पेरिस: फ्रांस के बुसी-सेंट-जॉर्जेस (Bussy-Saint-Georges) स्थित नवनिर्मित बीएपीएस स्वामीनारायण हिंदू मंदिर में 43 देशों के राजदूत और प्रतिनिधि पहुंचे। वे 10 सितंबर को एक विशेष ‘इंडो-फ्रेंच कल्चरल ओपन डे’ में शामिल हुए। यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधिमंडल ने समारोह का आयोजन किया। इनमें यूरोप, अफ्रीका, एशिया, अरब देशों, अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
कार्यक्रम से पहले सभी अतिथियों का पारंपरिक भारतीय भोजन के साथ स्वागत किया गया। समारोह में मंदिर के निर्माण के मूल सिद्धांतों- सेवा, सांस्कृतिक समझ और अंतर-सांस्कृतिक संवाद के बारे में अतिथियों को जानकारी दी गई।
भारत में निर्मित, फ्रांस में असेंबल्ड
यूनेस्को में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि विशाल शर्मा ने समारोह को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि यह मंदिर भारत की सभ्यतागत विरासत और भारत-फ्रांस के सहयोग से साकार हुई शिल्पकला का अद्भुत संगम है। यूनेस्को से जुड़े हम सभी के लिए इसका विशेष महत्व है, क्योंकि संस्कृति और विरासत यूनेस्को के मूल में हैं। यहां भारतीय सांस्कृतिक विरासत भारत से बाहर एक जीवंत परंपरा के रूप में साकार हो रही है और ‘भारत में निर्मित, फ्रांस में असेंबल्ड’ इस मंदिर का पूरा विश्व स्वागत कर रहा है।

प्राचीन शिल्पकला और आधुनिक इंजीनियरिंग का अनूठा संगम
समारोह में डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई। इसमें दर्शाया गया कि कैसे मंदिर के निर्माण में सदियों पुरानी भारतीय स्थापत्य परंपराओं और शिल्पकला का फ्रांस की आधुनिक इंजीनियरिंग कुशलता के साथ अनूठा तालमेल बैठाया गया है।
यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर की डिप्टी डायरेक्टर ज्योति होसाग्रहर ने मंदिर को जीवंत विरासत और सांस्कृतिक संवाद का एक उत्कृष्ट प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यूनेस्को ऐसी पहलों को विशेष महत्व देता है, जो सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मनाती हैं, समुदायों के बीच संबंधों को मजबूत करती हैं तथा परस्पर समझ और अंतर-सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देती हैं।











