छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को लेकर अब समाधान की उम्मीद बढ़ी है। ओडिशा प्रवास के दौरान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों राज्यों के विकास, आपसी सहयोग और जनहित से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। सबसे अहम चर्चा महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर रही।
महानदी विवाद पर समाधान की उम्मीद
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भुवनेश्वर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि महानदी जल बंटवारे को लेकर अब पहले जैसी विवाद की स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में एक ही राजनीतिक गठबंधन की सरकार है और केंद्र सरकार भी इस मामले को सुलझाने की दिशा में सक्रिय है। ऐसे में बेहतर समन्वय के जरिए इस पुराने विवाद का समाधान जल्द निकल सकता है। महानदी जल विवाद करीब चार दशक से अधिक पुराना है। वर्ष 1983 में यह विवाद मध्य प्रदेश और ओडिशा के बीच शुरू हुआ था। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद यह मामला छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच आ गया। दोनों राज्यों के बीच कई बार बातचीत हुई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।
वर्ष 2016 में ओडिशा सरकार ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग करते हुए औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद 12 मार्च 2018 को केंद्र सरकार ने महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल का गठन किया। महानदी दोनों राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके पानी पर खेती, पेयजल और दूसरे विकास कार्य निर्भर हैं। ऐसे में विवाद का समाधान दोनों राज्यों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के बीच भी मजबूत संबंध हैं। ऐसे में दोनों राज्यों के बीच बेहतर तालमेल से न केवल जल विवाद के समाधान का रास्ता आसान होगा, बल्कि विकास और जनकल्याण के कामों को भी नई गति मिल सकती है।














