मथुरा (उत्तर प्रदेश)। राधाष्टमी के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के बैनर तले शनिवार को मथुरा जिले के विभिन्न स्थानों पर पारंपरिक जलाशयों और कुंडों का विधि-विधान से पूजन किया गया.
इस अनूठे अभियान को सफल बनाने के लिए पिछले एक पखवाड़े से गतिविधि के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर टोलियों का गठन करने और उन्हें प्रशिक्षित करने में जुटे हुए थे.
निर्धारित प्रशिक्षण के अनुसार सुबह के समय टोलियों से जुड़े स्वयंसेवक बंधु स्थानीय नागरिकों के साथ कुंडों और जलाशयों के तट पर पहुंचे. वहां वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद सभी उपस्थित लोगों ने कुंडों की संरक्षा एवं पवित्रता बनाए रखने की सामूहिक शपथ ली.
उपस्थित जनों ने संकल्प लिया कि जब तक वे जीवित हैं, तब तक अपने क्षेत्र के कुंड की पवित्रता और उसके संरक्षण का पूरा दायित्व उनका रहेगा. इसके पश्चात महिलाओं ने आगे बढ़कर कुंड की आरती को सस्वर गाया, जिसे वहां मौजूद सभी लोगों ने पूरी श्रद्धा के साथ दोहराया.
“पानी की कमी आने वाले समय में भयंकर युद्धों का बन सकती है कारण”- राकेश जैन
पिरसुआ राया खंड के मुख्य कार्यक्रम में उपस्थित रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के अखिल भारतीय सह-संयोजक राकेश जैन ने जल संकट की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज भी मनुष्य को जल के वास्तविक महत्व का पूरा अहसास नहीं हो रहा है, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब पानी की गंभीर किल्लत दुनिया में बड़े युद्धों का कारण बनेगी.
“यदि आज हमने स्थानीय स्तर पर कुंडों, पोखरों और जलाशयों को संरक्षित नहीं किया, तो आने वाला समय मानवता के लिए बेहद मुश्किलों भरा होगा। जल ही जीवन है और इसके स्रोतों को बचाना आज की सबसे बड़ी राष्ट्रीय व सामाजिक अनिवार्यता है।” – राकेश जैन, अखिल भारतीय सह-संयोजक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, RSS
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि जल संचयन और पारंपरिक जल स्रोतों की साफ-सफाई केवल सरकार का दायित्व नहीं है, बल्कि इसमें हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए. इस आयोजन से स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं में पर्यावरण व जल स्रोतों के प्रति एक नई जागरूकता देखने को मिली है.

















