पर प्रतिबंध लगाया था। आपकी दादी की सरकार ने 1975 में इमरजेंसी के दौरान इस पर प्रतिबंध लगाया था। कांग्रेस के नेतृत्व वाली एक और सरकार ने 1992 में इस पर प्रतिबंध लगाया था। तीन प्रतिबंध। 1925 में शुरू हुए एक संगठन को रोकने की तीन कोशिशें। और क्या हुआ? प्रतिबंध हटा दिए गए। RSS का काम चलता रहा। और जिस संगठन को आप खत्म हो चुका बताते रहते हैं, वह आज भी मौजूद है। अगर किसी संगठन पर प्रतिबंध लगाना ही उसे खत्म करने के लिए काफी होता, तो आपके परिवार की राजनीतिक विरासत ने दशकों पहले ही इस सवाल का निपटारा कर दिया होता। इसके बजाय, आप अभी भी उसी संगठन के बारे में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं और पोस्ट लिख रहे हैं। आप RSS को कायर कहते हैं। लेकिन इमरजेंसी के दौरान, जब नागरिकों की आज़ादी छीन ली गई थी और विपक्ष के नेताओं को जेल में डाल दिया गया था, तब RSS के स्वयंसेवक भी उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने सरकार का विरोध किया था। आपकी दादी की सरकार ने राजनीतिक विरोधियों को जेल में डालते हुए RSS पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। कायरता की काफी दिलचस्प परिभाषा है, मिस्टर गांधी। और कृपया संविधान की रक्षा करने के बारे में नाटकीय बातें न करें। संविधान किसी एक राजनीतिक घराने, किसी एक पार्टी या किसी एक परिवार की संपत्ति नहीं है। भारत यहां के लोगों का है। आप कहते हैं कि आपके पास ज़रूरी जानकारी है। बहुत बढ़िया। तो सबूत पेश करें, न कि नाटकीय धमकियाँ दें। अपने आरोपों को स्पष्ट करें, तथ्य सामने रखें और जनता को फैसला करने दें। RSS ने प्रतिबंधों, आलोचना, राजनीतिक विरोध और दशकों की दुश्मनी का सामना किया है। इसके बावजूद इसने अपना काम जारी रखा है। आप इसकी विचारधारा से असहमत हो सकते हैं, लेकिन लाखों लोगों को कायर कहने से आपकी बात मज़बूत नहीं होती।
यह भी लिखा, ‘इतिहास की एक आखिरी बात: RSS की स्थापना 1925 में हुई थी। आपका राजनीतिक परिवार दशकों तक भारत के सर्वोच्च पद पर रहा है। फिर भी, लगभग एक सदी बाद भी, आप देश को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि RSS खत्म होने वाला है। शायद असली सवाल यह नहीं है कि RSS इतने सालों तक कैसे टिका रहा। शायद असली सवाल यह है कि कांग्रेस को अभी भी RSS की ज़रूरत क्यों है ताकि वह उसे अपना मुख्य विलेन बना सके। राहुल जी, तथ्यों के साथ बहस कीजिए। इतिहास ने पहले ही बहुत सारे नारे सुन लिए हैं। वंदे मातरम। भारत माता की जय।
उपचुनाव में बुरी तरह हारी कांग्रेस
हाल ही में असम में स्थानीय चुनाव, बंगाल में विधानसभा उपचुनाव और असम में लोकसभा उपचुनाव में भाजपा ने कांग्रेस को बुरी तरह से हराया है। मुस्लिम तुष्टिकरण की नींव पर खड़ी कांग्रेस को पश्चिम बंगाल की मुस्लिम बहुल रेजिनगर विधानसभा सीट और असम की मुस्लिम बहुल नौगांव लोकसभा सीट पर हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हो गई।
















