अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे किशनगंज के गांवों में अब प्रशासन की सक्रियता और बढ़ेगी। सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा को मजबूत करने के साथ स्थानीय ग्रामीणों को प्रशासन और सीमा प्रहरी बलों से जोड़ने तथा सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने के लिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम lI के तहत विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसे लेकर गत दिनों जिलाधिकारी नवीन कुमार की अध्यक्षता में संबंधित नोडल एवं प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई।
बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सीमावर्ती गांवों में महज औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीणों के साथ नियमित संवाद और जमीनी स्तर पर प्रभावी संपर्क स्थापित किया जाए। स्थानीय समस्याओं, सुझावों और सीमा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को दर्ज कर उनके समाधान के लिए संबंधित विभागों से समन्वय किया जाए। सीमा सुरक्षा, नागरिक दायित्व, संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने की प्रक्रिया और आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया को लेकर ग्रामीणों को जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया।
ये गांव किए गए चिह्नित
टेढ़ागाछ, दिघलबैंक और ठाकुरगंज के 28 गांव चिह्नित VVP-II के तहत टेढ़ागाछ प्रखंड के रामपुर, झाला, पिपरा, बैरिया, चिचौरा, कंचनबाड़ी, फुलबाड़ी, भोरहा और खनियाबाद गांवों को चिह्नित किया गया है। दिघलबैंक प्रखंड में टप्पू, बैजनाथ पलसा, मालटोली, लोहागाड़ा, पांचगाछी, डोरिया, सिंधिमारी, तुलसिया, धनतोला, हाड़ीभिट्टा, सिंधिमारी मिलिक और पलसा शामिल हैं। वहीं ठाकुरगंज प्रखंड के भेडरानी, ग्वालटोली, चुरली, सुखानी, भातगांव, हुलहुली, कोईया और दल्लेगांव में विशेष आउटरीच गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
जिलाधिकारी ने नोडल पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने आवंटित गांवों में विद्यालयों, सामुदायिक केंद्रों और अन्य उपयुक्त स्थलों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें। स्थानीय संस्कृति और राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक एवं सामुदायिक कार्यक्रमों के साथ चिकित्सा, पशु चिकित्सा और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े बहु-क्षेत्रीय सेवा शिविर भी आयोजित किए जाएंगे।
सीमा सुरक्षा के साथ रोजगार और पर्यटन पर भी फोकस
प्रशासन ने सीमावर्ती क्षेत्रों को केवल सुरक्षा के नजरिये से देखने के बजाय स्थानीय विकास से जोड़ने की रणनीति अपनाई है। स्थानीय विरासत, संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के जरिए आजीविका के अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया गया है। आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
नोडल पदाधिकारियों को समय-समय पर क्षेत्र भ्रमण कर जमीनी स्थिति का आकलन करने और जरूरत पड़ने पर उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है। जिला प्रशासन, पुलिस, एसएसबी, पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
हर परिवार का होगा विस्तृत सर्वेक्षण
बैठक का सबसे अहम निर्देश यह रहा कि VVP-II के तहत चयनित गांवों में प्रत्येक परिवार का विस्तृत सर्वेक्षण कराया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत आच्छादन सुनिश्चित करना है। यानी सीमावर्ती गांवों में कौन-सा परिवार किस योजना से वंचित है, इसकी पहचान कर लाभ दिलाने की दिशा में प्रशासन सीधे काम करेगा।
सभी कार्यक्रमों का तिथि, स्थान, गतिविधि, प्रतिभागियों की संख्या, विभागीय भागीदारी, फोटोग्राफ और प्रमुख निष्कर्ष सहित रिकॉर्ड रखने तथा गतिविधियों की प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि आउटरीच गतिविधियां स्थानीय संस्कृति के प्रति संवेदनशील, जनभागीदारी आधारित, टिकाऊ और सभी के लिए सुलभ हों, ताकि ग्रामीणों और सीमा प्रहरी बलों एवं प्रशासन के बीच विश्वास और सहयोग की मजबूत नींव तैयार हो सके। बैठक में उपविकास आयुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी, अपर समाहर्ता विभागीय जांच, अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन, विशेष कार्य पदाधिकारी, गोपनीय शाखा, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक, जिला योजना पदाधिकारी सहित संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।
















