पाञ्चजन्य के ‘सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान 2.0’ में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दुबे ने वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा के साथ संवाद किया। प्रस्तुत हैं मुख्यांश
आज के समय में साइबर अपराध के कई तरीके उजागर हुए हैं। आम लोगों को सबसे पहले क्या समझना चाहिए?
साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। किसी के पैसे चले जाते हैं, किसी का सोशल मीडिया खाता हैक हो जाता है और कई बार फोन भी चोरी हो जाता है। फोन चोरी होने पर केवल उसे लॉक करना काफी नहीं है। तुरंत सिम और बैंकिंग सेवाओं को भी सुरक्षित करना चाहिए। यूपीआई और पिन की जानकारी किसी को नहीं देनी चाहिए।
क्या सिर्फ सिम कार्ड के जरिए किसी के यूपीआई तक पहुंच बनाई जा सकती है?
अपराधी कई तरीकों से बैंकिंग व्यवस्था तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। कुछ मामलों में यूएसएसडी जैसी सेवाओं का भी दुरुपयोग किया जा सकता है। इसलिए यूपीआई या पिन किसी को न बताएं और अनजान व्यक्ति के कहने पर उसे रीसेट न करें। साइबर अपराध के तरीके लगातार बदलते रहते हैं।
साइबर अपराध के हर नए तरीके को जान पाना संभव है?
नहीं। हर नए तरीके को याद रखना संभव नहीं है। इसके बजाय एक बात हमेशा याद रखें। साइबर अपराध के पीछे अक्सर डर या लालच होता है। आपको डराया जाएगा या कुछ पाने का लालच दिया जाएगा।
डर और लालच के जरिए लोगों को किस तरह फंसाया जाता है?
कभी कहा जाता है कि आपके नाम कोई पार्सल आया है, कभी गिफ्ट या लॉटरी का लालच दिया जाता है। कोई बिना वजह कुछ देने का दावा करे, तो पहले पूछिए कि वह ऐसा क्यों कर रहा है। डिजिटल अरेस्ट के मामलों में डिजिटल अरेस्ट में अपराधी खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या सरकारी अधिकारी बताकर डराते हैं। अगर कोई फोन पर धमकाकर पैसे मांग रहा है या वीडियो कॉल पर निगरानी में रहने को कह रहा है, तो यह खतरे का संकेत है।
कई बार साइबर अपराधियों के पास हमारी निजी जानकारी भी होती है। इससे लोग और ज्यादा भरोसा कर लेते हैं। इससे कैसे बचें ?
किसी अपराधी के पास आपकी निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह असली अधिकारी है। हम खरीदारी, यात्रा, लोकेशन और सोशल मीडिया के जरिए बहुत-सा डेटा साझा करते हैं। इसलिए यह जानना जरूरी है कि हमारा डेटा कहां और कैसे इस्तेमाल हो रहा है।
क्या सोशल मीडिया और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए ?
नहीं। डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करना है, लेकिन सावधानी के साथ।
साइबर अपराध से बचने के लिए आपकी नजर में सबसे महत्वपूर्ण मंत्र क्या है ?
मेरा मंत्र है-जागरूक रहिए, डरिए मत। डिजिटल दुनिया छोड़ने की जरूरत नहीं है, उसे समझने की जरूरत है। अगर कोई डराए, रुकिए। लालच दे, रुकिए। गोपनीय जानकारी मांगे, रुकिए। तुरंत कोई कार्रवाई करने को कहे, तब भी रुकिए। डर, लालच, जल्दबाजी और भरोसा उनके सबसे बड़े हथियार हैं। इसलिए सही जानकारी, सतर्कता और सोच-समझकर लिया गया निर्णय ही डिजिटल युग में सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।
















