उत्तराखंड के उधम सिंह नगर के काशीपुर में मौजूद मशहूर ऐतिहासिक गोविषाण टीला, काशीपुर में आर्कियोलॉजिकल खुदाई का काम कुमाऊं डिविजन के कमिश्नर दीपक रावत की मौजूदगी में शुरू हुआ। सबसे पहले कमिश्नर और दूसरे अधिकारियों ने साइट का इंस्पेक्शन किया और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के कंजर्वेशन के काम की तारीफ की।
गोविषाण की विरासत को मिलेगा नया आयाम
यह खुदाई सिर्फ़ एक रिसर्च की कोशिश नहीं है, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शानदार इतिहास को पहचानने की दिशा में एक ज़रूरी कदम है। इस खोज से मिले आर्कियोलॉजिकल सबूतों से पुराने गोविषाण की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यता की विरासत के कई ज़रूरी पहलू सामने आएंगे। हरेला त्योहार के मौके पर, पर्यावरण बचाने और हरियाली के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए साइट के आंगन में अलग-अलग तरह के पौधे उत्साह से लगाए गए।
इस कार्यक्रम में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), देहरादून डिवीजन के अधीक्षक पुरातत्वविद् डॉ. मोहन चंद्र जोशी (प्रशासन) मौजूद थे। इस मौके पर कमिश्नर श्री रावत ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी विरासत को जानने, समझने और सहेजने के मकसद से यहां रिसर्च का काम शुरू किया गया है। गौरतलब है कि काशीपुर को प्राचीन शहर का दर्जा हासिल है।
















