नई दिल्ली। राखीगढ़ी से मिले मानव कंकालों के वैज्ञानिक अध्ययन से 5 हजार साल पुरानी सभ्यता के राज खुलने की उम्मीद है। वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलेगा कि 5 हजार साल पहले सिंधु सभ्यता के लोगों का जीवन कैसा था? इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हरियाणा के राखीगढ़ी पुरास्थल से मिले तीन मानव कंकालों को विस्तृत जांच के लिए भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण (एएनएसआई), कोलकाता भेजा है।
वैज्ञानिक इन कंकालों की हड्डियों और उपलब्ध जैविक अवशेषों की जांच करेंगे। इसके साथ ही डीएनए जांच से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि उस समय के लोगों की वंशावली क्या थी और वे किन आबादी से जुड़े हुए थे। इन मानव कंकालों की जांच से वैज्ञानिकों को उस समय के लोगों के खान-पान और जीवनशैली के बारे में अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह पता भी लगने की उम्मीद है कि उस सभ्यता के लोगों का शारीरिक विकास कैसा था। डीएनए जांच से प्राचीन मानव आबादी के बीच संबंध और संभावित प्रवास को समझने में मदद मिल सकती है।
बता दें कि राखीगढ़ी भारत की प्राचीनतम सरस्वती सिंधु सभ्यता का पुरास्थल है। यह हरियाणा के हांसी जिले में है। सरस्वती सिंधु सभ्यता का यह पुरास्थल ऋग्वेद में वर्णित दृष्दवति नदी के किनारे पर स्थित था। इस पुरास्थल की 1997 से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा समय समय पर खुदाई की गई है। हाल ही में हुए सघन पुरातात्विक सर्वेक्षण से यह ज्ञात हुआ है की राखीगढ़ी नगर का कुल क्षेत्रफल 350 हेक्टेयर से अधिक था। यह विस्तार राखीगढ़ी को सरस्वती सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा नगर होना सिद्ध करता है। राखीगढ़ी से कुछ दूरी पर ही सरस्वती नदी व दृष्दवति नदी ता संगम अवस्थित था। यही कारण है कि सभ्यता का सबसे बड़ा नगर यहां स्थित था।

















