गत दिनों भुवनेश्वर में पाञ्चजन्य पाठक सम्मेलन आयोजित हुआ। पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर तथा भारत प्रकाशन (दिल्ली) लि. के निदेशक श्री बाल कृष्ण मुद्गल के सान्निध्य में आयोजित इस सम्मेलन का शुभारंभ सामूहिक वंदे मातरम् गायन से हुआ।
श्री हितेश शंकर ने पाठक सम्मेलन की अवधारणा और भूमिका स्पष्ट करते हुए पाञ्चजन्य की आजादी से पूर्व प्रारंभ हुई यात्रा, ‘टैबलॉयड’ से पत्रिका और वर्तमान में डिजिटल माध्यम तक उसके विस्तार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘तेवर बदले हैं, कलेवर नहीं।’ उन्होंने विचार और राष्ट्रीय अस्मिता के आधार पर देश में विमर्श खड़ा करने, खबरों का तर्कपूर्ण विश्लेषण तथा निर्भीक पत्रकारिता को पाञ्चजन्य की पहचान बताया।
उन्होंने कहा कि पाञ्चजन्य केवल समाचार पत्रिका नहीं, बल्कि एक विचार पत्र है। सम्मेलन में कुछ ऐसे पाठक भी उपस्थित रहे, जो दशकों से पाञ्चजन्य पढ़ रहे हैं। प्रतिभागियों ने पत्रिका की सामग्री पर चर्चा करते हुए सुझाव दिए तथा ओडिशा के परिप्रेक्ष्य में अधिक समाचार प्रकाशित करने की आवश्यकता बताई।
पाठकों ने यह भी कहा कि अहिंदी-भाषी ओडिशा में भी पाञ्चजन्य के वीडियो और रील प्रभावी सिद्ध हो रहे हैं। पूर्व प्रशासनिक एवं बैंक अधिकारियों, विद्यार्थियों तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े पाठकों ने लेखों, रिपोर्टों, जानकारियों और विशेषांकों की सराहना की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, ओडिशा पूर्व प्रांत के सह प्रचार प्रमुख श्री मणींद्र सुंदर दास ने कहा कि अब पाञ्चजन्य को पहचान का संकट नहीं है। अंत में निदेशक श्री बाल कृष्ण मुद्गल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
एक ऐसा ही सम्मेलन 12 सितंबर को अमदाबाद में भी हुआ। इसमें आए पाठकों ने अपने अनुभव साझा किए और कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

















