दुनिया ताकतवर को देखती है: गोटन में RSS सरसंघचालक जी ने कहा- 'व्यक्ति से लेकर राष्ट्र तक सामर्थ्य अनिवार्य है'
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दुनिया ताकतवर को देखती है: गोटन में RSS सरसंघचालक जी ने कहा- ‘व्यक्ति से लेकर राष्ट्र तक सामर्थ्य अनिवार्य है’

गोटन के LKSEC वार्षिक उत्सव में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा- शिक्षा का उद्देश्य केवल पेट भरना नहीं, मनुष्य को श्रेष्ठ बनाना है।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Sep 14, 2026, 12:57 am IST
inभारत, संघ @100, राजस्थान

गोटन (नागौर, राजस्थान)। राजस्थान के नागौर जिले के गोटन स्थित प्रतिष्ठित एल.के. सिंघानिया एजुकेशन सेंटर (LKSEC) के 37वें वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह ‘स्वराज’ में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने विद्यार्थियों और प्रबुद्धजनों को संबोधित किया. उन्होंने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में स्पष्ट किया कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल आजीविका कमाना या पेट भरना नहीं है, बल्कि मनुष्य को श्रेष्ठ, समर्थ और संवेदनशील नागरिक बनाना है.

सरसंघचालक जी ने औपचारिक और अनौपचारिक शिक्षा के अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि विद्यालयीन ज्ञान के साथ-साथ परिवार, सामाजिक परिवेश और आत्मीय वातावरण से मिलने वाले संस्कार ही विद्यार्थी के आचरण और चरित्र की मजबूत नींव तैयार करते हैं.

“मानवत्व से देवत्व की यात्रा है जीवन, विचार शक्ति ही मनुष्य की असली पहचान”

सरसंघचालक जी ने कहा कि आहार, निद्रा, भय और मैथुन जैसी मूल प्रवृत्तियां पशुओं में भी समान रूप से पाई जाती हैं, किंतु प्रकृति ने केवल मनुष्य को ही विवेक और विचार करने की असीम शक्ति प्रदान की है. इसी विचार शक्ति के बल पर कोई भी मनुष्य ‘नर से नारायण’ बनने की सामर्थ्य रखता है.

“यदि हमारे कर्म सद्विचार और परोपकार से प्रेरित हों तो मनुष्य देवत्व को प्राप्त करता है, अन्यथा वह पतन की ओर अग्रसर हो जाता है। अतः मनुष्य की संपूर्ण जीवन-यात्रा मानवत्व से अतिमानवत्व और अतिमानवत्व से देवत्व की ओर होनी चाहिए। बिना शक्ति के सत्य भी पंगु हो जाता है, इसलिए शरीर, मन, बुद्धि और ज्ञान का बल अनिवार्य है।” – डॉ. मोहन भागवत जी, सरसंघचालक, RSS

उन्होंने कहा कि आज वैश्विक पटल पर भारत का आर्थिक, सामरिक और बौद्धिक सामर्थ्य तेजी से सुदृढ़ हुआ है, यही कारण है कि आज संपूर्ण विश्व भारत के प्राचीन विचारों, दर्शन और ज्ञान को गंभीरता से सुन रहा है और स्वीकार कर रहा है.

सफलता से बड़ा है जीवन की ‘सार्थकता’ का भाव

जीवन के मूल ध्येय पर प्रकाश डालते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि जीवन में केवल यशस्वी (सफलता प्राप्त करना) होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवन का ‘सार्थक’ होना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है. सफलता और असफलता कई बार पुरुषार्थ के साथ-साथ प्रारब्ध पर भी निर्भर करती है, परंतु परमार्थ और लोक-कल्याण की भावना से किया गया कर्म व्यक्ति को इतिहास में अमर बना देता है.

समारोह के मुख्य वैचारिक संदेश:

  • इतिहास उन्हीं को याद रखता है: इतिहास उन्हीं महान विभूतियों का स्मरण करता है जिन्होंने समाज के लिए सर्वस्व अर्पण किया—चाहे वे दानवीर भामाशाह हों, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम हों, स्वामी विवेकानंद हों या देश की स्वाधीनता के लिए हंसते-हंसते प्राण न्योछावर करने वाले अमर बलिदानी हों।
  • सर्वांगीण शिक्षा प्रणाली: शिक्षा केवल किताबी या वैज्ञानिक विषयों तक सीमित न रहकर सर्वांगीण होनी चाहिए। कला, संगीत, क्रीड़ा और योग शिक्षा के अभिन्न अंग हैं।
  • खेलों का जीवन दर्शन: कबड्डी जैसे खेल जीवन में कभी हार न मानकर पुनः खड़े होने का संकल्प सिखाते हैं, जबकि संगीत मन, बुद्धि और शरीर के बीच अद्भुत समन्वय स्थापित करता है।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने शिक्षण संस्थानों से आह्वान किया कि वे केवल डिग्रियां और उपाधियां बांटने के केंद्र न बनकर ‘मनुष्य निर्माण के तीर्थ’ बनें, जहाँ विद्यार्थियों में अटूट आत्मविश्वास, सच्चरित्रता और राष्ट्रभक्ति के उच्च संस्कार सहज रूप से पल्लवित हो सकें. अपने लिए तो सभी जीते हैं, किंतु जो समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए जीता है, उसी का जीवन वास्तविक अर्थों में सार्थक होता है.

Topics: गोटन एलके सिंघानिया एजुकेशन सेंटर डॉ मोहन भागवत वार्षिक उत्सवGotan LKSEC Annual Function Dr Mohan Bhagwat RSS AddressLK Singhania Education Centre Gotan Mohan Bhagwat SwarajEducation Purpose Manavta se Devatva Mohan Bhagwat
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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